मंगलवार, 28 जुलाई 2026

आपकी याद आती रही रात भर.../ शायर : मखदूम मोहिउद्दीन / गायन : छाया गांगुली

https://youtu.be/IHS8QBdGPlU  



आप की याद आती रही रात भर
चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर

रात भर दर्द की शम्अ जलती रही
ग़म की लौ थरथराती रही रात भर

बाँसुरी की सुरीली सुहानी सदा
याद बन बन के आती रही रात भर

याद के चाँद दिल में उतरते रहे
चाँदनी जगमगाती रही रात भर

कोई दीवाना गलियों में फिरता रहा
कोई आवाज़ आती रही रात भर

रविवार, 26 जुलाई 2026

जगन्नाथाष्टकं... / श्रीमत् शंकराचार्यविरचितं / गायन : सुनन्दा पटनायक

https://youtu.be/3CHPZwy  


कदाचित् कालिन्दी तट विपिन सङ्गीत तरलो
मुदाभीरी नारी वदन कमला स्वाद मधुपः
रमा शम्भु ब्रह्मामरपति गणेशार्चित पदो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥१॥

भुजे सव्ये वेणुं शिरसि शिखिपिच्छं कटितटे
दुकूलं नेत्रान्ते सहचर-कटाक्षं विदधते ।
सदा श्रीमद्‍-वृन्दावन-वसति-लीला-परिचयो
जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥२॥

महाम्भोधेस्तीरे कनक रुचिरे नील शिखरे
वसन् प्रासादान्तः सहज बलभद्रेण बलिना ।
सुभद्रा मध्यस्थः सकलसुर सेवावसरदो
जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥३॥

कृपा पारावारः सजल जलद श्रेणिरुचिरो
रमा वाणी रामः स्फुरद् अमल पङ्केरुहमुखः ।
सुरेन्द्रैर् आराध्यः श्रुतिगण शिखा गीत चरितो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥४॥

रथारूढो गच्छन् पथि मिलित भूदेव पटलैः
स्तुति प्रादुर्भावम् प्रतिपदमुपाकर्ण्य सदयः ।
दया सिन्धुर्बन्धुः सकल जगतां सिन्धु सुतया
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥५॥

परंब्रह्मापीड़ः कुवलय-दलोत्‍फुल्ल-नयनो
निवासी नीलाद्रौ निहित-चरणोऽनन्त-शिरसि ।
रसानन्दी राधा-सरस-वपुरालिङ्गन-सुखो
जगन्नाथः स्वामी नयन-पथगामी भवतु मे ॥६॥

न वै याचे राज्यं न च कनक माणिक्य विभवं
न याचेऽहं रम्यां सकल जन काम्यां वरवधूम् ।
सदा काले काले प्रमथ पतिना गीतचरितो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥७॥

हर त्वं संसारं द्रुततरम् असारं सुरपते
हर त्वं पापानां विततिम् अपरां यादवपते ।
अहो दीनेऽनाथे निहित चरणो निश्चितमिदं
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥८॥

जगन्नाथाष्टकं पुन्यं यः पठेत् प्रयतः शुचिः ।
सर्वपाप विशुद्धात्मा विष्णुलोकं स गच्छति ॥९॥

॥ इति श्रीमत् शंकराचार्यविरचितं जगन्नाथाष्टकं संपूर्णम् ॥

शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

कर कटावरी तुळसीच्या माळा। ऐसे रूप डोळा दावी हरी.../ अभंग / सन्त तुकाराम महाराज / गायन : दीपिका भिडे भागवत

https://youtu.be/nw6r-sJMvuM. 

कर कटावरी तुळसीच्या माळा। ऐसे रूप डोळा दावी हरी॥
ठेविले चरण दोन्ही विटेवरी। ऐसे रूप हरी दावी डोळा॥
कटी पितांबर कास मिरवली। दाखवी वहिली ऐसी मूर्ती॥
गरुडपारावरी उभा राहिलासी। आठवे मानसी तेचि रूप॥
झुरोनि पांझरा होऊ पाहे आता। येई पंढरीनाथा भेटावया॥
तुका म्हणे माझी पुरवावी आस। विनंती उदास करू नये॥


अर्थ  :

हे हरी, कमरपर हाथ रखे और गले में तुलसीकी माला पहने ऐसा रूप मैं अपनी आँखों से देखूं। और हे हरी, दोनो चरण ईंट पर रखे हुए ऐसा रूप मैं इन आँखों से देखूं। त्वरित, अपनी कमर में पीतांबर पहनी मूर्ती मुझे दिखाओ। गरुडपर खडे हुए आपका रूप मैं मन में याद कर रहा हूँ। आपकी इस मूर्ती को देखने की तीव्र इच्छा की वजह से मैं अब अस्थिपंजर का सा हो गया हूँ। अब तो, हे पंढरीनाथ, मेरी इच्छापूर्ती करो। मेरी विनती को न दुत्कारो। 

शनिवार, 18 जुलाई 2026

भरि नगरी मे शोर.../ मैथिल लोक गीत / रचना : रवीन्द्र नाथ ठाकुर / गायन : सुमन कल्याणपुर

https://youtu.be/zLRkBPfDH4w


भरि नगरी मे शोर 
बउआ मामी तोहर गोर 
मामा चाँद सन !

