बुधवार, 5 अगस्त 2026

जोई-जोई प्यारौ करै, सोई मोहि भावै.../ श्री हित चौरासी – पद १

https://youtu.be/4khE2AKeAGI  


प्रस्तुत है श्री हित चौरासी का प्रथम पद — "जोई-जोई प्यारौ करै"। यह श्री हित हरिवंश महाप्रभु की दिव्य रसपूर्ण वाणी का मंगलाचरण स्वरूप प्रथम पद है। इस पद में श्रीजी और प्रियतम के मधुर, निष्कपट एवं अनन्य प्रेम का अत्यंत कोमल वर्णन किया गया है। भक्त और भगवान के मध्य प्रेम की सर्वोच्च अवस्था का यह पद श्री राधा वल्लभ सम्प्रदाय की माधुर्य-रस परम्परा का अनुपम रत्न है।

इस पद में श्री हित हरिवंश महाप्रभु बताते हैं कि जो कुछ प्रियतम को प्रिय है वही भक्त को भी प्रिय है। भक्त का मन, प्राण, प्रेम और सम्पूर्ण अस्तित्व केवल युगल सरकार में समर्पित हो जाता है। "मेरे तन मन प्राण हूँ ते प्रीतम प्रिय" तथा "अपने कोटिक प्राण प्रीतम मोसों हारे" जैसी पंक्तियाँ दिव्य प्रेम की चरम अवस्था का दर्शन कराती हैं। अंतिम चरण में श्री राधा-कृष्ण की साँवल-गौर युगल छवि को जल की तरंगों से भी अधिक अभिन्न बताया गया है।

श्री हित चौरासी – पद १

जोई-जोई प्यारौ करै,
सोई मोहि भावै॥

भावै मोहि जोई,
सोई-सोई करैं प्यारे॥

मोकों तौ भावती ठौर,
प्यारे के नैंनन में॥

प्यारौ भयौ चाहै,
मेरे नैंनन के तारे॥

मेरे तन मन प्राण हूँ ते,
प्रीतम प्रिय॥

अपने कोटिक प्राण,
प्रीतम मोसों हारे॥

जै श्री हित हरिवंश,
हंस-हंसिनी साँवल-गौर॥

कहौ कौन करै,
जल-तरंगनि न्यारे॥

मंगलवार, 4 अगस्त 2026

कोई गाता मैं सो जाता.../ रचना : हरिवंश राय बच्चन / गायक : येसुदास

https://youtu.be/uuYZ39Unars  


संगीत : जय देव
फिल्म : आलाप (1977)

कोई गाता मैं सो जाता, कोई गाता मैं सो जाता
कोई गाता

संसृति के विस्तृत सागर पर, सपनो की नौका के अंदर
सुख दुख की लहरो पर उठ गिर, बहता जाता, मैं सो जाता
कोई गाता मैं सो जाता कोई गाता

आँखो मे भरकर प्यार अमर, आशीष हथेली मे भर कर
कोई मेरा सर गोदी मे रख, सहलाता, मैं सो जाता
कोई गाता मैं सो जाता कोई गाता

मेरे जीवन का खारा जल, मेरे जीवन का हालाहल
मेरे मेरे जीवन का खारा जल, मेरे जीवन का हालाहल
कोई अपने स्वर मे मधुमयकर बरसाता, मे सो जाता
कोई गाता मैं सो जाता कोई गाता मैं सो जाता

मैं सो जाता मैं सो जाता, कोई गाता मैं सो जाता

सोमवार, 3 अगस्त 2026

वेढा वेढा रे पंढरी.../ शब्द - संत तुकाराम / गायक - विश्वजीत बोरवणकर

https://youtu.be/o8vEdhKHMms 


वेढा वेढा रे पंढरी। मोर्चे लावा भीमातीरी ।।१।।
चला चला संतजन। करू देवासी भांडण।।२।।
लुटा लुटा पंढरपूर। धरा रखुमाईचा वर ।।।।
तुका म्हणे चला चला। घाव निशाणी घातका ।।४।।

मंगलवार, 28 जुलाई 2026

आपकी याद आती रही रात भर.../ शायर : मखदूम मोहिउद्दीन / गायन : छाया गांगुली

https://youtu.be/IHS8QBdGPlU  



आप की याद आती रही रात भर
चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर

रात भर दर्द की शम्अ जलती रही
ग़म की लौ थरथराती रही रात भर

बाँसुरी की सुरीली सुहानी सदा
याद बन बन के आती रही रात भर

याद के चाँद दिल में उतरते रहे
चाँदनी जगमगाती रही रात भर

कोई दीवाना गलियों में फिरता रहा
कोई आवाज़ आती रही रात भर

रविवार, 26 जुलाई 2026

जगन्नाथाष्टकं... / श्रीमत् शंकराचार्यविरचितं / गायन : सुनन्दा पटनायक

https://youtu.be/3CHPZwy  


कदाचित् कालिन्दी तट विपिन सङ्गीत तरलो
मुदाभीरी नारी वदन कमला स्वाद मधुपः
रमा शम्भु ब्रह्मामरपति गणेशार्चित पदो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥१॥

