सोमवार, 27 अप्रैल 2026

ऐसा लगता है जिन्दगी तुम हो.../ शायर : बशीर बद्र / गायन : काव्या लिमये

https://youtu.be/nUcSdta05Q


ऐसा लगता है जिन्दगी तुम हो
अजनबी कैसे अजनबी तुम हो

अब कोई आरज़ू नहीं बाक़ी
जुस्तजू मेरी आख़री तुम हो

(आरज़ू = इच्छा), (जुस्तजू = तलाश, खोज)

मैं ज़मीं पर घना अँधेरा हूँ
आसमानों की चांदनी तुम हो

दोस्तों से वफ़ा की उम्मीदें
किस ज़माने के आदमी तुम हो

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