https://youtu.be/0PULSsRE17M
rashmi rekh
बुधवार, 2 सितंबर 2026
रविवार, 30 अगस्त 2026
पद्मनाभा नारायणा.../ अभंग : सन्त तुकाराम / गायन : आर्या अम्बेकर
https://youtu.be/oBokNBRiWrQ
श्रीअनंता मधुसूदना ।
पद्मनाभा नारायणा ॥१॥
सकळदेवा आदिदेवा ।
कृपाळुवा जी केशवा ।
महानंदा महानुभावा ।
सदाशिवा सहजरूपा ॥२॥
अगा ये सगुणा निर्गुणा ।
जगज्जनित्या जगज्जीवना ।
वसुदेवदेवकीनंदना ।
बाळरांगणा बाळकृष्णा ॥३॥
तुका आला लोटांगणी ।
मज ठाव द्यावा जी चरणीं ।
हे चि करीतसें विनवणी ।
भवबंधनीं सोडवावें ॥४॥
सोमवार, 24 अगस्त 2026
ब्रज नव तरुणि-कदम्ब मुकुटमणि.../ श्री हित चौरासी – पद संख्या 29
https://youtu.be/U_vGie0HaRk
ब्रज नव तरुणि-कदम्ब मुकुटमणि,
श्यामा आजु बनी।
नख-सिख लौं अँग-अंग माधुरी,
मोहे श्याम धनी॥
यौं राजत कवरी गूँथित कच,
कनक-कंज-वदनी।
चिकुर चंद्रिकन बीच अर्ध बिधु,
मानौँ ग्रसित फनी॥
सौभग रस सिर स्रवत पनारी,
पिय सीमन्त ठनी।
भृकुटि काम-कोदंड नैंन-सर,
कज्जल रेख अनी॥
तरल तिलक, ताटंक गंड पर,
नासा जलज मनी।
दसन कुन्द, सरसाधर पल्लव,
प्रीतम मन समनी॥
चिबुक मध्य अति चारु सहज सखि,
साँवल बिंदुकनी।
प्रीतम प्राण रतन संपुट कुच,
कंचुकि कसिब तनी॥
भुज-मृनाल बल हरत बलय जुत,
परस सरस स्रवनी।
श्याम सीस तरु मनौ मिडवारी,
रची रुचिर रवनी॥
नाभि गंभीर मीन मोहन मन,
खेलन कौँ हृदनी।
कृस कटि, पृथु नितम्ब किंकिनि व्रत,
कदलि-खंभ जघनी॥
पद अम्बुज जावक जुत भूषण,
प्रीतम उर अवनी।
नव-नव भाय विलोभि भाम इभ,
बिहरत वर करिनी॥
(जै श्री) हित हरिवंश प्रशंसित श्यामा,
कीरति विशद घनी।
गावत स्रवनन सुनत सुखाकर,
विश्व दुरित दवनी॥
रविवार, 23 अगस्त 2026
ये बातें झूटी बातें हैं.../ शायर : इब्न-ए-इंशा / गायन : ग़ुलाम अली
https://youtu.be/2OOcNnWwYPs
ये बातें झूटी बातें हैं ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं
हैं लाखों रोग ज़माने में क्यूँ इश्क़ है रुस्वा बे-चारा
हैं और भी वजहें वहशत की इंसान को रखतीं दुखियारा
हाँ बे-कल बे-कल रहता है हो पीत में जिस ने जी हारा
पर शाम से ले कर सुब्ह तलक यूँ कौन फिरेगा आवारा
ये बातें झूटी बातें ये लोगों ने फैलाईं हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं
ये बात अजीब सुनाते हो वो दुनिया से बे-आस हुए
इक नाम सुना और ग़श खाया इक ज़िक्र पे आप उदास हुए
वो इल्म में अफ़लातून सुने वो शेर में तुलसीदास हुए
वो तीस बरस के होते हैं वो बी-ए एम-ए पास हुए
ये बातें झूटी बातें हैं ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं
गर इश्क़ किया है तब क्या है क्यूँ शाद नहीं आबाद नहीं
जो जान लिए बिन टल न सके ये ऐसी भी उफ़्ताद नहीं
ये बात तो तुम भी मानोगे वो 'क़ैस' नहीं फ़रहाद नहीं
क्या हिज्र का दारू मुश्किल है क्या वस्ल के नुस्ख़े याद नहीं
ये बातें झूटी बातें हैं ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं
वो लड़की अच्छी लड़की है तुम नाम न लो हम जान गए
वो जिस के लम्बे गेसू हैं पहचान गए पहचान गए
हाँ साथ हमारे 'इंशा' भी इस घर में थे मेहमान गए
पर उस से तो कुछ बात न की अंजान रहे अंजान गए
