मंगलवार, 29 अगस्त 2023

जोबन धन पावना दिन चारा जी.../ स्वर : संत श्री सुखदेव जी महाराज

https://youtu.be/T2V7d9NmKWQ?si=HOMbhm7ufxjCw9uX

जोबन धन पावना दिन चारा जी...

दोहा :

आया था किस कारणे,
ने सोया चादर तान,
एक दिन जम ले जावसी,
पकड तुम्हारे कान।।

जोबन धन पावना दिन चारा जी,
ज्यारो गरब करे सु गिवारा ओ,
जोबन धन पावणा दिन चारा जी।।


अरे हाड मास का बनीया पिंजरा,
अरे हाड मास का बनीया पिंजरा,
भीतर भरीया भंगारा,
ए ऊपर रंग सोने रो लगायो जी,
ऊपर रंग सोने रो लगायो,
कारीगर किरतारा ओ,
जोबन धन पावणा दिन चारा जी,
ज्यारो गरब करे सु गिवारा ओ,
जोबन धन पावणा दिन चारा जी।।

अरे पशु चाम रा बने पनेहा,
पशु चाम रा बने पनेहा,
नोपत मंडे नगाडा जी,
नर तेरी चाम काम नही आवे जी,
नर तेरी चाम काम नही आवे,
बल जल होवे अंगारा,
जोबन धन पावणा दिन चारा जी,
ज्यारो गरब करे सु गिवारा ओ,
जोबन धन पावणा दिन चारा जी।।

दस मस्तक ज्यारी बीस भुजा थी,
दस मस्तक ज्यारी बीस भुजा थी,
रावण के परिवारा जी,
अरे एडा एडा योध्दा धरण मे गलीया,
एडा एडा योध्दा धरण मे गलीया,
लंका के सिरदारा,
जोबन धन पावणा दिन चारा जी,
ज्यारो गरब करे सु गिवारा ओ,
जोबन धन पावणा दिन चारा जी।।


अरे ओ संसार ओस वालो पानी बीरा,
ओ संसार ओ वालो पानी,
जातोनी लागे वारा जी,
कहत कबीर सुनो भई संतो,
कहत कबीर सा सुनो भई संतो,
भवजल उतरो पारा,
जोबन धन पावणा दिन चारा जी,
ज्यारो गरब करे सु गिवारा ओ,
जोबन धन पावणा दिन चारा जी।।

सोमवार, 28 अगस्त 2023

आँधियाँ ग़म की चलेंगी तो सँवर जाऊँगा.../ बहादुर शाह ज़फ़र / गायन : दिवाकर मीना

 https://youtu.be/zEOB6aYSDVU   

आँधियाँ गम की चलेंगी तो संवर जाऊँगा...

आँधियाँ ग़म की चलेंगी तो संवर जाऊँगा
मैं तेरी ज़ुल्फ नहीं हूँ जो बिखर जाऊँगा

तुझसे बिछडा तो मत पूछो किधर जाऊँगा
मैं तो दरिया हूँ समुन्दर में उतर जाऊँगा

नाखुदा मुझसे न होगी ये ख़ुशामद तेरी 
मैं वो ख़ुद्दार हूँ क़श्ती से उतर जाऊँगा

मुझको सूली पे चढ़ाने की ज़रुरत क्या है
मेरे हाथो से कलम छीन लो मर जाऊँगा

मुझको दुनिया से 'ज़फ़र' कौन मिटा सकता है 
मैं तो शायर हूँ  क़िताबो में बिखर जाऊंगा 

शनिवार, 26 अगस्त 2023

नम्रतया हि देवत्वम्...(विनम्रता से ही देवत्व) / मार्कण्डेयो रवीन्द्र: / संस्कृतं भारतम् (फेस-बुक वाल, १९ अगस्त, २०१९)

नम्रतया हि देवत्वम् ... 

