गुरुवार, 9 जुलाई 2026

हंझूआं दा भाड़ा.../ भाषा : पंजाबी / कवि : शिव कुमार बटालवी / गायन : महेन्द्र कपूर

https://youtu.be/P9rm7PcbnQY  

तैनूं दिआं हंझूआं दा भाड़ा,
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


भट्ठी वालीए चम्बे दीए डालीए
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


हो ग्या कुवेला मैनूं
ढल गईआं छावां नी
बेलिआं 'चों मुड़ गईआं
मझ्झियां ते गावां नी
पायआ चिड़ियां ने चीक-चेहाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


तैनूं दिआं हंझूआं दा भाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


छेती छेती करीं
मैं ते जाना बड़ी दूर नी
जिथे मेरे हाणियां दा
टुर ग्या पूर नी
योस पिंड दा सुणींदै राह माड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


तैनूं दिआं हंझूआं दा भाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


मेरी वारी पत्त्यां दी
पंड सिल्ल्हिी हो गई
मिट्टी दी कड़ाही तेरी
काहनूं पिल्ली हो गई
तेरे सेक नूं कीह वज्ज्या दुगाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


तैनूं दिआं हंझूआं दा भाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


लप्प कु ए चुंग मेरी
मैनूं पहलां टोर नी
कच्चे कच्चे रक्ख ना नी
रोढ़ थोढ़े होर नी
करां मिन्नतां मुका दे नी पुआड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


तैनूं दिआं हंझूआं दा भाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


सौं गईआं हवावां रो रो
कर विरलाप नी
तार्यां नूं चढ़ ग्या
मट्ठा मट्ठा ताप नी
जंञ साहवां दी दा रुस्स ग्या लाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।


तैनूं दिआं हंझूआं दा भाड़ा
नी पीड़ां दा परागा भुन्न दे
भट्ठी वालीए।

बुधवार, 8 जुलाई 2026

क्या है जो क़र्ज़-ए-शहर-ए-जाँ आज अदा हो या न हो.../ शायर : पीरज़ादा क़ासिम

https://youtu.be/WSUn45v_fGo  


क्या है जो क़र्ज़-ए-शहर-ए-जाँ आज अदा हो या न हो
आग लगी हो या नहीं ख़ून बहा हो या न हो

मेरी तो किश्त-ए-जाँ में आज ज़ख़्म ही ज़ख़्म खिल उठे
अब मुझे क्या कि सहन में फूल खिला हो या न हो

‘अर्सा-ए-शौक़ में नहीं फ़ुर्सत-ए-पेश-ओ-पस का वहम
ज़ख़्म-तलब रहेंगे हम ज़ख़्म मिला हो या न हो

हम ने तो माजरा-ए-ग़म बर-सर-ए-‘आम कह दिया
अश्क बहे हों या नहीं शोर उठा हो या न हो

उस को तो ताज़ा-कारी-ओ-ज़ख़्म-गरी का शौक़ है
ज़ख़्म दबे हों या नहीं दर्द थमा हो या न हो

महरम-ए-राज़ है हवा फ़ाश है सारा माजरा
उस ने कहा हो या नहीं हम ने सुना हो या न हो

उस के तो है नसीब में शब-नज़री-ओ-जाँ-कनी
भड़के है ख़ुद चराग़-ए-शौक़ तेज़ हवा हो या न हो

हम तो फ़रेब-कारी-ए-शब को बयान कर गए
अब ये नसीब-ए-शहर है जाग उठा हो या न हो

उस की गली से आज तो गुज़रे थे सर-ब-दस्त हम
उस ने ब-यक निगाह-ए-शौक़ देख लिया हो या न हो

पीरज़ादा क़ासिम रज़ा सिद्दीकी

जन्म 8 फरवरी 1943), एक पाकिस्तानी विद्वान, 
लेखक, कवि, वैज्ञानिक और शिक्षाविद् हैं। 
उन्होंने कई विश्वविद्यालयों के कुलपति के रूप में 
कार्य किया है।

