रविवार, 23 अगस्त 2026

ये बातें झूटी बातें हैं.../ शायर : इब्न-ए-इंशा / गायन : ग़ुलाम अली

https://youtu.be/2OOcNnWwYPs  


ये बातें झूटी बातें हैं ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं

हैं लाखों रोग ज़माने में क्यूँ इश्क़ है रुस्वा बे-चारा
हैं और भी वजहें वहशत की इंसान को रखतीं दुखियारा
हाँ बे-कल बे-कल रहता है हो पीत में जिस ने जी हारा
पर शाम से ले कर सुब्ह तलक यूँ कौन फिरेगा आवारा

ये बातें झूटी बातें ये लोगों ने फैलाईं हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं

ये बात अजीब सुनाते हो वो दुनिया से बे-आस हुए
इक नाम सुना और ग़श खाया इक ज़िक्र पे आप उदास हुए
वो इल्म में अफ़लातून सुने वो शेर में तुलसीदास हुए
वो तीस बरस के होते हैं वो बी-ए एम-ए पास हुए

ये बातें झूटी बातें हैं ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं

गर इश्क़ किया है तब क्या है क्यूँ शाद नहीं आबाद नहीं
जो जान लिए बिन टल न सके ये ऐसी भी उफ़्ताद नहीं
ये बात तो तुम भी मानोगे वो 'क़ैस' नहीं फ़रहाद नहीं
क्या हिज्र का दारू मुश्किल है क्या वस्ल के नुस्ख़े याद नहीं

ये बातें झूटी बातें हैं ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं

वो लड़की अच्छी लड़की है तुम नाम न लो हम जान गए
वो जिस के लम्बे गेसू हैं पहचान गए पहचान गए
हाँ साथ हमारे 'इंशा' भी इस घर में थे मेहमान गए
पर उस से तो कुछ बात न की अंजान रहे अंजान गए

ये बातें झूटी बातें हैं ये लोगों ने फैलाई हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं

जो हम से कहो हम करते हैं क्या 'इंशा' को समझाना है
उस लड़की से भी कह लेंगे गो अब कुछ और ज़माना है
या छोड़ें या तकमील करें ये इश्क़ है या अफ़साना है
ये कैसा गोरख-धंदा है ये कैसा ताना-बाना है

ये बातें कैसी बातें हैं जो लोगों ने फैलाई हैं
तुम 'इंशा'-जी का नाम न लो क्या 'इंशा'-जी सौदाई हैं

शनिवार, 22 अगस्त 2026

तेरी काया नगर का कुण धणी.../ रचना : सन्त कबीर / गायन : शबनम वीरमानी

https://youtu.be/Z3H7NmiNtnc  


तेरी काया नगर का कुण धणी, मारग में लूटे पांच जणी
पांच जनी, पच्चीस जनी, मारग में लूटे पांच जणी

आशा तृष्णा नदियां भारी, बह गये संत बड़ा ब्रह्मचारी, हरे हरे
जो उबरया जो शरण तुम्हारी, चमक रही है सेलाणी

बन में लुट गये मुनीजन नंगा, डस गयी ममता उल्टा टांगा, 
हरे-हरे

जाके कान गुरु नहीं लागे, सृंगी ऋषी पर आन पड़ी
साधू संत मिल रोके घांटा, साधु चढ़ ग्या उल्टी बाटा, 
हरे-हरे

घेर लिया सब औघट घाटा, पार उतारो आप धणी
ईन्द्र बिगाड़ी गौतम नारी, कुबजा भई गया कृष्ण मुरारी, 
हरे-हरे

राधा रुखमा बिलकति हारी, राम चन्द्र पर आन बणी
शंकर लुट गये नेजाधारी, रईयत उनकी कौन बिचारी, 
हरे-हरे

भूल रही कर मन की मारी, तीन युग झुक रही तीन जणी
साहेब कबीर गुरु दीन्हा हेला, धर्मदास सुनो निज चेला, 
हरे-हरे

लंबा मारग पंथ दुहेला, सिमरो सिरजन हार धनी

शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

मेरा तो क्या ख़ुशी में रहूँ या मलाल में.../ शायर : नज़ीर मोहम्मद आरज़ू जयपुरी / गायन : हीरा देवी मिश्रा

https://youtu.be/toxvr57T1U0. 