नानी-नाना दूनो तोहर 
खाली गाल बजाबय
बाबी तोहर गंगा तन छौ
बाबा बनल हिमालय 
अरे !
मौसा तोहर चोर 
मौसी मुंहक बड्डजोर 
मैया पान सन !

थैया-थैया चलू कन्हैया 
थैया-थैया ता-ता थैया
थैया-थैया चलू कन्हैया
जहिना भोर बसाय 
धरती मैया सब दुःख हरनि
खसबले कोनो बाय
बउआ मोती सन इ लोर
बीछत खाली आंचल मोर
अपने प्रान सन !

अपना कुल के लाल कमल 
त काकिक सूगा-मैना
एहि दुखिया के हंसी-खुसी
आ बापक नइ हय खिलौना
कहु बाबू
तो आसि के चकमक भोर 
हंसिबे खोलिके दूनू ठोर 
कूटल धान सन !

शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

हनुमद्भुजंग स्तोत्रम्.../

https://youtu.be/RsdiYVHWr4Y  


प्रसन्नांगरागं प्रभाकांचनांगं
जगद्भीतशौर्यं तुषाराद्रिधैर्यम् ।
तृणीभूतहेतिं रणोद्यद्विभूतिं
भजे वायुपुत्रं पवित्राप्तमित्रम् ॥ १ ॥

भजे पावनं भावना नित्यवासं
भजे बालभानु प्रभा चारुभासम् ।
भजे चंद्रिका कुंद मंदार हासं
भजे संततं रामभूपाल दासम् ॥ २ ॥

भजे लक्ष्मणप्राणरक्षातिदक्षं
भजे तोषितानेक गीर्वाणपक्षम् ।
भजे घोर संग्राम सीमाहताक्षं
भजे रामनामाति संप्राप्तरक्षम् ॥ ३ ॥

कृताभीलनाधक्षितक्षिप्तपादं
घनक्रांत भृंगं कटिस्थोरु जंघम् ।
वियद्व्याप्तकेशं भुजाश्लेषिताश्मं
जयश्री समेतं भजे रामदूतम् ॥ ४ ॥

चलद्वालघातं भ्रमच्चक्रवालं
कठोराट्टहासं प्रभिन्नाब्जजांडम् ।
महासिंहनादा द्विशीर्णत्रिलोकं
भजे चांजनेयं प्रभुं वज्रकायम् ॥ ५ ॥

रणे भीषणे मेघनादे सनादे
सरोषे समारोपणामित्र मुख्ये ।
खगानां घनानां सुराणां च मार्गे
नटंतं समंतं हनूमंतमीडे ॥ ६ ॥

घनद्रत्न जंभारि दंभोलि भारं
घनद्दंत निर्धूत कालोग्रदंतम् ।
पदाघात भीताब्धि भूतादिवासं
रणक्षोणिदक्षं भजे पिंगलाक्षम् ॥ ७ ॥

महाग्राहपीडां महोत्पातपीडां
महारोगपीडां महातीव्रपीडाम् ।
हरत्यस्तु ते पादपद्मानुरक्तो
नमस्ते कपिश्रेष्ठ रामप्रियाय ॥ ८ ॥

जराभारतो भूरि पीडां शरीरे
निराधारणारूढ गाढ प्रतापी ।
भवत्पादभक्तिं भवद्भक्तिरक्तिं
कुरु श्रीहनूमत्प्रभो मे दयालो ॥ ९ ॥

महायोगिनो ब्रह्मरुद्रादयो वा
न जानंति तत्त्वं निजं राघवस्य ।
कथं ज्ञायते मादृशे नित्यमेव
प्रसीद प्रभो वानरेंद्रो नमस्ते ॥ १० ॥

नमस्ते महासत्त्ववाहाय तुभ्यं
नमस्ते महावज्रदेहाय तुभ्यम् ।
नमस्ते परीभूत सूर्याय तुभ्यं
नमस्ते कृतामर्त्य कार्याय तुभ्यम् ॥ ११ ॥

नमस्ते सदा ब्रह्मचर्याय तुभ्यं
नमस्ते सदा वायुपुत्राय तुभ्यम् ।
नमस्ते सदा पिंगलाक्षाय तुभ्यं
नमस्ते सदा रामभक्ताय तुभ्यम् ॥ १२ ॥

