https://youtu.be/nk_vqliI5wU?si=YvC3Uu8ZqNoS6Kp
मैं तो सांवरे के रंग राची।
साजि सिंगार बांधि पग घूंघरू, लोक-लाज तजि नाची।।
गई कुमति, लई साधुकी संगति, भगत रूप भइ सांची।
गाय गाय हरि के गुण निसदिन,कालव्यालसूं बांची।।
उण बिन सब जग खारो लागत, और बात सब कांची।
मीरा श्रीगिरधरन लालसूं, भगति रसीली जांची।।