शुक्रवार, 5 जून 2026

घाट पर ठाड़े श्री मदनगोपाल.../ गायन : मुदिता एवं रुचिता जमरिया

https://youtu.be/WIKkpp2liSU?si=O2Q6KbL6F3BqdqKl


घाट पर ठाड़े श्री मदनगोपाल ।
कौन युक्ति कर भरों री यमुनाजल पर्यो है हमारे ख्याल ।।

घोस बढ़्यो घर सास  रिसैहै चल न सकत एक चाल ।
कहा करुं अब यो नहीं मानत सुंदर नंदको लाल ।।

कछुक संकोच कछु चोप मिलन की परी प्रेम की जाल ।
परमानंद स्वामी चित चोर्यों वेणु बजाय रसाल ।।

कण्डु कण्डु नियन्ना.../ संत पुरंदर दासर कृति / गायन : सुषमा अनिल / भाषा: कन्नड़

https://youtu.be/92RwKoSfukI?si=l1jzfH3Du9jSiuQa


पल्लवी

कण्डु कण्डु नियन्ना कइया बिदुवारे पुंडरीकाक्ष पुरूषोत्तम हरे

चरणम् १

बन्धुगालू एनगिला बदुकिनाली सुखविल्ला निन्देयली नन्देनै निराजाक्ष
तन्दे तैय्यु निने बन्धु बालगावु नी इने एंडेन्डिगु निन्ना नम्बिडेनो कृष्ण

चरणम्  २

केसनवोन्दु युगावगि त्रनकिन्त कादेयि एनिसलआरादा भवाडी नोंदे नानु
सनकादि मुनि वन्द्या वनज संभव जनक फणिशायी प्रह्लादगोलिड श्री कृष्ण

चरणम्  ३

भक्तवत्सलनेम्ब बिरुड़ पोट्टा मेले भक्तअधिनानगिरा बेदावे
मुक्ति दायक निनु होन्नुरु पूर्वसा शाक्त गुरु पुरंदर विट्ठल श्री कृष्ण

English Translation  :

Geetha Naresh May 5, 2024 at 6:45 AM

Meaning: 

O pundarikAksha, purushottama Hare, Ranga will you (Ni enna) leave(biDuvare) my hand(kai) (after having) seen(kanDu) me so far. (will you stop your protection to me now?)

C1: 

O nIrajaksha, I have no(enagilla) relatives(bandhu galu), there is no happiness(sukha) in life(baduku), I am pained(nonde) at the ridicule(ninde) directed towards me. You are my mother(tAyi) and father(tande), you are all that there is as my relatives(bandhu-baLaga), O Krishna, I believe (nambideno) in you at all times(endendigU)

C2: 

A moment(kSaNa) has become an age(yuga - like dwaparayuga), I have been (treated) lower than a blade of grass(by others), I have suffered(nonde) uncountable(eNisalarada) indignities(bhava). O krishna, respected by sages like sanaka, vanaja sambhava janaka, the one resting on a snake, and the one who blessed Prahlada.(don’ leave me…)

C3: 

(Tell me) Once you assume (potta mele) the title of bhaktavatsala(the one who protects his devotees), don’t you have to be under the control(AdhIna) of your devotees? O Krishna, the one who lives in Honnuru (honnuru puravAsa), the almighty(shakta) guru purandaravithala. (don’t leave me…)

पर्यावरण वन्दना.../ कविता / अरुण मिश्र

https://youtu.be/pc4LKrM5qH4  

वन्दना करिये धरा की;
धरा के पर्यावरण की।।

झर रहे निर्झर सुरीले,
और नदियाँ बहें कल-कल।
ताल, पोखर, झील, सागर,
हर तरफ है, नीर निर्मल।।

चर-अचर जिसमें सुरक्षित,
स्नेहमय उस आवरण की।।

मन्द, मन्थर पवन शाीतल;
आँधियों का तीव्रतर स्वर।
सर्वव्यापी वायु पर ही,
प्राणियों की साँस निर्भर।।

जीव-जग-जीवनप्रदायिनि-
प्रकृति के, शुभ आचरण की।।

अन्न के भण्डार दे भर,
भूमि उर्वर, शस्य-श्यामल।
भूख सबकी मेटने को-
वृक्ष, फलते हैं मधुर फल।।

माँ धरा की गोद के,
इस मोदमय वातावरण की।।
                   *
(काव्य-संग्रह 'कस्मै देवाय' से साभार)

गुरुवार, 4 जून 2026

श्री कृष्णाष्टकं.../ आदि शंकराचार्य कृत/ गायन : गीता, कल्पिता एवं श्रुति उपासनी

https://youtu.be/a7fMQVfZHY8?si=ygzjk_EyP7Vs7UdD

आदि शंकराचार्य द्वारा रचित श्री कृष्णाष्टक भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति का एक अत्यंत दिव्य स्रोत है। इसमें आठ श्लोक हैं जो उनकी मनमोहक छवि, लीलाओं और महिमा का वर्णन करते हैं। 