हनूमद्भुजंगप्रयातं प्रभाते
प्रदोषेऽपि वा चार्धरात्रेऽपि मर्त्यः ।
पठन्नश्नतोऽपि प्रमुक्तोघजालो
सदा सर्वदा रामभक्तिं प्रयाति ॥ १३ ॥

इति श्रीमदांजनेय भुजंगप्रयात स्तोत्रम् ।

गुरुवार, 16 जुलाई 2026

देवन के पति इन्द्र तारा के पति चन्द्र.../ महाराज स्वाति तिरुनाल कृति / भाषा : अवधी / गायन : श्रीवाल्सन जे. मेनन

https://youtu.be/QMHUq_Sp3DA  


पल्लवी

देवन के पति इन्द्र तारा के पति चन्द्र 
विद्या के पति गणेश दुःख भार हारी

चरणम्  १

रागपति कन्नड़ भजन के पति वीणा
ऋतुपति है वसंत रतिपति सुखकारी

चरणम्  २

मुनिजन पति व्यास पक्षीपति हंस 
नरपति राम अवधविहारी

चरणम्  ३

गिरिपति हिमाचल भूतों के पति महेश्वर 
तीन लोक पति श्री पद्मनाभ गिरिधारी

बुधवार, 15 जुलाई 2026

श्री राधिका आज आनन्द में डोले.../ रचना : संत श्रीभट्ट देवाचार्य जी महाराज / गायन : आनन्द भैय्या जी, वृन्दावन

https://youtu.be/XFW3Tdjj29U  


(दोहा)
सांवर ससि संग लसि प्रिया, भरी सरस रस छंद।
डोलत हैं श्री राधिका, अति ही आज आनंद।।

राधिका आज आनन्द में डोले॥
सांवर चंद गोविन्द के रस भरी दूसरी कोकिला मधुर स्वर बोले।।


पहर तन नील पट कनक हारावली हाथ ले आरसी रूप को तोले॥


कहत श्रीभट्ट व्रजनारिन नागर बनी कृष्ण के शील की ग्रन्थिका खोले॥

नीलाद्रिनाथं नमामि नित्यं.../ रचना : डाॅ रूरू कुमार महापात्रा / गायन : अभिलिप्सा पंडा

https://youtu.be/8NagbHO9LvY  


नीलाद्रिनाथं नमामि नित्यं
नमामि नित्यं नीलाद्रिनाथं
नीलाद्रिनाथं नमामि नित्यं
नमामि नित्यं नीलाद्रिनाथं
नौमि प्रणोमि नमस्कारोमि
नौमि प्रणोमि नमस्कारोमि
गृणामि नित्यं नीलाद्रिनाथं
नीलाद्रिनाथं नमामि नित्यं
नमामि नित्यं नीलाद्रिनाथं

आनन्दकन्दं सुचन्दस्यान्दं
पूर्णारविन्दं सदैव वन्द्यम्
आनन्दकन्दं सुचन्दस्यान्दं
पूर्णारविन्दं सदैव वन्द्यम्
नौमि प्रणोमि नमस्कारोमि
नौमि प्रणोमि नमस्कारोमि
मुखारविन्दं पदारविन्दं
नीलाद्रिनाथं नमामि नित्यं
नमामि नित्यं नीलाद्रिनाथं

अशेषतोषं सुहासवासं
मधुप्रकाशं विषविनाशम्
अशेषतोषं सुहासवासं
मधुप्रकाशं विषविनाशम्
नौमि प्रणोमि नमस्कारोमि
नौमि प्रणोमि नमस्कारोमि
श्रीशं सुरेशं जगत्-ईशमीशं
नीलाद्रिनाथं नमामि नित्यं
नमामि नित्यं नीलाद्रिनाथं

सदावसन्तं हृदयहसन्तं
श्रीयालसन्तं शुभं स्मरन्तम्
सदावसन्तं हृदयहसन्तं
श्रीयालसन्तं शुभं स्मरन्तम्
नौमि प्रणोमि नमस्कारोमि
नौमि प्रणोमि नमस्कारोमि
संसारसारं करुणावतारं
नीलाद्रिनाथं नमामि नित्यं
नमामि नित्यं नीलाद्रिनाथं

मनोभिरामं निकामकामं
स्वयंप्रमाणं पूर्णपुराणम्
मनोभिरामं निकामकामं
स्वयंप्रमाणं पूर्णपुराणम्
नौमि प्रणोमि नमस्कारोमि
नौमि प्रणोमि नमस्कारोमि
नारायणं च प्रणोमि नोमि
नीलाद्रिनाथं नमामि नित्यं
नमामि नित्यं नीलाद्रिनाथं
नीलाद्रिनाथं नमामि नित्यं
नमामि नित्यं नीलाद्रिनाथं