भुजे सव्ये वेणुं शिरसि शिखिपिच्छं कटितटे
दुकूलं नेत्रान्ते सहचर-कटाक्षं विदधते ।
सदा श्रीमद्‍-वृन्दावन-वसति-लीला-परिचयो
जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥२॥

महाम्भोधेस्तीरे कनक रुचिरे नील शिखरे
वसन् प्रासादान्तः सहज बलभद्रेण बलिना ।
सुभद्रा मध्यस्थः सकलसुर सेवावसरदो
जगन्नाथः स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥३॥

कृपा पारावारः सजल जलद श्रेणिरुचिरो
रमा वाणी रामः स्फुरद् अमल पङ्केरुहमुखः ।
सुरेन्द्रैर् आराध्यः श्रुतिगण शिखा गीत चरितो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥४॥

रथारूढो गच्छन् पथि मिलित भूदेव पटलैः
स्तुति प्रादुर्भावम् प्रतिपदमुपाकर्ण्य सदयः ।
दया सिन्धुर्बन्धुः सकल जगतां सिन्धु सुतया
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥५॥

परंब्रह्मापीड़ः कुवलय-दलोत्‍फुल्ल-नयनो
निवासी नीलाद्रौ निहित-चरणोऽनन्त-शिरसि ।
रसानन्दी राधा-सरस-वपुरालिङ्गन-सुखो
जगन्नाथः स्वामी नयन-पथगामी भवतु मे ॥६॥

न वै याचे राज्यं न च कनक माणिक्य विभवं
न याचेऽहं रम्यां सकल जन काम्यां वरवधूम् ।
सदा काले काले प्रमथ पतिना गीतचरितो
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥७॥

हर त्वं संसारं द्रुततरम् असारं सुरपते
हर त्वं पापानां विततिम् अपरां यादवपते ।
अहो दीनेऽनाथे निहित चरणो निश्चितमिदं
जगन्नाथः स्वामी नयन पथ गामी भवतु मे ॥८॥

जगन्नाथाष्टकं पुन्यं यः पठेत् प्रयतः शुचिः ।
सर्वपाप विशुद्धात्मा विष्णुलोकं स गच्छति ॥९॥

॥ इति श्रीमत् शंकराचार्यविरचितं जगन्नाथाष्टकं संपूर्णम् ॥

शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

कर कटावरी तुळसीच्या माळा। ऐसे रूप डोळा दावी हरी.../ अभंग / सन्त तुकाराम महाराज / गायन : दीपिका भिडे भागवत

https://youtu.be/nw6r-sJMvuM. 

कर कटावरी तुळसीच्या माळा। ऐसे रूप डोळा दावी हरी॥
ठेविले चरण दोन्ही विटेवरी। ऐसे रूप हरी दावी डोळा॥
कटी पितांबर कास मिरवली। दाखवी वहिली ऐसी मूर्ती॥
गरुडपारावरी उभा राहिलासी। आठवे मानसी तेचि रूप॥
झुरोनि पांझरा होऊ पाहे आता। येई पंढरीनाथा भेटावया॥
तुका म्हणे माझी पुरवावी आस। विनंती उदास करू नये॥


अर्थ  :

हे हरी, कमरपर हाथ रखे और गले में तुलसीकी माला पहने ऐसा रूप मैं अपनी आँखों से देखूं। और हे हरी, दोनो चरण ईंट पर रखे हुए ऐसा रूप मैं इन आँखों से देखूं। त्वरित, अपनी कमर में पीतांबर पहनी मूर्ती मुझे दिखाओ। गरुडपर खडे हुए आपका रूप मैं मन में याद कर रहा हूँ। आपकी इस मूर्ती को देखने की तीव्र इच्छा की वजह से मैं अब अस्थिपंजर का सा हो गया हूँ। अब तो, हे पंढरीनाथ, मेरी इच्छापूर्ती करो। मेरी विनती को न दुत्कारो। 

शनिवार, 18 जुलाई 2026

भरि नगरी मे शोर.../ मैथिल लोक गीत / रचना : रवीन्द्र नाथ ठाकुर / गायन : सुमन कल्याणपुर

https://youtu.be/zLRkBPfDH4w


भरि नगरी मे शोर 
बउआ मामी तोहर गोर 
मामा चाँद सन !

नानी-नाना दूनो तोहर 
खाली गाल बजाबय
बाबी तोहर गंगा तन छौ
बाबा बनल हिमालय 
अरे !
मौसा तोहर चोर 
मौसी मुंहक बड्डजोर 
मैया पान सन !

थैया-थैया चलू कन्हैया 
थैया-थैया ता-ता थैया
थैया-थैया चलू कन्हैया
जहिना भोर बसाय 
धरती मैया सब दुःख हरनि
खसबले कोनो बाय
बउआ मोती सन इ लोर
बीछत खाली आंचल मोर
अपने प्रान सन !

अपना कुल के लाल कमल 
त काकिक सूगा-मैना
एहि दुखिया के हंसी-खुसी
आ बापक नइ हय खिलौना
कहु बाबू
तो आसि के चकमक भोर 
हंसिबे खोलिके दूनू ठोर 
कूटल धान सन !