एकदा  तटिनी  मुग्धा
सञ्जाता दम्भिनी पुरा।
प्रचण्डेन        प्रवाहेण
किञ्चिदपि करोम्यहम्।।(१)

एक बार एक नदी को अभिमान हो गया कि वह अपने 
तेज प्रवाह से कुछ भी कर सकती है।

गृहं गिरिं तरुञ्चापि
पशूंश्च मानवाँस्तथा।
अग्रे चाग्रे करिष्यामि
सबला  प्रबला  यतः।।(२)

क्योंकि मैं बहुत बलवान हूं, इसलिए घर, पहाड़, नदी, पशु, 
मनुष्य  सभी को बहा कर ले जा सकती हूं।

आज्ञां विधेहि हे सिन्धो
किं  ते  शुभं मया प्रभो!
ज्ञात्वाभिमानमेतस्याः
रत्नाकरो  जगाद  ह।।(३)

वह बोली - हे समुद्र देव ! कहो मैं आप के लिए क्या कर सकती हूं ? 
नदी के अभिमान को देखकर समुद्र ने कहा -

भवनं  प्राणिनं चापि
नेच्छामि पादपं तथा।
दूर्वाङ्कुराणि मुग्धेऽहं
याचे त्वत्तो विशेषतः।।(४)

मुझे भवन, प्राणी अथवा पेड़ की इच्छा नहीं है। भोली !  मैं तो विशेष 
रूप से आप से दूर्वादल चाहता हूं।

उच्चैर्विहस्य  सैषा   हि
प्रोक्तवती   पयोनिधिम्।
अतीव   सुकरं   कार्य-
मेतदपांपते       ध्रुवम्।।(५)

नदी जोर से हंस कर सागर से बोली - हे समुद्र देव ! ये तो बड़ा आसान 
काम है।

पूर्णेनैव   हि   वेगेन
यत्नो विधीयते तया।
असमर्था तथापि सा 
तद्दूर्वोत्पाटने  खलु।।(६) 

नदी ने अपने पूरे वेग के साथ प्रयास किया परन्तु वह दूर्वा उखाड़ने में 
सफल नही हुई।

असफला तथान्ते सा
सिन्धुमुक्तवती   वरा।
अतीव  दुष्करं  कार्यं
क्षमस्व    मामपांपते।।(७)

अन्त में हारकर वह समुद्र से बोली - हे समुद्र देव !मुझे क्षमा करना।
यह तो बहुत कठिन काम है।

जगति  कर्कशा  ये च
भवनं      गिरिपादपाः।
सुकरं   नाशनं    तेषां
नदीमुवाच    तोयधिः।।(८)

तब समुद्र ने नदी से कहा कि संसार में जो पहाड़ और पेड़ आदि 
कठोर होते हैं, वे आसानी से नष्ट हो जाते हैं।

विनम्राः मानवा लोके
नमन्ति ये तृणादिवत्।
रक्षणं   जायते   तेषां
विपदो  यान्ति  दूरतः।।(९)

संसार में जो दूर्वादल की तरह झुक जाते हैं, वे सुरक्षित रहते हैं। 
विपत्तियां उनसे दूर रहती हैं।

नम्रतया   हि   देवत्वं
प्राप्यते  पुरुषैः  भुवि।
देवाः      गर्वातिरेकेण 
श्रिया हीनाः न संशयः।।(१०)

इस संसार में विनम्रता से मनुष्य  देवता बन जाता है और अभिमान 
होने पर देवताओं का तेज भी नष्ट  हो जाता है।

शुक्रवार, 25 अगस्त 2023

रखिया बन्हा ला भैया.../ भोजपुरी / स्वर : दीपाली सहाय

https://youtu.be/E28XE6zIRpw?si=56oTaASAF0-Kus1b

रखिया ​​बन्हा ला भैया...
फिल्म : लागी नहीं छूटे राम (१९६३) 
गायिका (फिल्म में) : लता मंगेशकर  
गीत- मजरूह सुल्तानपुरी 
संगीत - चित्रगुप्त

रखिया ​​बन्हा ला भइया
सावन आईल 
जिआ तू लाख बरीस हो
राखिया 
​​बन्हा ला भइया
सावन आईल 
जिआ तू लाख बरीस हो
तोहरा के लागे भइया
हमरी उमिरिया
बहिना ता देले असीस हो

राखी के धागा बाँधीं तोहरी कलइया
राखी के धागा बाँधी तोहरी कलइया 
माथे लगाई टीका लेके बलइया
आज के सुभ दिन आरती उतारीं 
करीं तोहार मुँह मीठ हो

रखिया ​​
​​बन्हा ला भइया
सावन आयल
जिये तू लाख बरीस हो

जहिया तू भउजी के डोली ले अइबा
जहिया तू भउजी के डोली ले अइबा
दिदिया का नेग से ता बचे ना पइबा
अंचरा में भरि-भरि लेब रुपैया 
गांव लेइब दस बीस हो