श्लोक १
भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव नन्दनन्दनम् ।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम् ॥१॥ 


अर्थ: जो ब्रजभूमि के एकमात्र आभूषण हैं, समस्त पापों को नष्ट करने वाले हैं और अपने भक्तों के चित्त को आनंदित करने वाले हैं, उन नंदनन्दन (नंद के पुत्र) का मैं सदा भजन करता हूँ। जिनके मस्तक पर सुंदर मोर मुकुट है, हाथों में सुरीली बांसुरी है और जो कामदेव के समान सौंदर्य के सागर हैं, उन चतुर श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ। 


श्लोक २
मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम् ।
करारविन्दभूधरं स्मतावलोकसुन्दरं महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णवारणम् ॥२॥ 


अर्थ: जो कामदेव के अहंकार को नष्ट करने वाले हैं, विशाल और चंचल नेत्रों वाले हैं तथा ग्वालों के कष्टों को दूर करने वाले हैं, उन कमल नयन (पद्मलोचन) श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ। जिन्होंने अपने कमल रूपी हाथों से गोवर्धन पर्वत को धारण किया, जिनकी मंद मुस्कान अत्यंत सुंदर है तथा जिन्होंने देवराज इंद्र के मान (अहंकार) को तोड़ा था, उन नटखट कृष्ण को मेरा प्रणाम है। 


श्लोक ३
कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं व्रजाङ्गनाङ्कवल्लभं नमामि कृष्णदुर्लभम् ॥३॥(पंक्ति का तीसरा चरण)
यशोषया समोदया सगोपया सनन्दया युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम् ॥३॥ 


अर्थ: जिनके कानों में कदम्ब के फूलों के कुण्डल हैं, जिनके गाल अत्यंत आकर्षक हैं, जो ब्रज की गोपियों के प्रियतम हैं और जो बड़े-बड़े देवताओं को भी दुर्लभ हैं, उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ। जो यशोदा माता के साथ अत्यंत प्रसन्न हैं, गोपगणों और नंदजी से घिरे हुए हैं और भक्तों को एकमात्र आनंद प्रदान करने वाले हैं, उन गोपों के नायक को मैं नमन करता हूँ। 


श्लोक ४
सदैव पादपङ्कजं मदीयमानसे निजं दधानमुत्तमालकं नमामि नन्दबालकम् ।
समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणं समस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम् ॥४॥


अर्थ: जिनके चरण कमल सदैव मेरे मन में बसे रहते हैं, जो घुंघराले बालों से सुशोभित हैं, उन नन्दबालक को मैं प्रणाम करता हूँ। जो सभी दोषों/बुराइयों का नाश करने वाले हैं, समस्त लोकों का पोषण करने वाले हैं और सभी ग्वालों के मन में निवास करने वाले हैं, उन नंदलाल को मैं नमन करता हूँ। 


श्लोक ५
भुवोभरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं यशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम् ।
दृगन्तकान्तभङ्गिनं सदासदालसङ्गिनं दिने दिने नवं नवं नमामि नन्दसंभवम् ॥५॥ 


अर्थ: जो पृथ्वी का भार उतारने वाले और संसार रूपी सागर से पार लगाने वाले (नाविक) हैं, यशोदा माता के दुलारे हैं और भक्तों के चित्त को चुराने वाले हैं, उन्हें मेरा प्रणाम। जिनकी तिरछी और सुंदर चितवन मन मोह लेती है, जो भक्तों के सदा संग रहते हैं और जो प्रतिदिन नए और मनोहर प्रतीत होते हैं, उन नंदनंदन को मैं नमन करता हूँ। 


श्लोक ६
वराङ्गकल्कशोभितं गलेचलद्विनिर्जितं लसन्नखन्दुभासुरं नमामि कृष्णसुन्दरम् ।
समस्तगोपनन्दनं हृदम्बुजैकनन्दनं व्रजाङ्गनामनोहरं नमामि कृष्णसुन्दरम् ॥६॥


अर्थ: जिनके अंग सुगंधित लेप से सुशोभित हैं, गले में मोतियों की माला और आभूषण झिलमिलाते हैं और जिनके नख चंद्रमा के समान चमकते हैं, उन परम सुंदर श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ। जो सभी गोप-बालकों को आनंदित करने वाले हैं, सबके हृदय रूपी कमल में वास करने वाले हैं और ब्रज की स्त्रियों का मन मोह लेने वाले हैं, उन सुंदर कृष्ण को मेरा नमन है। 


श्लोक ७
पिनाङ्कपाणिमण्डलं सदाविकासिसद्गुणं जगत्त्रयाकतारकं नमामि कृष्णतत्त्वम् ॥७॥


अर्थ: जो अपने हाथों में मुरली धारण किए रहते हैं, जिनके दिव्य गुण सदा विकसित रहते हैं और जो तीनों लोकों का उद्धार करने वाले हैं, उस परमतत्त्व रूपी श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ। 