सोमवार, 13 जुलाई 2026

अता मुझे ये नेमत कर दे या अल्लाह.../ अरुण मिश्र

स्वर्गीय क़तील शिफ़ाई की ग़ज़ल 
'दर्द से मेरा दामन भर दे या अल्लाह...' 
की तर्ज पर, संगीतकार श्री केवल कुमार जी 
के अनुरोध पर कहे गए कुछ शेर' :

-अरुण मिश्र 

अता मुझे ये नेमत कर दे या अल्लाह 
रहमत की एक नज़र तो कर दे या अल्लाह 

मत दे मुझको माल-ओ-ज़र मत दे
अपने दर का चाकर कर दे या अल्लाह 

किसी दुखी के दुःख को थोड़ा बाँट सकूँ
इतने भर का लायक कर दे या अल्लाह 

नूर से तेरे है ये सारा जग जग-मग
मेरा दिल भी रोशन कर दे या अल्लाह 

भले छीन ले मुझसे मेरी हर दौलत 
पर अपना दीवाना कर दे या अल्लाह

शुक्रवार, 10 जुलाई 2026

वातापि गणपतिं भजेऽहं.../ सन्त मुथुस्वामी दीक्षितर् कृति / भाषा : संस्कृत / गायन : सूर्य गायत्री

https://youtu.be/XDcPvMFmtE8  

वातापि गणपतिं भजेऽहं
वारणाश्यं वरप्रदं श्री ।

भूतादि संसेवित चरणं
भूत भौतिक प्रपंच भरणम् ।
वीतरागिणं विनुत योगिनं
विश्वकारणं विघ्नवारणम् ।

पुरा कुंभ संभव मुनिवर
प्रपूजितं त्रिकोण मध्यगतं
मुरारि प्रमुखाद्युपासितं
मूलाधार क्षेत्रस्थितम् ।

परादि चत्वारि वागात्मकं
प्रणव स्वरूप वक्रतुंडं
निरंतरं निखिल चंद्रखंडं
निजवामकर विद्रुतेक्षुखंडम् ।

करांबुज पाश बीजापूरं
कलुषविदूरं भूताकारं
हरादि गुरुगुह तोषित बिंबं
हंसध्वनि भूषित हेरंबम् ।

"वातापि गणपतिं भजेहं" कर्नाटक संगीत की सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध स्तुतियों में से एक है।
 इसे महान संगीतकार मुथुस्वामी दीक्षितर ने संस्कृत भाषा और हंसध्वनि राग में रचा था।
इस स्तुति में भगवान गणेश (वातापी गणपति) की स्तुति की जाती है।

गीत का मुख्य भाव और अर्थ :

'वातापी' उस स्थान का नाम है जहाँ के यह गणपति हैं (वर्तमान में कर्नाटक का बदामी)।

इस कीर्तन की शुरुआती पंक्तियाँ हैं : 

वातापि गणपतिं भजेऽहं वारणाश्यं वरप्रदं श्री।
भूतादि संसेवित चरणं भूत भौतिक प्रपञ्च भरणं।

इसका अर्थ है: "मैं वातापी (बदामी) में स्थित भगवान गणपति की पूजा (भजन) करता हूँ, जो हाथी के मुख वाले (वारणाश्य) और वरदान देने वाले (वरप्रद) हैं। जिनके चरणों की सेवा भूत-प्रेत आदि करते हैं और जो सम्पूर्ण सृष्टि का पालन-पोषण करते हैं।

गुडिय नोडिरण्णा देहद.../ भाषा : कन्नड़ / रचना : सन्त शिशुनाल शरीफ / स्वर : कुमारी अनन्या भट कडाटोका एवं कुमारी सहाना हेगडे होन्नावर

https://youtu.be/6LB-uhHoCAk  


गुडिय नोडिरण्णा देहद
गुडिय नोडिरण्णा
गुडिय नोडिरदु
पॊडविगॆ ऒडॆयनु
अडगिकॊंडु कडुबॆडगिनॊळिरुतिह ।।

मूरु मूलिय कल्लु अदनु
एरि कूतु डॊळ्ळु,
धीर निर्गुणन सार सगुणदलि
तोरि अडगि ता ब्यारागिरुतिह ।।

आरु मूरु कट्टि मेलकॆ
एरिदवनॆ घट्टि,
भेरि कहळि शंख भारिसुनाददि
मीरिदानंद तोरि हॊळॆयुतिह ।।

सागुतिहवु दिवस सेविसि
तेगि हॊळिगि पायस,
योगिराज शिशुनाळधीश तानागि
परत्पर ब्रह्मरूपनिह गुडिय नोडिरण्णा ।।