रखिया 
​​बन्हा ला भइया
सावन आयल
जिए तू लाख बरीस हो

राखी के लाज देख
हरदम निभइहा
राखी के लाज देख
हरदम निभइहा
दीदी के प्यार कभी तू ना भुलइहा
अइसन ना हो के कहीं
अंखियां निहारे
जाए सावन रुत बीत हो 

रखिया ​​बन्हा ला भइया
सावन आयल 
जिए तू लाख बरीस हो
तोहरा के लागे भइया
हमरी उमिरिया
बहिना ता देले आसीस हो

गुरुवार, 24 अगस्त 2023

मैं तैनू याद आवांगा...(पंजाबी) / गीत : चानन लाल सहगल / स्वर : असा सिंह मस्ताना एवं सुरिन्दर कौर

 https://youtu.be/TY7SPqJ37do    

Asa Singh Mastana (22 August, 1926– 23 May, 1999) was 
Punjabi musician and singer best known for lending his voice 
to the bollywood movie dooj ka chand and singing jugni and 
Heer-genre of folk songs, which recount the tales of Heer- 
Ranjha by poet Waris Shah. He became popular in the 1940s.
By the mid-1960s, when state-run All India Radio started 
promoting folk musicians, this made him, along with Surinder 
of cult status.

Surinder Kaur (25 November 1929 – 14 June 2006) was an 
Indian singer and songwriter. While she mainly sang Punjabi 
folk songs, where she is credited for pioneering and popularising 
the genre, Kaur also recorded songs as a playback singer for 
Hindi films between 1948 and 1952. For her contributions to 
Punjabi music, she earned the sobriquet Nightingale of Punjab
the Sangeet Natak Akademi Award in 1984, and the Padma Shri 
in 2006.

असा सिंह मस्ताना
कटोरे दुँध दे वांगू , सुहाणी रात होवेगी
जदों तूं चंन वेखेगी, ते तेरी अँख रोवेगी
जदों तूं चंन वेखैनींगई , ते तेरी अँख रोवेगी
मैं तैनूं याद आवांगा ,
याद आवांगा तैनूं याद आवांगा

सुरिन्दर कौर

जदों मैं दूर होवांगी , सुती तकदीर वेखैगा
जदों कौई रूप दी राणी , सलेटी हीर वेखैगा
जदों कौई रूप दी राणी , सलेटी हीर वेखैगा
मैं तैनूं याद आवांगी ,
याद आवांगी तैनूं याद आवांगी

असा सिंह मस्ताना

जदों कोठे ते जावेंगी , जदों ज़ुलफ़ां सुकावेंगी
इहनां ज़ुलफ़ां नू सोचेंगी , घाटावा कौण कहिंदा सी
इहनां ज़ुलफ़ां नू सोचेंगी , घाटावा कौण कहिंदा सी
मैं तैनूं याद आवांगा ,
याद आवांगा तैनूं याद आवांगा

सुरिन्दर कौर

जदों कौई बाग वेखेंगा , खिड़े होए फुँल वेखेंगा
मैं हँसदी नज़र आवांगी , तूं मेरे बुल वेखेंगा
मैं हँसदी नज़र आवांगी , तूं मेरे बुल वेखेंगा
मैं तैनूं याद आवांगी ,
याद आवांगी तैनूं याद आवांगी

असा सिंह मस्ताना

जदों मुग़रूर हुंदी सैन , मेरे नाल रुस पैंदी सैन
मनोणा इस तेरां मेरा , के तूं झँट हँस पैंदी सैन
मनोणा इस तरां मेरा , के तूं झँट हँस पैंदी सैन
मैं तैनूं याद आवांगा ,
याद आवांगा तैनूं याद आवांगा