ये बातें झूटी बातें हैं ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं
जो हम से कहो हम करते हैं क्या 'इंशा' को समझाना है
उस लड़की से भी कह लेंगे गो अब कुछ और ज़माना है
या छोड़ें या तकमील करें ये इश्क़ है या अफ़साना है
ये कैसा गोरख-धंदा है ये कैसा ताना-बाना है
ये बातें कैसी बातें हैं जो लोगों ने फैलाई हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं
शनिवार, 22 अगस्त 2026
तेरी काया नगर का कुण धणी.../ रचना : सन्त कबीर / गायन : शबनम वीरमानी
https://youtu.be/Z3H7NmiNtnc
तेरी काया नगर का कुण धणी, मारग में लूटे पांच जणी
पांच जनी, पच्चीस जनी, मारग में लूटे पांच जणी
पांच जनी, पच्चीस जनी, मारग में लूटे पांच जणी
आशा तृष्णा नदियां भारी, बह गये संत बड़ा ब्रह्मचारी, हरे हरे
जो उबरया जो शरण तुम्हारी, चमक रही है सेलाणी
बन में लुट गये मुनीजन नंगा, डस गयी ममता उल्टा टांगा,
हरे-हरे
जाके कान गुरु नहीं लागे, सृंगी ऋषी पर आन पड़ी
साधू संत मिल रोके घांटा, साधु चढ़ ग्या उल्टी बाटा,
हरे-हरे
घेर लिया सब औघट घाटा, पार उतारो आप धणी
ईन्द्र बिगाड़ी गौतम नारी, कुबजा भई गया कृष्ण मुरारी,
हरे-हरे
राधा रुखमा बिलकति हारी, राम चन्द्र पर आन बणी
शंकर लुट गये नेजाधारी, रईयत उनकी कौन बिचारी,
हरे-हरे
भूल रही कर मन की मारी, तीन युग झुक रही तीन जणी
साहेब कबीर गुरु दीन्हा हेला, धर्मदास सुनो निज चेला,
हरे-हरे
लंबा मारग पंथ दुहेला, सिमरो सिरजन हार धनी
शुक्रवार, 21 अगस्त 2026
मेरा तो क्या ख़ुशी में रहूँ या मलाल में.../ शायर : नज़ीर मोहम्मद आरज़ू जयपुरी / गायन : हीरा देवी मिश्रा
https://youtu.be/toxvr57T1U0.
मेरा तो क्या ख़ुशी में रहूँ या मलाल में
तुम ख़ुश रहो जहाँ भी रहो जिस ख़याल में
हूँ महव मैं तो ऐसा किसी के ख़याल में
कुछ इम्तियाज़ ही नहीं हिज्र-ओ-विसाल में
तेरे ख़याल ही की बदौलत है ज़िंदगी
तू है तो इक जहान है मेरे ख़याल में
हाइल अगर हज़ार हों पर्दे तो कुछ नहीं
तुम हो मिरी निगाह में दिल में ख़याल में
होता रहे करम जो यूँही ऐ ख़याल-ए-यार
लग़्ज़िश न हो कभी मिरे पाए-ए-ख़्याल में
है तू तो हर घड़ी मिरी आँखों के सामने
आता हूँ मैं भी क्या कभी तेरे ख़याल में
शेर-ओ-सुख़न की 'आरज़ू' अब दाद क्या मिले
ज़ौक़-ए-सुख़न ही जब नहीं अहल-ए-कमाल में
गुरुवार, 20 अगस्त 2026
दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे.../ शायर : बहज़ाद लखनवी / गायन : निर्मला देवी
https://youtu.be/0LPDgc9Q8yI
दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे
वर्ना कहीं तक़दीर तमाशा न बना दे
वर्ना कहीं तक़दीर तमाशा न बना दे
ऐ देखने वालो मुझे हँस हँस के न देखो
तुम को भी मोहब्बत कहीं मुझ सा न बना दे
मैं ढूँढ रहा हूँ मिरी वो शम्अ कहाँ है
जो बज़्म की हर चीज़ को परवाना बना दे
आख़िर कोई सूरत भी तो हो ख़ाना-ए-दिल की
काबा नहीं बनता है तो बुत-ख़ाना बना दे
'बहज़ाद' हर इक गाम पे इक सज्दा-ए-मस्ती
हर ज़र्रे को संग-ए-दर-ए-जानाना बना दे
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