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शुक्रवार, 18 मार्च 2011

झूम उठ्यो सगरो ब्रज मंडल...



कवित्त 

-अरुण मिश्र 

झूम  उठ्यो  सगरो  ब्रज  मंडल, 
होरी  कै  धूम - धमाल  भयो  है।
कारे-कन्हैया   पे   दूजो   है  रंग  
चढ़्यो, यहु खूब कमाल भयो है।
राधा  के   रंग  में   स्याम   रंगे, 
अरु राधेहु कै अस हाल  भयो है।
कान्हा  के  हाथ   लगे  न  अबै, 
तबहूँ  कस गाल गुलाल भयो है।।
                    *

गुरुवार, 17 मार्च 2011

हे री! सखी...




कवित्त

-अरुण  मिश्र

हे री! सखी, इन ऑखिन सम्मुख, 
होरी  तो,   सोरह  साल   जर्-यो है। 
पै री! सखी, यहि बार की होरी,न 
पूछौ  कुछौ, जस  हाल   कर्-यो है।
चैन उड़्यो दिन कौ,निसि नींद न, 
ऑखिन  डोरो  जु  लाल  पर्-यो है।
पूछैं  सबै,  तौ  बहानो  करौं, उड़ि 
ऑखिन  आय  गुलाल   पर्-यो है।।
                    *