सुरिन्दर कौर

ज़माने रोकिआ मैनूं , रई मैं फेर वी मिलदी
सँजण तसवीर जद वेखी , मेरे अनमोल तूं दिल दी
सँजण तसवीर जद वेखी , मेरे अनमोल तूं दिल दी
मैं तैनूं याद आवांगी,
याद आवांगी तैनूं याद आवांगी
Asa Singh Mastana Katorey dudh de wangu, suhanee raat hovegee
Jadon tu chann vekheengee, te teri akh rovegee Jadon tu chann vekheingee, te teri akh rovegee Main tenu yaad awanga, yaad awanga tenu yaad awanga Surinder Kaur ​
Jadon main door hovangee, suti takdeer vekheingaa Jadon koi roop dee rani, saleti heer vekheinga Jadon koi roop dee rani, saleti heer vekheinga Main tenu yaad awangi, yaad awangi tenu yaad awangee Asa Singh Mastana
Jadon kothey te javengi, jadon zulfan sukavengi Ehna zulfan nu sochengi, ghatawaan kaun kehnda si Ehna zulfan nu sochengi, ghatawaan kaun kehnda si Main tenu yaad awanga, yaad awanga tenu yaad awanga Surinder Kaur
Jadon koi baag vekhenga, khidey huey phul vekhenga Main hasdee nazar awangee, tu mere bul vekhenga Main hasdee nazar awangee, tu mere bul vekhenga Main tenu yaad awangi, yaad awangi tenu yaad awangee Asa Singh Mastana

Jadon mughroor hundi saen, merey naal russ paindee saen Manona es teran mera, ke tu jhat huss paindee saen Manona es teran mera, ke tu jhat huss paindee saen Main tenu yaad awanga, yaad awanga tenu yaad awanga Surinder Kaur
Zamaney rokeya mainu, raee main pher vee mildee Sajjan tasveer jad vekhi, merey anmol tu dil dee Sajjan tasveer jad vekhi, merey anmol tu dil dee Main tenu yaad awangi, yaad awangi tenu yaad awangee​

ਕਟੋਰੇ ਦੁੱਧ ਦੇ ਵਾਂਗੂ , ਸੁਹਾਣੀ ਰਾਤ ਹੋਵੇਗੀ ਜਦੋਂ ਤੂੰ ਚੰਨ ਵੇਖੇਗੀ, ਤੇ ਤੇਰੀ ਅੱਖ ਰੋਵੇਗੀ ਜਦੋਂ ਤੂੰ ਚੰਨ ਵੇਖੈਨੀਂਗਈ , ਤੇ ਤੇਰੀ ਅੱਖ ਰੋਵੇਗੀ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆਵਾਂਗਾ , ਯਾਦ ਆਵਾਂਗਾ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆਵਾਂਗਾ ਜਦੋਂ ਮੈਂ ਦੂਰ ਹੋਵਾਂਗੀ , ਸੁਤੀ ਤਕਦੀਰ ਵੇਖੈਗਾ ਜਦੋਂ ਕੌਈ ਰੂਪ ਦੀ ਰਾਣੀ , ਸਲੇਟੀ ਹੀਰ ਵੇਖੈਗਾ ਜਦੋਂ ਕੌਈ ਰੂਪ ਦੀ ਰਾਣੀ , ਸਲੇਟੀ ਹੀਰ ਵੇਖੈਗਾ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆਵਾਂਗੀ ,ਯਾਦ ਆਵਾਂਗੀ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆਵਾਂਗੀ ਜਦੋਂ ਕੋਠੇ ਤੇ ਜਾਵੇਂਗੀ , ਜਦੋਂ ਜ਼ੁਲਫ਼ਾਂ ਸੁਕਾਵੇਂਗੀ ਇਹਨਾਂ ਜ਼ੁਲਫ਼ਾਂ ਨੂ ਸੋਚੇਂਗੀ , ਘਾਟਾਵਾ ਕੌਣ ਕਹਿੰਦਾ ਸੀ ਇਹਨਾਂ ਜ਼ੁਲਫ਼ਾਂ ਨੂ ਸੋਚੇਂਗੀ , ਘਾਟਾਵਾ ਕੌਣ ਕਹਿੰਦਾ ਸੀ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆਵਾਂਗਾ , ਯਾਦ ਆਵਾਂਗਾ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆਵਾਂਗਾ ਜਦੋਂ ਕੌਈ ਬਾਗ ਵੇਖੇਂਗਾ , ਖਿੜੇ ਹੋਏ ਫੁੱਲ ਵੇਖੇਂਗਾ ਮੈਂ ਹੱਸਦੀ ਨਜ਼ਰ ਆਵਾਂਗੀ , ਤੂੰ ਮੇਰੇ ਬੁਲ ਵੇਖੇਂਗਾ ਮੈਂ ਹੱਸਦੀ ਨਜ਼ਰ ਆਵਾਂਗੀ , ਤੂੰ ਮੇਰੇ ਬੁਲ ਵੇਖੇਂਗਾ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆਵਾਂਗੀ ,ਯਾਦ ਆਵਾਂਗੀ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆਵਾਂਗੀ ਜਦੋਂ ਮੁਗ਼ਰੂਰ ਹੁੰਦੀ ਸੈਨ , ਮੇਰੇ ਨਾਲ ਰੁਸ ਪੈਂਦੀ ਸੈਨ ਮਨੋਣਾ ਇਸ ਤੇਰਾਂ ਮੇਰਾ , ਕੇ ਤੂੰ ਝੱਟ ਹੱਸ ਪੈਂਦੀ ਸੈਨ ਮਨੋਣਾ ਇਸ ਤਰਾਂ ਮੇਰਾ , ਕੇ ਤੂੰ ਝੱਟ ਹੱਸ ਪੈਂਦੀ ਸੈਨ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆਵਾਂਗਾ , ਯਾਦ ਆਵਾਂਗਾ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆਵਾਂਗਾ ਜ਼ਮਾਨੇ ਰੋਕਿਆ ਮੈਨੂੰ , ਰਈ ਮੈਂ ਫੇਰ ਵੀ ਮਿਲਦੀ ਸੱਜਣ ਤਸਵੀਰ ਜਦ ਵੇਖੀ , ਮੇਰੇ ਅਨਮੋਲ ਤੂੰ ਦਿਲ ਦੀ ਸੱਜਣ ਤਸਵੀਰ ਜਦ ਵੇਖੀ , ਮੇਰੇ ਅਨਮੋਲ ਤੂੰ ਦਿਲ ਦੀ ਮੈਂ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆਵਾਂਗੀ ,ਯਾਦ ਆਵਾਂਗੀ ਤੈਨੂੰ ਯਾਦ ਆਵਾਂਗੀ

