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बुधवार, 23 मार्च 2016

यूँ हवाओं में, घुल गई होली ......



Wishing You A Very Happy Holi


  होली...
                     
                        -अरुण मिश्र 

   यूँ हवाओं में,  घुल  गई होली।
रंग बरसे तो,  धुल  गई होली।
सारे आलम में, मस्तियाँ बिखरीं।
इक पिटारी सी,खुल गई होली।।    



बेल-बूटों सी,  है  कढ़ी  होली।
फ्रेम में मन के, है  मढ़ी  होली। 
रंग का इक तिलिस्म है, हर-सू।
सर पे जादू सी, है  चढ़ी होली।।

   

सीढ़ी दर सीढ़ी है,  उतरी  होली।
आके अब लान में,  पसरी  होली।
संग हवा के, गुलाल बन के उड़ी।
रंग में भीगी तो,   निखरी  होली।।

   

हाथ   यूँ   ही,   हिला  रही  होली।
खेल   मुझको,    खिला  रही  होली।
कितनी मुश्क़िल से, पहुँचा आंगन तक।
शायद  छत  पे,    बुला  रही  होली।।

    


   देखो हौले से,  आ  रही होली।
मेरे जी को,  लुभा  रही  होली।
उम्र तक को, धकेल कर  पीछे।
कानों में होली, गा रही,  होली।।

          

मीठी यादें,  जगा  रही  होली।
चैन मन का, भगा  रही  होली।
रंग की बारिशों,  न थम जाना।
आग दिल में, लगा  रही होली।।

      

ख़ुश्क  है ’औ कभी  पुरनम होली।
कभी शोला, कभी   शबनम होली।
रंग है, रस है,  रूप है, कि महक।
एक मौसम है,  कि  सरगम होली।।

      

प्यासी  आँखों  का,  ख़्वाब  है होली।
चप्पा- चप्पा,   गुलाब   है    होली।
लब पे आने से,  झिझकता जो सवाल।
उसका,   मीठा   जवाब   है   होली।।

     

फूली सरसों,  संवर  रही  होली।
आम बौरे,    निखर  रही  होली।
कोयलें    कूकीं,  पपीहे  पागल।
रस के झरने  सी झर रही होली।।

        

यूँ  मज़े  में,   शुमार   है   होली।
ज़ोश ,  मस्ती,   ख़ुमार,  है  होली।
इस बरस, कैश  जो किया सो किया।
बाकी   तुम  पर,  उधार  है होली।।

                         *
        

शुक्रवार, 6 मार्च 2015

गुरुवार, 5 मार्च 2015

बुधवार, 4 मार्च 2015

आओ मनायें होली .....















ज़ान-ओ-तन रंग में भीगे हों, भरा मन में उमंग 
यार   को   संग   में   ले   झूम   के   गायें   होली 

हो  ली,  जो होनी थी;  होनी   है  सो  आगे  होगी
फ़िक़्र   क्या  इनका  करें,   आओ   मनायें  होली

-अरुण मिश्र

 

रविवार, 1 मार्च 2015

होली की शुभकामनायें .....



आई रे फागुन रितु आई रे !...


-अरुण मिश्र

आई  रे!  फागुन रितु  आई रे!

पोर - पोर में , अंग - अंग में,


किस अनंग ने, अलख  जगाई रे!



        फूली   सरसों , फूली  अरहर।

        बौरे  बाग , आम के  मनहर।

        दहके   टेसू , महके   महुआ।

        चली फगुनहट स-र-र-र सरसर।।


नव वसन्त ने  ली  अँगड़ाई रे!

आई  रे!  फागुन रितु  आई रे!


        गेहूँ   -  जौ   झूमें    गदराये।
          
        चना - मटर सब  लट छितराये।
          
        अल्हड़  फलियां   बाट  जोहतीं
,              
        किस  पाहुन का, सुधि बिसराये??

    
होली   बजा  रही  शहनाई रे!
 
आई  रे!  फागुन रितु  आई रे!


        अवध - वीथिकायें, ब्रज-गलियां।
 
        मना रहीं  निसि-दिन, रंगरलियां।
 
        राम - श्याम, दुइ भ्रमर गुंजरत,

        खेलत, हॅसत, खिलावत कलियां।।

    
भारत  भर में, धूम  मचाई  रे!

आई  रे!  फागुन रितु  आई रे!

                       *


(वर्ष २०११ में पूर्वप्रकाशित )



 

शनिवार, 28 फ़रवरी 2015

होली की मंगलकामनाएं

आप के एवं आप के परिवार लिए
होली की कोटि-कोटि मंगलकामनाएं 

मैं होली  आऊँगा ....

-अरुण  मिश्र


 
(पूर्वप्रकाशित )
 

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2015

होली पर सभी के लिए मंगलकामनाएं......

रस के झरने सी झर रही होली .....
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-अरुण मिश्र

 

( मेरे संग्रह, "न जाने किन ज़मीनों से ",  से  साभार )

 

मंगलवार, 26 मार्च 2013

होली की शुभकामनायें

Holi ki Shubhkaamnaye - Happy Holi

रंग 
-अरुण मिश्र.   










मैं होली में आऊँगा .....