गुरुवार, 27 फ़रवरी 2025

आशियाँ जल गया, गुल्सिताँ लुट गया.../ शायर : राज़ इलाहाबादी / गायन : हबीब वली मोहम्मद

https://youtu.be/soIbXlttNn8  

आशियाँ जल गया, गुल्सिताँ लुट गया, हम क़फ़स से निकल कर किधर जाएँगे
इतने मानूस सय्याद से हो गए, अब रिहाई मिलेगी तो मर जाएँगे


और कुछ दिन ये दस्तूर-ए-मय-ख़ाना है, तिश्ना-कामी के ये दिन गुज़र जाएँगे
मेरे साक़ी को नज़रें उठाने तो दो, जितने ख़ाली हैं सब जाम भर जाएँगे


ऐ नसीम-ए-सहर तुझ को उन की क़सम, उन से जा कर न कहना मिरा हाल-ए-ग़म
अपने मिटने का ग़म तो नहीं है मगर, डर ये है उन के गेसू बिखर जाएँगे


अश्क-ए-ग़म ले के आख़िर किधर जाएँ हम, आँसुओं की यहाँ कोई क़ीमत नहीं
आप ही अपना दामन बढ़ा दीजिए, वर्ना मोती ज़मीं पर बिखर जाएँगे


काले काले वो गेसू शिकन-दर-शिकन, वो तबस्सुम का आलम चमन-दर-चमन
खींच ली उन की तस्वीर दिल ने मिरे, अब वो दामन बचा
कर किधर जाएँगे

बुधवार, 26 फ़रवरी 2025

शिवपञ्चाक्षरनक्षत्रमालास्तोत्रं.../ आदि शंकराचार्य कृत / स्वर : माधवी मधुकर झा

https://youtu.be/1GD9Mpvlw8Y  


श्रीमदात्मने गुणैकसिन्धवे नमः शिवाय
धामलेशधूतकोकबन्धवे नमः शिवाय |
नामशेषितानमद्भवान्धवे नमः शिवाय
पामरेतरप्रधानबन्धवे नमः शिवाय || १ ||

कालभीतविप्रबालपाल ते नमः शिवाय
शूलभिन्नदुष्टदक्षफाल ते नमः शिवाय |
मूलकारणाय कालकाल ते नमः शिवाय
पालयाधुना दयालवाल ते नमः शिवाय || २ ||

इष्टवस्तुमुख्यदानहेतवे नमः शिवाय
दुष्टदैत्यवंशधूमकेतवे नमः शिवाय |
सृष्टिरक्षणाय धर्मसेतवे नमः शिवाय
अष्टमूर्तये वृषेन्द्रकेतवे नमः शिवाय || ३ ||

आपदद्रिभेदटङ्कहस्त ते नमः शिवाय
पापहारिदिव्यसिन्धुमस्त ते नमः शिवाय |
पापदारिणे लसन्नमस्तते नमः शिवाय
शापदोषखण्डनप्रशस्त ते नमः शिवाय || ४ ||

व्योमकेश दिव्यभव्यरूप ते नमः शिवाय
हेममेदिनीधरेन्द्रचाप ते नमः शिवाय |
नाममात्रदग्धसर्वपाप ते नमः शिवाय
कामनैकतानहृद्दुराप ते नमः शिवाय || ५ ||

ब्रह्ममस्तकावलीनिबद्ध ते नमः शिवाय
जिह्मगेन्द्रकुण्डलप्रसिद्ध ते नमः शिवाय |
ब्रह्मणे प्रणीतवेदपद्धते नमः शिवाय
जिंहकालदेहदत्तपद्धते नमः शिवाय || ६ ||

कामनाशनाय शुद्धकर्मणे नमः शिवाय
सामगानजायमानशर्मणे नमः शिवाय |
हेमकान्तिचाकचक्यवर्मणे नमः शिवाय
सामजासुराङ्गलब्धचर्मणे नमः शिवाय || ७ ||

जन्ममृत्युघोरदुःखहारिणे नमः शिवाय
चिन्मयैकरूपदेहधारिणे नमः शिवाय |
मन्मनोरथावपूर्तिकारिणे नमः शिवाय
सन्मनोगताय कामवैरिणे नमः शिवाय || ८ ||

यक्षराजबन्धवे दयालवे नमः शिवाय
दक्षपाणिशोभिकाञ्चनालवे नमः शिवाय |
पक्षिराजवाहहृच्छयालवे नमः शिवाय
अक्षिफाल वेदपूततालवे नमः शिवाय || ९ ||