बुधवार, 23 अगस्त 2023

बसने लगाते रंग.../ बांग्ला फागुन गीत / गायन : अनल चटर्जी

 https://youtu.be/8pzPBybORzE 

बसने लगाते रङ
बारण नाहि गो तार
मनेते दिओ ना रङ
ओगो श्यामराय

आबिर कुमकुम
लेगेछे फागेर धुम
ओगो, बोलो-बोलो माधब
माधबे कोथाय
ओगो, माधबे कोथाय

मंगलवार, 22 अगस्त 2023

समरथ सुअन समीरके, रघुबीर-पियारे.../ विनय पत्रिका पद संख्या-३३ / गोस्वामी श्री तुलसीदास जी

 

https://youtu.be/zKNjgyd4NBc

समरथ सुअन समीरके, रघुबीर - पियारे। 
मोपर कीबी तोहि जो करि लेहि भिया रे ॥१॥
 तेरी महिमा ते चलें चिंचिनी- चिया रे । 
अँधियारो मेरी बार क्यों, त्रिभुवन-उजियारे ॥२॥ 
केहि करनी जन जानिकै सनमान किया रे ।
केहि अघ औगुन आपने कर डारि दिया रे ॥३॥ 
खाई खोंची माँगि मैं तेरो नाम लिया रे । 
तेरे बल, बलि, आजु लौं जग जागि जिया रे ॥४॥ 
जो तोसों होतौ फिरौं मेरो हेतु हिया रे। 
तौ क्यों बदन देखावतो कहि बचन इयारे ॥५॥ 
तोसो ग्यान-निधान को सरबग्य बिया रे । 
हौं समुझत साईं-द्रोहकी गति छार छिया रे ॥६॥ 
तेरे स्वामी राम से, स्वामिनी सिया रे । 
तहँ तुलसीके कौनको काको तकिया रे ॥ ७ ॥