गीत का हिन्दी में अर्थ

इस गीत का मूल भाव यह है कि हमें भौतिक शरीर को केवल मांस-मज्जा का ढांचा नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसे ईश्वर का मंदिर मानना चाहिए
इसका विस्तृत अर्थ निम्नलिखित है :  

• शरीर ही मंदिर है : कवि कहते हैं कि इस नश्वर भौतिक शरीर को देखो。 यह कोई साधारण ढांचा नहीं है, बल्कि यह स्वयं परमात्मा का निवास स्थान—एक जीवंत मंदिर (देहद गुडी) है।

• अहंकार और ज्ञान : गीत में शरीर के भीतर छिपी ईश्वरीय चेतना को देखने का आह्वान किया गयान है。आंतरिक ऊर्जा (योग और प्राणायाम के माध्यम से) को जागृत करने की बात कही गई है। 

• परब्रह्म का वास : संत शिशुनाल शरीफ बताते हैं कि हमारे भीतर ही वह परब्रह्म (सर्वोच्च शक्ति) विद्यमान है。जब साधक अपने अंतर्मन में झांकता है, तब उसे इस बात का ज्ञान होता है कि यह शरीर ही ईश्वर का मंदिर है और आत्मा ही परमात्मा का रूप है।

गुरुवार, 9 जुलाई 2026

हंझूआं दा भाड़ा.../ भाषा : पंजाबी / कवि : शिव कुमार बटालवी / गायन : महेन्द्र कपूर

https://youtu.be/P9rm7PcbnQY  

तैनूं दिआं हंझूआं दा भाड़ा,
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


भट्ठी वालीए चम्बे दीए डालीए
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


हो ग्या कुवेला मैनूं
ढल गईआं छावां नी
बेलिआं 'चों मुड़ गईआं
मझ्झियां ते गावां नी
पायआ चिड़ियां ने चीक-चेहाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


तैनूं दिआं हंझूआं दा भाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


छेती छेती करीं
मैं ते जाना बड़ी दूर नी
जिथे मेरे हाणियां दा
टुर ग्या पूर नी
योस पिंड दा सुणींदै राह माड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


तैनूं दिआं हंझूआं दा भाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


मेरी वारी पत्त्यां दी
पंड सिल्ल्हिी हो गई
मिट्टी दी कड़ाही तेरी
काहनूं पिल्ली हो गई
तेरे सेक नूं कीह वज्ज्या दुगाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


तैनूं दिआं हंझूआं दा भाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


लप्प कु ए चुंग मेरी
मैनूं पहलां टोर नी
कच्चे कच्चे रक्ख ना नी
रोढ़ थोढ़े होर नी
करां मिन्नतां मुका दे नी पुआड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


तैनूं दिआं हंझूआं दा भाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


सौं गईआं हवावां रो रो
कर विरलाप नी
तार्यां नूं चढ़ ग्या
मट्ठा मट्ठा ताप नी
जंञ साहवां दी दा रुस्स ग्या लाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


तैनूं दिआं हंझूआं दा भाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।

बुधवार, 8 जुलाई 2026

क्या है जो क़र्ज़-ए-शहर-ए-जाँ आज अदा हो या न हो.../ शायर : पीरज़ादा क़ासिम

https://youtu.be/WSUn45v_fGo  


क्या है जो क़र्ज़-ए-शहर-ए-जाँ आज अदा हो या न हो
आग लगी हो या नहीं ख़ून बहा हो या न हो

मेरी तो किश्त-ए-जाँ में आज ज़ख़्म ही ज़ख़्म खिल उठे
अब मुझे क्या कि सहन में फूल खिला हो या न हो

‘अर्सा-ए-शौक़ में नहीं फ़ुर्सत-ए-पेश-ओ-पस का वहम
ज़ख़्म-तलब रहेंगे हम ज़ख़्म मिला हो या न हो

हम ने तो माजरा-ए-ग़म बर-सर-ए-‘आम कह दिया
अश्क बहे हों या नहीं शोर उठा हो या न हो

उस को तो ताज़ा-कारी-ओ-ज़ख़्म-गरी का शौक़ है
ज़ख़्म दबे हों या नहीं दर्द थमा हो या न हो

महरम-ए-राज़ है हवा फ़ाश है सारा माजरा
उस ने कहा हो या नहीं हम ने सुना हो या न हो

उस के तो है नसीब में शब-नज़री-ओ-जाँ-कनी
भड़के है ख़ुद चराग़-ए-शौक़ तेज़ हवा हो या न हो

हम तो फ़रेब-कारी-ए-शब को बयान कर गए
अब ये नसीब-ए-शहर है जाग उठा हो या न हो

उस की गली से आज तो गुज़रे थे सर-ब-दस्त हम
उस ने ब-यक निगाह-ए-शौक़ देख लिया हो या न हो