दक्षहस्तनिष्ठजातवेदसे नमः शिवाय
अक्षरात्मने नमद्बिडौजसे नमः शिवाय |
दीक्षितप्रकाशितात्मतेजसे नमः शिवाय
उक्षराजवाह ते सतां गते नमः शिवाय || १० ||

राजताचलेन्द्रसानुवासिने नमः शिवाय
राजमाननित्यमन्दहासिने नमः शिवाय |
राजकोरकावतंस भासिने नमः शिवाय
राजराजमित्रताप्रकाशिने नमः शिवाय || ११ ||

दीनमानवालिकामधेनवे नमः शिवाय
सूनबाणदाहकृत्कृशानवे नमः शिवाय |
स्वानुरागभक्तरत्नसानवे नमः शिवाय
दानवान्धकारचण्डभानवे नमः शिवाय || १२ ||

सर्वमङ्गलाकुचाग्रशायिने नमः शिवाय
सर्वदेवतागणातिशायिने नमः शिवाय |
पूर्वदेवनाशसंविधायिने नमः शिवाय
सर्वमन्मनोजभङ्गदायिने नमः शिवाय || १३ ||

स्तोकभक्तितोऽपि भक्तपोषिणे नमः शिवाय
माकरन्दसारवर्षिभाषिणे नमः शिवाय |
एकबिल्वदानतोऽपि तोषिणे नमः शिवाय
नैकजन्मपापजालशोषिणे नमः शिवाय || १४ ||

सर्वजीवरक्षणैकशीलिने नमः शिवाय
पार्वतीप्रियाय भक्तपालिने नमः शिवाय |
दुर्विदग्धदैत्यसैन्यदारिणे नमः शिवाय
शर्वरीशधारिणे कपालिने नमः शिवाय || १५ ||

पाहि मामुमामनोज्ञदेह ते नमः शिवाय
देहि मे वरं सिताद्रिगेह ते नमः शिवाय |
मोहितर्षिकामिनीसमूह ते नमः शिवाय
स्वेहितप्रसन्न कामदोह ते नमः शिवाय || १६ ||

मङ्गलप्रदाय गोतुरङ्ग ते नमः शिवाय
गङ्गया तरङ्गितोत्तमाङ्ग ते नमः शिवाय |
सङ्गरप्रवृत्तवैरिभङ्ग ते नमः शिवाय
अङ्गजारये करेकुरङ्ग ते नमः शिवाय || १७ ||

ईहितक्षणप्रदानहेतवे नमः शिवाय
आहिताग्निपालकोक्षकेतवे नमः शिवाय |
देहकान्तिधूतरौप्यधातवे नमः शिवाय
गेहदुःखपुञ्जधूमकेतवे नमः शिवाय || १८ ||

त्र्यक्ष दीनसत्कृपाकटाक्ष ते नमः शिवाय
दक्षसप्ततन्तुनाशदक्ष ते नमः शिवाय |
ऋक्षराजभानुपावकाक्ष ते नमः शिवाय
रक्ष मां प्रपन्नमात्ररक्ष ते नमः शिवाय || १९ ||

न्यङ्कुपाणये शिवङ्कराय ते नमः शिवाय
सङ्कटाब्धितीर्णकिङ्कराय ते नमः शिवाय |
कङ्कभीषिताभयङ्कराय ते नमः शिवाय
पङ्कजाननाय शङ्कराय ते नमः शिवाय || २० ||

कर्मपाशनाश नीलकण्ठ ते नमः शिवाय
शर्मदाय वर्यभस्मकण्ठ ते नमः शिवाय |
निर्ममर्षिसेवितोपकण्ठ ते नमः शिवाय
कुर्महे नतीर्नमद्विकुण्ठ ते नमः शिवाय || २१ ||

विष्टपाधिपाय नम्रविष्णवे नमः शिवाय
शिष्टविप्रहृद्गुहाचरिष्णवे नमः शिवाय |
इष्टवस्तुनित्यतुष्टजिष्णवे नमः शिवाय
कष्टनाशनाय लोकजिष्णवे नमः शिवाय || २२ ||

अप्रमेयदिव्यसुप्रभाव ते नमः शिवाय
सत्प्रपन्नरक्षणस्वभाव ते नमः शिवाय |
स्वप्रकाश निस्तुलानुभाव ते नमः शिवाय
विप्रडिम्भदर्शितार्द्रभाव ते नमः शिवाय || २३ ||

सेवकाय मे मृड प्रसीद ते नमः शिवाय
भावलभ्यतावकप्रसाद ते नमः शिवाय |
पावकाक्ष देवपूज्यपाद ते नमः शिवाय
तावकाङ्घ्रिभक्तदत्तमोद ते नमः शिवाय || २४ ||