श्लोक ८
कृष्णाष्टकमिदं पुण्यं प्रातरुत्थाय यः पठेत् ।
कोटिजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥८॥ 


अर्थ: इस पवित्र 'कृष्णाष्टकम्' का जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर पाठ करता है, उसके करोड़ों जन्मों के पाप केवल इसके स्मरण मात्र से ही नष्ट हो जाते हैं।

बुधवार, 3 जून 2026

कोई तनहाई का एहसास दिलाता है मुझे.../ शायर : शाज़ तमकनत / गायन : वन्दना श्रीनिवासन

https://youtu.be/TXvMTnsZLZ4



कोई तन्हाई का एहसास दिलाता है मुझे
मैं बहुत दूर हूँ नज़दीक बुलाता है मुझे

मैं ने महसूस किया शहर के हंगामे में
कोई सहरा में है, सहरा में बुलाता है मुझे

तू कहाँ है कि तिरी ज़ुल्फ़ का साया साया
हर घनी छाँव में ले जा के बिठाता है मुझे

ऐ मिरे हाल-ए-परेशाँ के निगह-दार ये क्या
किस क़दर दूर से आईना दिखाता है मुझे

ऐ मकीन-ए-दिल-ओ-जाँ मैं तिरा सन्नाटा हूँ
मैं इमारत हूँ तिरी किस लिए ढाता है मुझे

रहम कर मैं तिरी मिज़्गाँ पे हूँ आँसू की तरह
किस क़यामत की बुलंदी से गिराता है मुझे

'शाज़' अब कौन सी तहरीर को तक़दीर कहूँ
कोई लिखता है मुझे कोई मिटाता है मुझे

शनिवार, 30 मई 2026

मिर्जापुर कइले गुलज़ार कचौड़ी गली सून कइले बलमू.../ गायन : डाॅ सोमा घोष

https://youtu.be/ieq9PVKHitE?si=8cREB8jb3psnhxtX


मिर्जापुर कइला गुलज़ार हो!

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय बनारस की कचौड़ी गली से एक क्रांतिकारी को रात तब पकड़ लिया जब वह अपनी प्रेयसी के साथ था। उसे पकड़ कर वे बनारस के पास एक शहर है मिर्जापुर, वहाँ ले गए। वहाँ से फिर उसे सजा देकर काला पानी (रंगून) भेज दिया। जहाँ से वह कभी न लौट सके!
यहाँ कचौड़ी गली में उसकी प्रेयसी तड़प उठी। उसने उसके विरह में घर बार त्याग दिया और संन्यासिन की तरह विचरने लगी। जब थोड़ा उसे देह और आत्मा की सच्चाई का कुछ भान हुआ तो उसने अपनी विरह पीड़ा को निर्गुण भजन में लोकगीत की प्रख्यात कजरी शैली में लिपिबद्ध किया है। इसे मशहूर ठुमरी गायिका गौहर जान ने बड़े दिल से गाया है।

मिर्जापुर कैले गुलजार हो,
कचौड़ी गली सून कैले बलमू


एही मिर्जापुर से उड़ेले जहजिया,
सैंया चल गइले रंगून हो,
कचौड़ी गली सून कैले बलमू


पनवा से पातर भइल तोर धनिया,
देहिया गलेला जइसे नून हो,
कचौड़ी गली सून कैले बलमू

शुक्रवार, 29 मई 2026

बड़ा जबरदस्त उसका इन्तजाम है... / फिल्म : कण कण में भगवान (१९६३) / गायक : महेंद्र कपूर / संगीत : पंडित शिवराम/ गीतकार : भारत व्यास

https://youtu.be/ZMB8mqS6sPA?si=H-nTT5kKLLkvapR5


ये दुनिया बनाना और बनाके फिर चलाना
बस उसी का काम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है

रात को ही रात परभात को परभात
शाम ही को शाम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है
ये दुनिया बनाना और बनाके फिर चलाना
बस उसी का काम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है

जल पे है थल और थल पे आसमान है
फिर भी एक दुजे पे न बोझ के समान है
जल पे है थल और थल पे आसमान है
फिर भी एक दुजे पे न बोझ के समान है
गजब का ये जहान है
बिन खम्बे का मकान है
गजब का ये जहान है
बिन खम्बे का मकान है
जहा का एक एक तन उसका गुलाम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है
ये दुनिया बनाना और बनाके फिर चलाना
बस उसी का काम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है

सूर्य चंदर तारे अपने धरम से न टल सके
इंसान की मजाल क्या जो उसका क्रम बदल सके
सूर्य चंदर तारे अपने धरम से न टल सके
इंसान की मजाल क्या जो उसका क्रम बदल सके
इक फूल भी खिले नहीं एक पत्ता भी हिले नहीं
इक फूल भी खिले नहीं एक पत्ता भी हिले नहीं
सारे जहाँ की उसके हाथ में लगाम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है
ये दुनिया बनाना और बनाके फिर चलाना
बस उसी का काम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है