भावार्थ – 

हे सर्वशक्तिमान् पवनकुमार! 
हे रामजीके प्यारे ! 
तुझे मुझपर जो कुछ करना हो सो भैया अभी कर ले ॥ १ ॥ 
तेरे प्रतापसे इमलीके चियें भी (रुपये-अशरफीकी जगह) 
चल सकते हैं; अर्थात् यदि तू चाहे तो मेरे- जैसे निकम्मों 
की भी गणना भक्तोंमें हो सकती है। फिर मेरे लिये,  हे 
त्रिभुवन-उजागर ! इतना अँधेरा क्यों कर रखा है ? ॥२॥ 
पहले मेरी कौन-सी अच्छी करनी जानकर तूने मुझे अपना 
दास समझा था तथा मेरा सम्मान किया था और अब किस 
पाप तथा अवगुणसे मुझे हाथसे फेंक दिया,  अपनाकर भी-
त्याग दिया ? ॥३॥ 
मैंने तो सदासे ही तेरे नामपर टुकड़ा माँगकर खाया है, तेरी 
बलैया लेता हूँ, मैं तो तेरे ही बलके भरोसेपर जगत् में उजागर 
होकर अबतक जीता रहा हूँ ॥४॥ 
जो मैं तुझसे विमुख होता तो मेरा हृदय ही उसमें कारण होता, 
फिर मैं निज परिवार के मनुष्य की तरह भली-बुरी सुनाकर 
तुझे अपना मुँह कैसे दिखाता ?॥५॥ 
तू मेरे मनकी सब कुछ जानता है, क्योंकि तेरे समान ज्ञानकी 
खानि और सबके मनकी जाननेवाला दूसरा कौन है ? यह तो 
मैं भी समझता हूँ कि स्वामीके साथ द्रोह करनेवालेको नष्ट-भ्रष्ट 
हो जाना पड़ता है ॥६॥ 
तेरे स्वामी श्रीरामजी और स्वामिनी श्रीसीताजी-सरीखी हैं, वहाँ 
तुलसीदासका तेरे सिवा और किस मनुष्यका और किस वस्तुका 
सहारा है ? इसलिये तू ही मुझे वहाँतक पहुँचा दे ॥७॥

रविवार, 20 अगस्त 2023

वसुधैव कुटुम्बकम् .../ कृति : श्री वी. सदासिवन / गायन : राहुल वेल्लाल, कुलदीप एम. पई एवं रघुराम मणिकंदन

 https://youtu.be/RzLBod-bhig 

Graciously Penned by Sri V. Sadasivan.
Music composed by Kuldeep M Pai.
Rendered by Rahul Vellal, Kuldeep M Pai, Raghuram Manikandan

जगदेव कुटुम्बकम् वसुधैव कुटुम्बकम् ।

येषामतिशर्मदा सर्वान् प्रति सर्वदा गर्वाद्यतिदूरगा भान्ती हृदये दया । तेषाममलात्मनां याता वसुधाम्बतां पितृतां गतमम्बरं जगदेव कुटुम्बकम् ॥ १ ॥

जात्यादिषु डम्बरं हित्वा विश्वम्भरम् पश्यन् समवीक्षणः सञ्चर सुविचक्षण । चिन्तय हृदि शङ्करं सन्ततमभयङ्करम् गतभेदविडम्बकं वसुधैव कुटुम्बकम् ॥ २ ॥

जहतामसमानतां जगतां वहतां मुदां हृदये सकलात्मताम् स्मरतां चरतां सताम् । सततं शुभकारिणां भयशोकनिवारिणां सकलेष्वनुकम्पया जगदेति कुटुम्बताम् ॥ ३ ॥

संस्कृत अन्वय :

येषाम् हृदये सर्वान् प्रति सर्वदा अतिशर्मदा गर्वाद्यतिदूरगा दया भान्ती ये च वसुधाम्बतां याताः
(वसुधैव अम्बा यस्य सः वसुधाम्बः।‌ तस्य भावः वसुधाम्बता )।तेषाम् अमलात्मनाम् अम्बरं
पितृतां गतम् जगदेव कुटुम्बकम् (अभवत्)।।

येषाम् हृदये सर्वान् प्रति सर्वदा अतिशर्मदा गर्वाद्यतिदूरगा दया भान्ती ये च वसुधाम्बतां याताः
(वसुधैव अम्बा यस्य सः वसुधाम्बः।‌ तस्य भावः वसुधाम्बता )।तेषाम् अमलात्मनाम् अम्बरं
पितृतां गतम् जगदेव कुटुम्बकम् (अभवत्)।।

हे सुविचक्षण जात्यादिषु डम्बरं हित्वा विश्वम्भरम् हृदि पश्यन् समवीक्षणः (सन् भुवि) सञ्चर ।
सन्ततमभयङ्करम् गतभेदविडम्बकं शङ्करं हृदि चिन्तय (तेन) वसुधा एव गतभेदविडम्बकं
कुटुम्बकम् (भवति)।

असमानतां जहताम् जगतां मुदां वहतां हृदये सकलात्मताम् स्मरतां सततं शुभकारिणां
भयशोकनिवारिणां चरतां सताम् सकलेष्वनुकम्पया ( सकलेष्वनुकम्पया युतानां अथवा
ईदृशानां या सकलेष्वपि भासमाना अनुकम्पा वर्तते तया अनुकम्पया) जगत् कुटुम्बताम् एति।।


Here is a detailed explanation for all seekers and
sadhakas who are keen to understand the detailed
explanation. The following notes have been lovingly
cascaded to all from Sri Sadasivan, who has penned
this work of poetry and Sri Smaran Haridashwa, an
ardent seeker and a Shishya of Anna.