भुक्तिमुक्तिदिव्यभोगदायिने नमः शिवाय
शक्तिकल्पितप्रपञ्चभागिने नमः शिवाय |
भक्तसङ्कटापहारयोगिने नमः शिवाय
युक्तसन्मनःसरोजयोगिने नमः शिवाय || २५ ।।

अन्तकान्तकाय पापहारिणे नमः शिवाय
शन्तमाय दन्तिचर्मधारिणे नमः शिवाय |
सन्तताश्रितव्यथाविदारिणे नमः शिवाय
जन्तुजातनित्यसौख्यकारिणे नमः शिवाय || २६ ||

शूलिने नमो नमः कपालिने नमः शिवाय
पालिने विरिञ्चिमुण्डमालिने नमः शिवाय |
लीलिने विशेषरुण्डमालिने नमः शिवाय
शीलिने नमः प्रपुण्यशालिने नमः शिवाय || २७ ||

शिवपञ्चाक्षरमुद्राचतुष्पदोल्लासपद्यमणिघटिताम् |
नक्षत्रमालिकामिह दधदुपकण्ठं नरो भवेत्सोमः || २८ ||

|| शिवपञ्चाक्षरनक्षत्रमालास्तोत्रं सम्पूर्णम् ||

 

सोमवार, 24 फ़रवरी 2025

न मी दानम चे मंज़िल बूद.../ अमीर ख़ुसरो / मुंशी रियाज़ुद्दीन क़व्वाल एवं पार्टी

https://youtu.be/4JjR_q0Lkzw  


न मी दानम चे मंज़िल बूद शब जाहे कि मन बूदम
बहार सू रक़्स-ए-बिस्मिल बूद शब जाहे कि मन बूदम

(I wonder what was the place where I was last night,
All around me were half-slaughtered victims of love,
tossing about in agony)


परी पैक़र निग़ार-ए-सर्व-क़द-ए-लालारुख़ सारे
सरापा आफ़त-ए-दिल बूद शब जाहे कि मन बूदम


(There was a nymph-like beloved with cypress-like form and tulip-like face,
Ruthlessly playing havoc with the hearts of the lovers)

ख़ुदा ख़ुद मीर-ए-मज़लिस बूद अन्दर लामकां ख़ुसरो
मुहम्मद शम्म-ए-महफ़िल बूद शब जाहे कि मन बूदम


(God himself was the master of ceremonies in that heavenly court,
Oh Khusrau, where (the face of) the Prophet too was shedding light like a candle)

बुधवार, 19 फ़रवरी 2025

किसी दर्दमंद के काम आ किसी डूबते को उछाल दे.../ गायन : मुहम्मद नवाज़ / सूफ़ी अताउल्लाह सत्तारी

https://youtu.be/MpQ5r6qqvq0  


किसी दर्दमंद के काम आ किसी डूबते को उछाल दे
ये निगाह-ए-मस्त की मस्तियाँ किसी बद-नसीब पे डाल दे


मुझे मस्जिदों की ख़बर नहीं मुझे मंदिरों का पता नहीं
मिरी 'आजिज़ी को क़ुबूल कर मुझे और दर्द-ओ-मलाल दे

ये मय-कशी का ग़ुरूर है ये मेरे दिल का सुरूर है
मेरे मय-कदा को दवाम हो मेरे साक़ियों को जमाल दे

मैं तिरे विसाल को क्या करूँ मेरी वहशतों की ये मौत है
हो तिरा जुनूँ मुझे पुर-'अता मुझे जन्नतों से निकाल दे

सोमवार, 17 फ़रवरी 2025

अम्बा स्तवम् / ब्रह्मर्षि सदाशिवन् / प्रस्तुति : कुलदीप पई

https://youtu.be/O_0PVXI4RJ0?si=zHvdORjmbp51Sqg1

वन्देऽहन्तेऽनन्ते सुपदर -
विन्दे विन्दे शन्ते निजसुख -
कन्देऽमन्दे स्पन्दे शुभकरि 
बहुदयहृदययुते ।


मायेऽमेये लीये पुरहर -
जायेऽजेये ज्ञेये ननु भव -
दीये ध्येयेऽभ्येये निरुपम -
पदि हृदि मृदितमृते ॥


रुन्धे हतनतबन्धे मम हृदयन्ते स्मितजितकुन्दे
अमलतररूपेऽपापे दीपे भवकूपे पतितं व्यथितं 
देवि समुद्धर करुणाजलराशे सुरुचिरवेषे ।


धीरे वीरे शूरे सदमृत -
धारे तारेऽसारे बत भव -
कारागारे घोरे निपतित -
मव शिशुमतुलबले ।


अम्बालम्बे लम्बोदरपरि -
पाले बाले काले खलुजग -
दीशे धीशेऽनीशे हृदि शिव -
मनुमनुदिनममले ॥ 


