हे ! हे !... रामजी पधारे, श्री रामजी पधारे रामजी पधारे, श्री रामजी पधारे
हे ! देखो अवध नगरिया में रामजी पधारे हे ! देखो सुन्दर नगरिया में रामजी पधारे हाँ ! देखो अयोध्या नगरिया में रामजी पधारे
नाचो गाओ सब मंगल गावो जय श्री राम का नारा लगावो हाँ देखो, हाँ देखो, हाँ देखो मोहनी मूरतिया, रामजी पधारे
राम जी के संग में विराजें सीता माई सीता राम संग में लक्ष्मण भाई सेवा में, सेवा में हनुमान गोसाईं रामजी पधारे, श्री रामजी पधारे
ब्रह्म जी ने वेद गाये नारदजी की वीणा बोले डमा के डम-डम, डमा के डम-डम शिवजी का डमरू बाजे हाँ बाजे, हाँ बाजे, श्याम की मुरलिया रामजी पधारे, श्री रामजी पधारे
रामजी पधारे, श्री रामजी पधारे रामजी, मेरे रामजी रामजी पधारे, श्री रामजी पधारे
देखो अयोध्या नगरियामें रामजी पधारे देखो अवध नगरिया में रामजी पधारे देखो सुन्दर नगरिया में रामजी पधारे देखो अयोध्या नगरिया में रामजी पधारे
यह स्तुति भगवान शिव द्वारा प्रभु राम के अयोध्या वापस आपने के उपलक्ष्य में गाई गई है। जिसके अंतर्गत सभी ऋषिगण, गुरु, कुटुम्बी एवं अयोध्या वासी कैसे अधीर हो कर अपने प्रभु रूप राजा राम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। तथा श्री राम के आगमन पर कैसे सभी आनन्दित हैं, श्रीराम अपने महल को चलते है, आकाश से फूलों की वृष्टि होरही है। सब का वर्णन है इस स्तुति में...
॥ दोहा ॥ बार बार बर मागऊँ हरषी देहु श्रीरंग। पद सरोज अनपायनी भगति सदा सतसंग॥ बरनि उमापति राम गुन हरषि गए कैलास। तब प्रभु कपिन्ह दिवाए सब बिधि सुखप्रद बास॥