रविवार, 14 जनवरी 2024

ज़िंदगी क्या है इक सफ़र के सिवा.../ सूफ़ी (ग़ुलाम मुस्तफ़ा) 'तबस्सुम' / गायन : सोहिनी सिंघा मजूमदार

 https://youtu.be/gPL6dOlxhSM

ज़िंदगी क्या है इक सफ़र के सिवा

एक दुश्वार रहगुज़र के सिवा

क्या मिला तिश्ना-ए-मोहब्बत को

एक महरूम सी नज़र के सिवा

इश्क़ के दर्द की दवा क्या है

सब समझते हैं चारा-गर के सिवा

कुछ नहीं ग़म-गुसारी-ए-अहबाब

एहतिमाम-ए-ग़म-ए-दिगर के सिवा

कितनी तन्हा थीं अक़्ल की राहें

कोई भी था चारा-गर के सिवा

दौलत-ए-सज्दा हो सकी नसीब

और भी दर थे तेरे दर के सिवा

कुछ नहीं है फ़ुसूँ-तराज़ी-ए-हुस्न

इश्क़ की शोख़ी-ए-नज़र के सिवा


शनिवार, 13 जनवरी 2024

श्री राम जी पधारे.../ गायन : उस्मान मीर

 https://youtu.be/qDTFWxc0gZk


जय सिया राम

हे ! हे !...
रामजी पधारे, श्री रामजी पधारे
रामजी पधारे, श्री रामजी पधारे

हे ! देखो अवध नगरिया में रामजी पधारे
हे ! देखो सुन्दर नगरिया में रामजी पधारे
हाँ ! देखो अयोध्या नगरिया में रामजी पधारे

नाचो गाओ सब मंगल गावो
जय श्री राम का नारा लगावो
हाँ देखो, हाँ देखो, हाँ देखो
मोहनी मूरतिया, रामजी पधारे

राम जी के संग में विराजें सीता माई
सीता राम संग में लक्ष्मण भाई
सेवा में, सेवा में हनुमान गोसाईं
रामजी पधारे, श्री रामजी पधारे

ब्रह्म जी ने वेद गाये
नारदजी की वीणा बोले
डमा के डम-डम, डमा के डम-डम
शिवजी का डमरू बाजे
हाँ बाजे, हाँ बाजे, श्याम की मुरलिया
रामजी पधारे, श्री रामजी पधारे

रामजी पधारे, श्री रामजी पधारे
रामजी, मेरे रामजी
रामजी पधारे, श्री रामजी पधारे

देखो अयोध्या नगरियामें रामजी पधारे
देखो अवध नगरिया में रामजी पधारे
देखो सुन्दर नगरिया में रामजी पधारे
देखो अयोध्या  नगरिया में रामजी पधारे

जय सिया राम !

शुक्रवार, 12 जनवरी 2024

गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कर.../ अल्लामा इक़बाल / गायन : फारिहा परवेज़