मेरा तो क्या ख़ुशी में रहूँ या मलाल में
तुम ख़ुश रहो जहाँ भी रहो जिस ख़याल में


हूँ महव मैं तो ऐसा किसी के ख़याल में
कुछ इम्तियाज़ ही नहीं हिज्र-ओ-विसाल में


तेरे ख़याल ही की बदौलत है ज़िंदगी
तू है तो इक जहान है मेरे ख़याल में


हाइल अगर हज़ार हों पर्दे तो कुछ नहीं
तुम हो मिरी निगाह में दिल में ख़याल में


होता रहे करम जो यूँही ऐ ख़याल-ए-यार
लग़्ज़िश न हो कभी मिरे पाए-ए-ख़्याल में


है तू तो हर घड़ी मिरी आँखों के सामने
आता हूँ मैं भी क्या कभी तेरे ख़याल में


शेर-ओ-सुख़न की 'आरज़ू' अब दाद क्या मिले
ज़ौक़-ए-सुख़न ही जब नहीं अहल-ए-कमाल में

गुरुवार, 20 अगस्त 2026

दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे.../ शायर : बहज़ाद लखनवी / गायन : निर्मला देवी

https://youtu.be/0LPDgc9Q8yI 


दीवाना बनाना है तो दीवाना बना दे
वर्ना कहीं तक़दीर तमाशा न बना दे

ऐ देखने वालो मुझे हँस हँस के न देखो
तुम को भी मोहब्बत कहीं मुझ सा न बना दे

मैं ढूँढ रहा हूँ मिरी वो शम्अ कहाँ है
जो बज़्म की हर चीज़ को परवाना बना दे

आख़िर कोई सूरत भी तो हो ख़ाना-ए-दिल की
काबा नहीं बनता है तो बुत-ख़ाना बना दे

'बहज़ाद' हर इक गाम पे इक सज्दा-ए-मस्ती
हर ज़र्रे को संग-ए-दर-ए-जानाना बना दे

बुधवार, 19 अगस्त 2026

देखो माई ये बड़भागी मोर.../ रचना : भक्त सूरदास / गायन : मुदिता एवं रुचिरा जमरिया

https://youtu.be/hr0MyKc616U  


देखो माई ये बड़भागी मोर।
जिनकी पंख को मुकुट बनत है, शिर धरें नंदकिशोर॥१॥

ये बडभागी नंद यशोदा, पुन्य किये झकझोर।
वृंदावन हम क्यों न भई रज लागत पग की कोर॥२॥

ब्रह्मदिक सनकादिक नारद, ठाढ़े हैं कर जोर।
सूरदास संतन को सरबस देखियत माखन चोर॥३॥

सोमवार, 17 अगस्त 2026

उमड़ घुमड़ घन सावन आये.../ रचना : महाप्राण सूर्य कान्त त्रिपाठी 'निराला' / गायन : डाॅ शरद मणि त्रिपाठी

https://youtu.be/_plJmt8KJI0  


उमड़-घुमड़-घन
सावन आये।
मन-मन के
मनभावन आये ।

मोर शोर करते हैं वन में,
नाच रहे हैं फिर निर्जन में,
दादुर की रट भी छन-छन में,
विपुल-बलाक की धावन आये ।

बूंदों की रिमझिम फुहार है,
पवन-अवनि, फिर-फिर बुहार है,
खगकुल की पुलकित गुहार है,
पुर के पाहुन पावन आये।

रविवार, 16 अगस्त 2026

आँसू किसी का देख के बीमार मर गया.../ शायर : क़मर जलालवी / गायन : ग़ुलशन आरा सईद

https://youtu.be/NgjefMWpdfI?si=sOBtvYMsTVRk8PAW


आँसू किसी का देख कि बीमार मर गया
जाम-ए-हयात एक ही क़तरे में भर गया

छोड़ो वफ़ा का नाम वफ़ादार मर गया
तुम जिस हवा में हो वो ज़माना गुज़र गया

सय्याद देख ली कशिश-ए-मौसम-ए-बहार 
उड़ उड़ के बाग़ में मिरा एक एक पर गया

देखा न तुम ने आँख उठा कर भी बज़्म में
आँसू तो मैं न था जो नज़र से उतर गया

वक़्त आ गया है यार के वा'दे का ऐ 'क़मर'
देखो वो आसमान सितारों से भर गया