पीरज़ादा क़ासिम रज़ा सिद्दीकी

जन्म 8 फरवरी 1943), एक पाकिस्तानी विद्वान, 
लेखक, कवि, वैज्ञानिक और शिक्षाविद् हैं। 
उन्होंने कई विश्वविद्यालयों के कुलपति के रूप में 
कार्य किया है।

रविवार, 5 जुलाई 2026

नारायण ते नमो नमो.../ सन्त श्री अन्नमाचार्य कृति / भाषा : संस्कृत / गायन : भावप्रिया

https://youtu.be/GAXzvofZt7E  


नारायण ते नमो नमो 
भव नारद सन्नुत नमो नमो ।।

मुरहर नगधर मुकुंद माधव
गरुडगमन पंकजनाभ
परमपुरुष भव-बंध विमोचन 
नर मृग शरीर नमो नमो ।।

जलधि शयन रविचंद्रविलोचन
जलरुह भवनुत चरणयुग
बलिबंधन गोपीजन वल्लभ
नळिनोदर ते नमो नमो ।।

आदिदेव सकलागम पूजित
यादव कुल मोहन रूप
वेदोद्धर श्रीवॆंकटनायक
नादप्रिय ते नमो नमो ।।

शनिवार, 4 जुलाई 2026

मा रा ब-ग़मज़: कुश्त-ओ-क़ज़ा रा बहानः साख़्त.../ मिर्ज़ा मुहम्मद हुसैन 'क़तील' (1757-1818) / गायन : इक़बाल बानो

https://youtu.be/MxVfvYvWGVA?si=Miz_kIhZW99NsQt6


मा रा ब-ग़मज़: कुश्त-ओ-क़ज़ा रा बहानः साख़्त
ख़ुद सू-ए-मा न-दीद-ओ-हया रा बहानः साख़्त

उस ने मुझे ग़मज़े से मार डाला और क़ज़ा का बहाना बनाया
उस ने मेरी तरफ नहीं देखा और हया का बहाना बनाया

दस्ते ब-दोश-ए-ग़ैर निहाद अज़ रह-ए-करम
मा रा चू दीद लग़्ज़िश-ए-पा रा बहानः साख़्त

उस ने मोहब्बत से दूसरे के कंधे पर हाथ रखा
लेकिन जब उसने मुझे देखा तो लड़खड़ाने का बहाना बनाया

रफ़्तम ब-मस्जिदे पय-ए-नज़्ज़ार:-ए-रुख़श
दस्ते बरू कशीद व दुआ' रा बहानः साख़्त

मैं उसके चेहरे के दीदार के लिए मस्जिद गया
उस ने अपने चेहरे पर हाथ रख लिया और दुआ का बहाना बनाया

आमद बरून-ए-ख़ानः चूँ आवाज़-ए-मा शनीद
बख़्शीदन-ए-निवाल: गदा रा बहानः साख़्त

जब उसने मेरी आवाज़ सुनी घर से बाहर आ गया
इस बार उसने फ़क़ीर को खाना देने का बहाना बनाया

ख़ून-ए-'क़तील'-ए-बे-सर-ओ-पा रा ब-पा-ए-ख़्वेश
मालीद आँ निगार व हिना रा बहानः साख़्त

उस ने बे-सर-ओ-सामान 'क़तील' के ख़ून को
अपने क़दमों में मल लिया और हिना का बहाना बनाया

शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

कंडु धन्यनादॆ गुरुगळ – कण्णारॆ ना.../ भाषा : कन्नड़ / श्री मोहन दासारु कृति / गायन : विभा हेगडे

https://youtu.be/2PrGnfxUTvI?si=pLymM5ue2hJYXh0T


कंडु धन्यनादॆ गुरुगळ – कण्णारॆ ना
कंडु धन्यनादॆ ई गुरुगळ   ।। प ।।

तुंगातटदि बंदु निंत
पंगु बधिराद्यंग हीनर
अंगगैसि सलहुवा – नर
सिंगनंघ्रि भजकरिवर      ।।१।।

गुरुवर सुगुणेंद्ररिंद
परिपरियलि सेवॆगॊळुत
वरमंत्रालयपुरदि मॆरॆव
परिमळाख्य ग्रंथकर्तर      ।।२।।

सो‍हं ऎन्नदॆ हरिय दा
सोहं ऎन्नलु ऒलिदु विजय
मोहन विठ्ठलन्न परम
स्नेहदिंद तोरुववर         ।।३।।

Meaning (Stanza by Stanza)

Pallavi (Refrain) :

Kandu dhanyanade gurugala kannaare naa kandu dhanyanade

I am deeply blessed and fulfilled to have seen you with my own eyes, my revered Guru.

Stanza 1 :

Tungaatathadi bandu ninta pangu badhiraadyanga heenara
Angagaisi salahuvaa - nara singananghri bhajkarivara

Standing on the banks of the Tungabhadra River, you bless and heal those who are physically challenged, blind, deaf, and helpless. You are the supreme protector for those who worship the lotus feet of Lord Narasimha. 