 https://youtu.be/3Xmv2oC31Cg?si=YggtmLQsZe78TRp- 

गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कर

होश ख़िरद शिकार कर क़ल्ब नज़र शिकार कर

इश्क़ भी हो हिजाब में हुस्न भी हो हिजाब में

या तो ख़ुद आश्कार हो या मुझे आश्कार कर

तू है मुहीत-ए-बे-कराँ मैं हूँ ज़रा सी आबजू

या मुझे हम-कनार कर या मुझे बे-कनार कर

मैं हूँ सदफ़ तो तेरे हाथ मेरे गुहर की आबरू

मैं हूँ ख़ज़फ़ तो तू मुझे गौहर-ए-शाहवार कर

नग़्मा-ए-नौ-बहार अगर मेरे नसीब में हो

उस दम-ए-नीम-सोज़ को ताइरक-ए-बहार कर

बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यूँ

कार-ए-जहाँ दराज़ है अब मिरा इंतिज़ार कर

रोज़-ए-हिसाब जब मिरा पेश हो दफ़्तर-ए-अमल

आप भी शर्मसार हो मुझ को भी शर्मसार कर

गुरुवार, 11 जनवरी 2024

जय राम रमा रमनं समनं.../ रचना : तुलसीदास / गायन : माधवी मधुकर झा

 https://youtu.be/_xDYHxCmO3k 


यह स्तुति भगवान शिव द्वारा प्रभु राम के अयोध्या वापस आपने के उपलक्ष्य में गाई गई है। 
जिसके अंतर्गत सभी ऋषिगण, गुरु, कुटुम्बी एवं अयोध्या वासी कैसे अधीर हो कर अपने 
प्रभु रूप राजा राम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। तथा श्री राम के आगमन पर कैसे सभी आनन्दित हैं, 
श्रीराम अपने महल को चलते है, आकाश से फूलों की वृष्टि होरही है। सब का वर्णन है इस स्तुति में...

॥ छन्द ॥
जय राम रमा रमनं समनं ।
भव ताप भयाकुल पाहि जनम ॥
अवधेस सुरेस रमेस बिभो ।
सरनागत मागत पाहि प्रभो ॥

राजा राम, राजा राम,

सीता राम,सीता राम ॥

दससीस बिनासन बीस भुजा ।

कृत दूरी महा महि भूरी रुजा ॥
रजनीचर बृंद पतंग रहे ।
सर पावक तेज प्रचंड दहे ॥

राजा राम, राजा राम,

सीता राम,सीता राम ॥

महि मंडल मंडन चारुतरं ।

धृत सायक चाप निषंग बरं ॥
मद मोह महा ममता रजनी ।
तम पुंज दिवाकर तेज अनी ॥

राजा राम, राजा राम,

सीता राम,सीता राम ॥

मनजात किरात निपात किए ।

मृग लोग कुभोग सरेन हिए ॥
हति नाथ अनाथनि पाहि हरे ।
बिषया बन पावँर भूली परे ॥

राजा राम, राजा राम,

सीता राम,सीता राम ॥

बहु रोग बियोगन्हि लोग हए ।

भवदंघ्री निरादर के फल ए ॥
भव सिन्धु अगाध परे नर ते ।
पद पंकज प्रेम न जे करते॥

राजा राम, राजा राम,

सीता राम,सीता राम ॥

अति दीन मलीन दुखी नितहीं ।

जिन्ह के पद पंकज प्रीती नहीं ॥
अवलंब भवंत कथा जिन्ह के ।
प्रिय संत अनंत सदा तिन्ह के ॥

राजा राम, राजा राम,

सीता राम,सीता राम ॥

नहीं राग न लोभ न मान मदा ।

तिन्ह के सम बैभव वा बिपदा ॥
एहि ते तव सेवक होत मुदा ।
मुनि त्यागत जोग भरोस सदा ॥

राजा राम, राजा राम,

सीता राम,सीता राम ॥

करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ ।

पड़ पंकज सेवत सुद्ध हिएँ ॥
सम मानि निरादर आदरही ।
सब संत सुखी बिचरंति मही ॥

राजा राम, राजा राम,

सीता राम,सीता राम ॥

मुनि मानस पंकज भृंग भजे ।

रघुबीर महा रंधीर अजे ॥
तव नाम जपामि नमामि हरी ।
भव रोग महागद मान अरी ॥

राजा राम, राजा राम,

सीता राम,सीता राम ॥

गुण सील कृपा परमायतनं ।

प्रणमामि निरंतर श्रीरमनं ॥
रघुनंद निकंदय द्वंद्वघनं ।
महिपाल बिलोकय दीन जनं ॥

राजा राम, राजा राम,

सीता राम,सीता राम ॥

॥ दोहा ॥
बार बार बर मागऊँ हरषी देहु श्रीरंग।
पद सरोज अनपायनी भगति सदा सतसंग॥
बरनि उमापति राम गुन हरषि गए कैलास।
तब प्रभु कपिन्ह दिवाए सब बिधि सुखप्रद बास॥