रविवार, 5 जुलाई 2026

नारायण ते नमो नमो.../ सन्त श्री अन्नमाचार्य कृति / भाषा : संस्कृत / गायन : भावप्रिया

https://youtu.be/GAXzvofZt7E  


नारायण ते नमो नमो 
भव नारद सन्नुत नमो नमो ।।

मुरहर नगधर मुकुंद माधव
गरुडगमन पंकजनाभ
परमपुरुष भव-बंध विमोचन 
नर मृग शरीर नमो नमो ।।

जलधि शयन रविचंद्रविलोचन
जलरुह भवनुत चरणयुग
बलिबंधन गोपीजन वल्लभ
नळिनोदर ते नमो नमो ।।

आदिदेव सकलागम पूजित
यादव कुल मोहन रूप
वेदोद्धर श्रीवॆंकटनायक
नादप्रिय ते नमो नमो ।।

शनिवार, 4 जुलाई 2026

मा रा ब-ग़मज़: कुश्त-ओ-क़ज़ा रा बहानः साख़्त.../ मिर्ज़ा मुहम्मद हुसैन 'क़तील' (1757-1818) / गायन : इक़बाल बानो

https://youtu.be/MxVfvYvWGVA?si=Miz_kIhZW99NsQt6


मा रा ब-ग़मज़: कुश्त-ओ-क़ज़ा रा बहानः साख़्त
ख़ुद सू-ए-मा न-दीद-ओ-हया रा बहानः साख़्त

उस ने मुझे ग़मज़े से मार डाला और क़ज़ा का बहाना बनाया
उस ने मेरी तरफ नहीं देखा और हया का बहाना बनाया

दस्ते ब-दोश-ए-ग़ैर निहाद अज़ रह-ए-करम
मा रा चू दीद लग़्ज़िश-ए-पा रा बहानः साख़्त

उस ने मोहब्बत से दूसरे के कंधे पर हाथ रखा
लेकिन जब उसने मुझे देखा तो लड़खड़ाने का बहाना बनाया

रफ़्तम ब-मस्जिदे पय-ए-नज़्ज़ार:-ए-रुख़श
दस्ते बरू कशीद व दुआ' रा बहानः साख़्त

मैं उसके चेहरे के दीदार के लिए मस्जिद गया
उस ने अपने चेहरे पर हाथ रख लिया और दुआ का बहाना बनाया

आमद बरून-ए-ख़ानः चूँ आवाज़-ए-मा शनीद
बख़्शीदन-ए-निवाल: गदा रा बहानः साख़्त

जब उसने मेरी आवाज़ सुनी घर से बाहर आ गया
इस बार उसने फ़क़ीर को खाना देने का बहाना बनाया

ख़ून-ए-'क़तील'-ए-बे-सर-ओ-पा रा ब-पा-ए-ख़्वेश
मालीद आँ निगार व हिना रा बहानः साख़्त

उस ने बे-सर-ओ-सामान 'क़तील' के ख़ून को
अपने क़दमों में मल लिया और हिना का बहाना बनाया

शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

कंडु धन्यनादॆ गुरुगळ – कण्णारॆ ना.../ भाषा : कन्नड़ / श्री मोहन दासारु कृति / गायन : विभा हेगडे

https://youtu.be/2PrGnfxUTvI?si=pLymM5ue2hJYXh0T


कंडु धन्यनादॆ गुरुगळ – कण्णारॆ ना
कंडु धन्यनादॆ ई गुरुगळ   ।। प ।।

तुंगातटदि बंदु निंत
पंगु बधिराद्यंग हीनर
अंगगैसि सलहुवा – नर
सिंगनंघ्रि भजकरिवर      ।।१।।

गुरुवर सुगुणेंद्ररिंद
परिपरियलि सेवॆगॊळुत
वरमंत्रालयपुरदि मॆरॆव
परिमळाख्य ग्रंथकर्तर      ।।२।।

सो‍हं ऎन्नदॆ हरिय दा
सोहं ऎन्नलु ऒलिदु विजय
मोहन विठ्ठलन्न परम
स्नेहदिंद तोरुववर         ।।३।।

Meaning (Stanza by Stanza)

Pallavi (Refrain) :

Kandu dhanyanade gurugala kannaare naa kandu dhanyanade

I am deeply blessed and fulfilled to have seen you with my own eyes, my revered Guru.