जगदेव कुटुम्बकम् वसुधैव कुटुम्बकम् । jagadēva kuṭumbakam vasudhaiva kuṭumbakam

The World itself is one family ! The entire Earth is one family ! येषामतिशर्मदा सर्वान् प्रति सर्वदा गर्वाद्यतिदूरगा भान्ती हृदये दया । तेषाममलात्मनां याता वसुधाम्बतां पितृतां गतमम्बरं जगदेव कुटुम्बकम् ॥ 1 ॥ yēṣāmatiśarmadā sarvān prati sarvadā garvādyatidūragā bhāntī hṛdayē dayā । tēṣāmamalātmanāṃ yātā vasudhāmbatāṃ pitṛtāṃ gatamambaraṃ jagadēva kuṭumbakam ॥

Those whose hearts incessantly exude compassion that confers
happiness towards everyone at all times and is afar from pride
and the like; for such immaculate souls, Earth unfurls as the
mother and the Sky unfolds as the father. This World becomes
one family, thus !

जात्यादिषु डम्बरं हित्वा विश्वम्भरम् पश्यन् समवीक्षणः सञ्चर सुविचक्षण । चिन्तय हृदि शङ्करं सन्ततमभयङ्करम् गतभेदविडम्बकं वसुधैव कुटुम्बकम् ॥ 2 ॥ jātyādiṣu ḍambaraṃ hitvā viśvambharam paśyan samavīkṣaṇaḥ sañcara suvicakṣaṇa । cintaya hṛdi śaṅkaraṃ santatamabhayaṅkaram gatabhēdaviḍambakaṃ vasudhaiva kuṭumbakam

O capable one! Having discarded the entanglement or pride in castes
and the likes, beholding the all-sustaining Lord Vishnu in your heart,
travel ahead with equal-mindedness. Meditate in your heart, upon Lord
Shiva, the bestower of eternal fearlessness, the One who has renounced
all sorts of differences and contempt. Thus, the entire Earth becomes
one family (free of contempt and conflicts) !

जहतामसमानतां जगतां वहतां मुदां हृदये सकलात्मताम् स्मरतां चरतां सताम् । सततं शुभकारिणां भयशोकनिवारिणां सकलेष्वनुकम्पया जगदेति कुटुम्बताम् ॥ 3 ॥ jahatāmasamānatāṃ jagatāṃ vahatāṃ mudāṃ hṛdayē sakalātmatām smaratāṃ caratāṃ satām । satataṃ śubhakāriṇāṃ bhayaśōkanivāriṇāṃ sakalēṣvanukampayā jagadēti kuṭumbatām ॥

Those who relinquish inequalities and only spread cheer to the world,
those who consider all living beings as ‘Atman’ in their hearts; (Those
who) Incessantly extend auspiciousness and resolve the fear and misery
of others, and trot the globe like virtuous people, they extend their
compassion to everyone by which the entire World becomes their family!

शनिवार, 19 अगस्त 2023

कभी इस मकाँ से गुज़र गया कभी उस मकाँ से गुज़र गया.../ अर्श मलसियानी / गायन : नाशनास