Stanza 2 :

Guruvara Sugunendrarinda paripariyali sevegolutha
Vara Mantralayapuradi mereva Parimalaakhya granthakarthara

Serving the esteemed Guru in various ways, you reside in the blessed town of Mantralaya. You are the author of the great scriptures known as Parimala. 

Stanza 3 :

Soham ennade hariya da soham ennalu olidu Vijaya
Mohana Vittalanna parama...

Although we do not realize our true divine nature, when we surrender and chant "Soham" (I am He/that divine soul), Lord Vijaya Mohana Vittala is pleased.

मंगलवार, 30 जून 2026

हूव तरुवर मनॆगॆ हुल्ल तरुव.../ भाषा : कन्नड़ / सन्त पुरन्दर दास कृति / गायन : श्रीमती जयवन्ती देवी

https://youtu.be/LU8i4EQMoUE 


हूव तरुवर मनॆगॆ हुल्ल तरुव
अव रमण इवगिल्लगरुव ।।प।।

English Translation :

He goes to the houses of those who bring flowers and those who bring grass.
Oh, the consort of Lakshmi (Lord Krishna), He has absolutely no ego or pride!

ऒंदु दळ श्रीतुळसि बिंदु गंगोदकवु
इंदिरा रमणगॆ अर्पितवॆनुत
ऒंदे मनसिनलि सिंधुशयनॆनुत
ऎंदॆंदिगू वासिपनु मंदिरदॊळगॆ ।।१।।

English Translation :

If one offers just a single Tulsi leaf and a drop of holy Ganga water to the Lord of Indira (Lakshmi), and sincerely calls Him the one who reclines on the ocean (Lord Vishnu/Mukunda) with a single-minded devotion, He will forever reside in the devotee's heart.

परिपरिय पुष्पगळ परमात्मगर्पिसि
परिपूर्ण तानॆंदु पूजॆयनु माडि
सरसिजाक्षनु तन्न सकल स्वातंत्र्यदलि
सरि भाग्य कॊडुव तन्नरमनॆय ऒळगॆ ।।२।।
पांडवर मनॆयल्लि कुदुरॆगळ ता तॊळॆदु
पुंडरीकाक्षनु हुल्लनु तिनिसि
अंडज वाहन पुरंदर विठ्ठल
तॊंडरिगॆ तॊंडनागि संचरिसुतिहनु ।।३।।

Charana 2 & 3 ( English Translation)

The remaining verses, as documented in source, describe how the Lord accepts various flower offerings with grace and rewards devotees with a place in his abode. The song concludes by highlighting Krishna's role as a humble servant to his true followers, citing his actions for the Pandavas.

सोमवार, 29 जून 2026

मथुरा नगर की डगर मे चल्यो जात पायो है हरि हीरा.../ स्वर : अ.सौ. भामिनी बागरोदी शर्मा (कोटा)

https://youtu.be/bZnDjlEevoE 


मथुरा नगर की डगर मे चल्यो जात पायो है हरि हीरा ।।
सुन री भटु लटु भयो डोलत, गोकुल गाम को अहीरा ।।१।।

बन ते जु आवत बेनु बजावत, बंसीबट यमुना के तीरा ।।
"परमानंद" दास को ठाकुर, हँस दीनो मुख बीरा ।।२।।

शुक्रवार, 26 जून 2026

पीलियोटॊत्त कार्कून्तलुं कॆट्टि.../ भाषा : मलयालम / गायन : श्रीरेखा

https://youtu.be/4bRpRGz3tRc 

पीलियोटॊत्त कार्कून्तलुं कॆट्टि...

रचना : सुरेश रविवर्मा
भाषा : मलयालम
गायन : श्रीरेखा

पीलियोटॊत्त कार्कून्तलुं कॆट्टि
फालदेशे तिलकमतुं तॊट्टु
बालचन्द्रसमानमुखप्रभ – काणाकेणं

आरणिमलर् पालय्क्कमोतिरं
बालकर्क्किणङ्ङुन्न पुलिनखं
चेलोटायव चार्त्तीट्टु काणणं – भगवाने

नीलक्कार्मुकिल्वर्ण्ण ! जनार्द्दन
बालगोविन्द ! वासुदेव ! कृष्ण
मालकट्टणे माधव ! गोविन्द – वासुदेव

कय्यिल् नल्ल मुरळि चॆऱुकोलुं
मॆय्यऴकार्न्न पीतांबरप्पट्टुं
कॆट्टि नन्नायुटुत्तुटन् काणणं – वासुदेव

भक्तनाय कुचेलन्नु वेण्टव-
यॊक्कॆयुं भवानल्लो कॊटुत्ततुं
मुक्ति नल्कणे माधव गोविन्द! – वासुदेव


Peeliyodotha karkoonthalum ketti...lyrics and meaning

"Peeliyodotha Karkoonthalum" is a popular Malayalam devotional bhajan dedicated to Lord Krishna. It is a visual prayer that describes the enchanting appearance and divine qualities of the Lord. 