Stanza 1 :

Tungaatathadi bandu ninta pangu badhiraadyanga heenara
Angagaisi salahuvaa - nara singananghri bhajkarivara

Standing on the banks of the Tungabhadra River, you bless and heal those who are physically challenged, blind, deaf, and helpless. You are the supreme protector for those who worship the lotus feet of Lord Narasimha. 

Stanza 2 :

Guruvara Sugunendrarinda paripariyali sevegolutha
Vara Mantralayapuradi mereva Parimalaakhya granthakarthara

Serving the esteemed Guru in various ways, you reside in the blessed town of Mantralaya. You are the author of the great scriptures known as Parimala. 

Stanza 3 :

Soham ennade hariya da soham ennalu olidu Vijaya
Mohana Vittalanna parama...

Although we do not realize our true divine nature, when we surrender and chant "Soham" (I am He/that divine soul), Lord Vijaya Mohana Vittala is pleased.

मंगलवार, 30 जून 2026

हूव तरुवर मनॆगॆ हुल्ल तरुव.../ भाषा : कन्नड़ / सन्त पुरन्दर दास कृति / गायन : श्रीमती जयवन्ती देवी

https://youtu.be/LU8i4EQMoUE 


हूव तरुवर मनॆगॆ हुल्ल तरुव
अव रमण इवगिल्लगरुव ।।प।।

English Translation :

He goes to the houses of those who bring flowers and those who bring grass.
Oh, the consort of Lakshmi (Lord Krishna), He has absolutely no ego or pride!

ऒंदु दळ श्रीतुळसि बिंदु गंगोदकवु
इंदिरा रमणगॆ अर्पितवॆनुत
ऒंदे मनसिनलि सिंधुशयनॆनुत
ऎंदॆंदिगू वासिपनु मंदिरदॊळगॆ ।।१।।

English Translation :

If one offers just a single Tulsi leaf and a drop of holy Ganga water to the Lord of Indira (Lakshmi), and sincerely calls Him the one who reclines on the ocean (Lord Vishnu/Mukunda) with a single-minded devotion, He will forever reside in the devotee's heart.

परिपरिय पुष्पगळ परमात्मगर्पिसि
परिपूर्ण तानॆंदु पूजॆयनु माडि
सरसिजाक्षनु तन्न सकल स्वातंत्र्यदलि
सरि भाग्य कॊडुव तन्नरमनॆय ऒळगॆ ।।२।।
पांडवर मनॆयल्लि कुदुरॆगळ ता तॊळॆदु
पुंडरीकाक्षनु हुल्लनु तिनिसि
अंडज वाहन पुरंदर विठ्ठल
तॊंडरिगॆ तॊंडनागि संचरिसुतिहनु ।।३।।

Charana 2 & 3 ( English Translation)

The remaining verses, as documented in source, describe how the Lord accepts various flower offerings with grace and rewards devotees with a place in his abode. The song concludes by highlighting Krishna's role as a humble servant to his true followers, citing his actions for the Pandavas.

सोमवार, 29 जून 2026

मथुरा नगर की डगर मे चल्यो जात पायो है हरि हीरा.../ स्वर : अ.सौ. भामिनी बागरोदी शर्मा (कोटा)

https://youtu.be/bZnDjlEevoE 


मथुरा नगर की डगर मे चल्यो जात पायो है हरि हीरा ।।
सुन री भटु लटु भयो डोलत, गोकुल गाम को अहीरा ।।१।।

बन ते जु आवत बेनु बजावत, बंसीबट यमुना के तीरा ।।
"परमानंद" दास को ठाकुर, हँस दीनो मुख बीरा ।।२।।