शिष्टहितैषिणि दुष्टविनाशिनि 
कष्टविभेदिनि दृष्टिविनोदिनि 
सङ्कटकण्टकभिन्दनकुशलकले सकले सबले 
श्रद्धाबद्धे न्यस्ताभयहस्ते सुरगणविनुते


श्रेष्ठे प्रेष्ठे ज्येष्ठे हिमगिरि -
पुष्टे जुष्टे तिष्ठे: शिवपरि -
निष्ठे स्पष्टे हृष्टे मम हृदि 
मुनिजननुतिमुदिते ।


आद्ये वेद्ये वैद्ये त्रिजगति 
रामे वामे श्यामे कुरु करु -
णान्ते दान्ते शान्ते भयहर - 
भगवति सति शिवदे ॥

रविवार, 16 फ़रवरी 2025

दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं.../ जिगर मुरादाबादी / गायन : किरन शुक्ला

 https://youtu.be/B9MHtlKTvBw  

दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

दुनिया-ए-दिल तबाह किए जा रहा हूँ मैं
सर्फ़-ए-निगाह-ओ-आह किए जा रहा हूँ मैं

फ़र्द-ए-अमल सियाह किए जा रहा हूँ मैं
रहमत को बे-पनाह किए जा रहा हूँ मैं

ऐसी भी इक निगाह किए जा रहा हूँ मैं
ज़र्रों को मेहर-ओ-माह किए जा रहा हूँ मैं

मुझ से लगे हैं इश्क़ की अज़्मत को चार चाँद
ख़ुद हुस्न को गवाह किए जा रहा हूँ मैं

दफ़्तर है एक मानी-ए-बे-लफ़्ज़-ओ-सौत का
सादा सी जो निगाह किए जा रहा हूँ मैं

आगे क़दम बढ़ाएँ जिन्हें सूझता नहीं
रौशन चराग़-ए-राह किए जा रहा हूँ मैं

मासूमी-ए-जमाल को भी जिन पे रश्क है
ऐसे भी कुछ गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

तन्क़ीद-ए-हुस्न मस्लहत-ए-ख़ास-ए-इश्क़ है
ये जुर्म गाह गाह किए जा रहा हूँ मैं

उठती नहीं है आँख मगर उस के रू-ब-रू
नादीदा इक निगाह किए जा रहा हूँ मैं

गुलशन-परस्त हूँ मुझे गुल ही नहीं अज़ीज़
काँटों से भी निबाह किए जा रहा हूँ मैं

यूँ ज़िंदगी गुज़ार रहा हूँ तिरे बग़ैर
जैसे कोई गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

मुझ से अदा हुआ है 'जिगर' जुस्तुजू का हक़
हर ज़र्रे को गवाह किए जा रहा हूँ मैं

शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2025

उन की तरफ़ से तर्क-ए-मुलाक़ात हो गई.../ शायर : क़मर जलालवी / गायन : हदीका कियानी

https://youtu.be/x-fsPm9e2eg  


उन की तरफ़ से तर्क-ए-मुलाक़ात हो गई
हम जिस से डर रहे थे वही बात हो गई

आईना देखने में नई बात हो गई
उन से ही आज उन की मुलाक़ात हो गई

तय उन से रोज़-ए-हश्र मुलाक़ात हो गई
इतनी सी बात कितनी बड़ी बात हो गई

कम-ज़र्फ़ी-ए-हयात से तंग आ गया था मैं
अच्छा हुआ क़ज़ा से मुलाक़ात हो गई

दिन में भटक रहे हैं जो मंज़िल की राह से
ये लोग क्या करेंगे अगर रात हो गई

आए हैं वो मरीज़-ए-मोहब्बत को देख कर
आँसू बता रहे हैं कोई बात हो गई

था और कौन पूछने वाला मरीज़ का
तुम आ गए तो पुर्सिश-ए-हालात हो गई

ऐ बुलबुल-ए-बहार-ए-चमन अपनी ख़ैर माँग
सय्याद-ओ-बाग़बाँ में मुलाक़ात हो गई

जब ज़ुल्फ़ याद आ गई यूँ अश्क बह गए
जैसे अँधेरी रात में बरसात हो गई

गुलशन का होश अहल-ए-जुनूँ को भला कहाँ
सहरा में पड़ रहे तो बसर रात हो गई

दर-पर्दा बज़्म-ए-ग़ैर में दोनों की गुफ़्तुगू
उट्ठी उधर निगाह इधर बात हो गई

कब तक 'क़मर' हो शाम के वा'दे का इंतिज़ार
सूरज छुपा चराग़ जले रात हो गई