Lyrics (Transliterated)

Peeliyodotha kaarkoonthalum ketti
Phala deshe thilakamathum thottu
Balachandra samana mukha prabha
Kaanaakenam 

Aarani malar palakka mothiram
Baalakarkkinangunna pulinakham
Cheloraayava chernnittuk
Kaananam bhagavaane 

Neelakkaarmukil varna janaarthana
Baalagovinda vaasudeva krishna
Maalakattane maadhava govinda
(Vaasudeva...) 

Kaiyyinu nalla murali cherukolum
Manja vasthravum maayoora pichavum
Cheliyananinjanthike
Kaananam (Vaasudeva...)

Bhakthanaaya kuchelannu vendava
Yokkeyum bhavaanallo koduthathum
Mukthi nalkane maadhava govinda
(Vaasudeva...) 

Meaning and Devotional Context

The song visually paints the iconic, beautiful form of Lord Krishna and pleads for His blessings and liberation (Moksha).

*Physical Appearance:* It describes Krishna tying His dark, curly hair with a peacock feather (peeliyodotha). He wears a holy mark (thilakam) on His forehead and has a radiant face that shines like a crescent moon. 

*Adornments:* It mentions Him wearing specific traditional ornaments like the aarani malar, palakka mothiram (a traditional Kerala necklace/pendant), and a tiger claw pendant typically worn by children.

*Divine Instruments & Attire:* The song visually seeks His form holding a flute (murali), draped in yellow silk garments (peethambaram), and adorned with peacock feathers.

*Prayer for Grace:* The devotee praises Krishna as the One with a dark, rain-cloud complexion and prays to Him to remove all sorrows and grant liberation, just as He showered immense blessings on His devotee, Kuchela.

गुरुवार, 25 जून 2026

सदा ऎन्न हृदयदल्लि, वास माडो श्री हरी.../ संत विजय विठल दासार कृति / गायन : रंजनी हेब्बार

https://youtu.be/qqDLqpa-FAA  


सायंकाले वनान्ते कुसुमित समये सैकते चन्द्रिकायाम्
त्रैलोक्याकर्शणांगम् सुरवरगणिक मोहनापांगमूर्तिम् ।
सेव्यम् श्रृगांरभावै: नवरसभरितै: गोपकन्या सहस्रै:
वन्दे अहम् रासकेली रतम् अतिसुभगम् वष्य गोपालकृष्णम्।।

सदा ऎन्न हृदयदल्लि, वास माडो श्री हरी

नाद मूर्ति निन्न पाद, मोददिंद भजिसुवॆनो

ङ्ञानवॆंबो नवरत्नद मंटपद मध्यदल्लि
वेणुगान लोलन कुळ्ळिरिसि ध्यानदिंद भजिसुवेनो

भक्तिरसवॆंबो मुत्तु माणिक्यदा हरिवाणदी
मुक्तनागबेकु ऎंदुमुत्तिन आरति ऎत्तुवेनो

निन्न नानु बिडुवनल्ल ऎन्न नीनु बिडलु सल्ल
घन महिम विजय विठल निन्न भकुतर केळो सॊल्ल

*Sada Yenna Hrudaya Dalli*
*Composer : Saint Vijaya Vittala Dasar*

Pallavi
sadaa enna hrudayadalli vaasamaado shri hari

Oh Lord of Lakshmi, Sri Hari, kindly reside in my heart forever

Anupallavi

Naadhamurthi ninna paada modhadhinda bhajisuve

Oh Lord of Music, with great enthusiasm and happiness I worship your divine lotus feet

Charanam – 1
jnaana vembo navaratna mantapada madhyadalli
gaana lolana kullirisi dhyaanadinda bhajisuve

I shall seat Lord Hari, who is the admirer of music, in the grand hall of wisdom decorated with nine precious gems and shall worship the Lord through meditation.

Charanam – 2
bhakthi rasavembo muddu maanikyada harivaanadi
muktanaaga beku endu muttina aarathi yetthuve

I shall worship through performing the aarathi with the lamp made of pearls, kept in the plate of devotion made of gold decked with pearls and jewels, through which I wish to become liberated.

Charanam – 3
ninna naanu biduvanalla yenna neenu bidalu palli
pannaga shayana vijaya vithala kelo ninna bhaktara solla

I would not leave you and will neither allow you to leave me. Oh Lord the one who recline on a serpent, Oh Vijaya Vittala, kindly hear the plea of your devotees.