 https://youtu.be/xtoIWiE1tUM 

अर्श मलसियानी (1908 – 1979)जन्म नाम: बाल मुकुंद, उर्दू के एक प्रख्यात भारतीय शायर 
और लेखक थे। वे उर्दू और फारसी के विद्वान तथा उर्दू शायर लाभु राम 'जोश मल्सियानी' के पुत्र 
थे। वर्ष 1948 से 1968 के सेवानिवृति तक उन्होंने भारत सरकार के प्रकाशन विभाग में पहले 
"आज कल" उर्दू पत्रिका के सहायक संपादक और उसके बाद 1954 में जोश मलीहाबादी के बाद 
संपादक का दायित्व निभाया।
उनकी कविता के चार संग्रह कुंदा रंगचंग-ओ-आहंगशरार-ए-संग और आहंग-ए-हिजाज़ 
प्रकाशित हुए हैं। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद पर उनकी आत्मकथा की पुस्तक 1976 में 
प्रकाशित हुई।
Nashenas 
Dr. Mohammad Sadiq Fitrat, born Sadiq Fitrat Habibi, in 1935, 
known professionally as Nashenas is one of the oldest surviving 
musicians from Afghanistan. His fame began in the late 1950s, 
and since then he has produced many albums consisting of Pashto, 
Dari, and Urdu songs. He is known as "the Afghan Saigal".
Nashenas was born in KandaharAfghanistan to an ethnic Pashtun 
family. He belongs to the famous Habibi family who are Kakar by tribe. 
This is a religious family which descends from Habibullah Kakar, or 
Habibullah Akhundzada. His primary education was in Kandahar.
After his father was appointed by the National Bank of Karachi, he 
moved to British India where he lived without his mother. 
He encountered classical Indian music, which deeply moved and 
influenced him. Zakir Husain taught him calligraphyPersian and Urdu.
While staying in Chaman, near the border of Afghanistan, he went to a 
school where he experienced an important moment in his musical 
awakening. Students were celebrating the establishment of their school. 
Kids used tables as drums while Nashenas sang. He was called to the 
principal's office. Thinking that he would get punished, he decided to deny 
that he was singing. On the contrary, he found that school appreciated his 
talents and encouraged him to perform. He received a medal and five 
volumes of religious texts
In 1948 he returned to Afghanistan. Starting from 1953 he begins to sing on 
Afghan radio and becomes known under his pseudonym "Nashenas". 
His family stressed to him the importance of religion as he hailed from the 
religious elite of the city of Kandahar. In the early 1970s, Nashenas traveled 
to the Soviet Union where he obtained his doctorate in Pashto 
Literature from Moscow State University.

Since the 90s he lives in London.

Nashenas is still popular in Afghanistan, including in the 
Pashto-speaking areas of Pakistan. He made one song about 
Muhammad Iqbal. Nashenas has a following among musicians 
of the new generation as well, who are noted to imitate his style 
of singing. One of which is Sardar Ali Takkar, a Pashtun musician 
from Khyber Pakhtunkhwa, Pakistan.


कभी इस मकाँ से गुज़र गया कभी उस मकाँ से गुज़र गया

तिरे आस्ताँ की तलाश में हर आस्ताँ से गुज़र गया

कभी मेहर-ओ-माह-ओ-नुजूम से कभी कहकशाँ से गुज़र गया

जो तेरे ख़याल में चल पड़ा वो कहाँ कहाँ से गुज़र गया

अभी आदमी है फ़ज़ाओं में अभी उड़ रहा है ख़लाओं में

ये जाने पहुँचेगा किस जगह अगर आसमाँ से गुज़र गया

ये मिरा कमाल-ए-गुनह सही मगर इस को देख मिरे ख़ुदा

मुझे तू ने रोका जहाँ जहाँ मैं वहाँ वहाँ से गुज़र गया

जिसे लोग कहते हैं ज़िंदगी वो तो हादसों का हुजूम है

वो तो कहिए मेरा ही काम था कि मैं दरमियाँ से गुज़र गया

मैं मुराद-ए-शौक़ को पा के भी मुराद-ए-शौक़ को पा सकूँ

दर-ए-मेहरबाँ पे पहुँच के भी दर-ए-मेहरबाँ से गुज़र गया

चलो 'अर्श' महफ़िल-ए-दोस्त में कि पयाम-ए-दोस्त भी है यही

वो जो हादिसा था फ़िराक़ का सर-ए-दुश्मनाँ से गुज़र गया

  • आस्ताँ - चौखट, दहलीज़, ड्योढ़ी   
    • मेहर-ओ- माह-ओ-नुजूम - सौर वर्ष का सातवां महीना जिसमें सूर्य तुला राशि में रहता है
    • कहकशाँ - आकाशगंगा
    • खलाओं - शून्य 
    • कमाल-ए-गुनह - अपराध-कौशल
    • दरमियाँ - बीच में
    • मुराद-ए-शौक़ - मन में बनी रहनेवाली अभिलाषा
    • दर- द्वार
    • पयाम-ए-दोस्त - मित्र का सन्देश 
    • हादिसा - विपत्ति 
    • फ़िराक़ - विछोह 
    • सर-ए-दुश्मनाँ  - दुश्मन के सर