मंगलवार, 30 जून 2026

हूव तरुवर मनॆगॆ हुल्ल तरुव.../ भाषा : कन्नड़ / सन्त पुरन्दर दास कृति / गायन : श्रीमती जयवन्ती देवी

https://youtu.be/LU8i4EQMoUE 


हूव तरुवर मनॆगॆ हुल्ल तरुव
अव रमण इवगिल्लगरुव ।।प।।

English Translation :

He goes to the houses of those who bring flowers and those who bring grass.
Oh, the consort of Lakshmi (Lord Krishna), He has absolutely no ego or pride!

ऒंदु दळ श्रीतुळसि बिंदु गंगोदकवु
इंदिरा रमणगॆ अर्पितवॆनुत
ऒंदे मनसिनलि सिंधुशयनॆनुत
ऎंदॆंदिगू वासिपनु मंदिरदॊळगॆ ।।१।।

English Translation :

If one offers just a single Tulsi leaf and a drop of holy Ganga water to the Lord of Indira (Lakshmi), and sincerely calls Him the one who reclines on the ocean (Lord Vishnu/Mukunda) with a single-minded devotion, He will forever reside in the devotee's heart.

परिपरिय पुष्पगळ परमात्मगर्पिसि
परिपूर्ण तानॆंदु पूजॆयनु माडि
सरसिजाक्षनु तन्न सकल स्वातंत्र्यदलि
सरि भाग्य कॊडुव तन्नरमनॆय ऒळगॆ ।।२।।
पांडवर मनॆयल्लि कुदुरॆगळ ता तॊळॆदु
पुंडरीकाक्षनु हुल्लनु तिनिसि
अंडज वाहन पुरंदर विठ्ठल
तॊंडरिगॆ तॊंडनागि संचरिसुतिहनु ।।३।।

Charana 2 & 3 ( English Translation)

The remaining verses, as documented in source, describe how the Lord accepts various flower offerings with grace and rewards devotees with a place in his abode. The song concludes by highlighting Krishna's role as a humble servant to his true followers, citing his actions for the Pandavas.

सोमवार, 29 जून 2026

मथुरा नगर की डगर मे चल्यो जात पायो है हरि हीरा.../ स्वर : अ.सौ. भामिनी बागरोदी शर्मा (कोटा)

https://youtu.be/bZnDjlEevoE 


मथुरा नगर की डगर मे चल्यो जात पायो है हरि हीरा ।।
सुन री भटु लटु भयो डोलत, गोकुल गाम को अहीरा ।।१।।

बन ते जु आवत बेनु बजावत, बंसीबट यमुना के तीरा ।।
"परमानंद" दास को ठाकुर, हँस दीनो मुख बीरा ।।२।।

शुक्रवार, 26 जून 2026

पीलियोटॊत्त कार्कून्तलुं कॆट्टि.../ भाषा : मलयालम / गायन : श्रीरेखा

https://youtu.be/4bRpRGz3tRc 

पीलियोटॊत्त कार्कून्तलुं कॆट्टि...

रचना : सुरेश रविवर्मा
भाषा : मलयालम
गायन : श्रीरेखा

पीलियोटॊत्त कार्कून्तलुं कॆट्टि
फालदेशे तिलकमतुं तॊट्टु
बालचन्द्रसमानमुखप्रभ – काणाकेणं

आरणिमलर् पालय्क्कमोतिरं
बालकर्क्किणङ्ङुन्न पुलिनखं
चेलोटायव चार्त्तीट्टु काणणं – भगवाने

नीलक्कार्मुकिल्वर्ण्ण ! जनार्द्दन
बालगोविन्द ! वासुदेव ! कृष्ण
मालकट्टणे माधव ! गोविन्द – वासुदेव

कय्यिल् नल्ल मुरळि चॆऱुकोलुं
मॆय्यऴकार्न्न पीतांबरप्पट्टुं
कॆट्टि नन्नायुटुत्तुटन् काणणं – वासुदेव

भक्तनाय कुचेलन्नु वेण्टव-
यॊक्कॆयुं भवानल्लो कॊटुत्ततुं
मुक्ति नल्कणे माधव गोविन्द! – वासुदेव


Peeliyodotha karkoonthalum ketti...lyrics and meaning

"Peeliyodotha Karkoonthalum" is a popular Malayalam devotional bhajan dedicated to Lord Krishna. It is a visual prayer that describes the enchanting appearance and divine qualities of the Lord. 

Lyrics (Transliterated)

Peeliyodotha kaarkoonthalum ketti
Phala deshe thilakamathum thottu
Balachandra samana mukha prabha
Kaanaakenam 

Aarani malar palakka mothiram
Baalakarkkinangunna pulinakham
Cheloraayava chernnittuk
Kaananam bhagavaane 

Neelakkaarmukil varna janaarthana
Baalagovinda vaasudeva krishna
Maalakattane maadhava govinda
(Vaasudeva...) 

Kaiyyinu nalla murali cherukolum
Manja vasthravum maayoora pichavum
Cheliyananinjanthike
Kaananam (Vaasudeva...)

Bhakthanaaya kuchelannu vendava
Yokkeyum bhavaanallo koduthathum
Mukthi nalkane maadhava govinda
(Vaasudeva...) 

Meaning and Devotional Context

The song visually paints the iconic, beautiful form of Lord Krishna and pleads for His blessings and liberation (Moksha).

*Physical Appearance:* It describes Krishna tying His dark, curly hair with a peacock feather (peeliyodotha). He wears a holy mark (thilakam) on His forehead and has a radiant face that shines like a crescent moon. 

*Adornments:* It mentions Him wearing specific traditional ornaments like the aarani malar, palakka mothiram (a traditional Kerala necklace/pendant), and a tiger claw pendant typically worn by children.

*Divine Instruments & Attire:* The song visually seeks His form holding a flute (murali), draped in yellow silk garments (peethambaram), and adorned with peacock feathers.

*Prayer for Grace:* The devotee praises Krishna as the One with a dark, rain-cloud complexion and prays to Him to remove all sorrows and grant liberation, just as He showered immense blessings on His devotee, Kuchela.

गुरुवार, 25 जून 2026

सदा ऎन्न हृदयदल्लि, वास माडो श्री हरी.../ संत विजय विठल दासार कृति / गायन : रंजनी हेब्बार

https://youtu.be/qqDLqpa-FAA  


सायंकाले वनान्ते कुसुमित समये सैकते चन्द्रिकायाम्
त्रैलोक्याकर्शणांगम् सुरवरगणिक मोहनापांगमूर्तिम् ।
सेव्यम् श्रृगांरभावै: नवरसभरितै: गोपकन्या सहस्रै:
वन्दे अहम् रासकेली रतम् अतिसुभगम् वष्य गोपालकृष्णम्।।

सदा ऎन्न हृदयदल्लि, वास माडो श्री हरी

नाद मूर्ति निन्न पाद, मोददिंद भजिसुवॆनो

ङ्ञानवॆंबो नवरत्नद मंटपद मध्यदल्लि
वेणुगान लोलन कुळ्ळिरिसि ध्यानदिंद भजिसुवेनो

भक्तिरसवॆंबो मुत्तु माणिक्यदा हरिवाणदी
मुक्तनागबेकु ऎंदुमुत्तिन आरति ऎत्तुवेनो

निन्न नानु बिडुवनल्ल ऎन्न नीनु बिडलु सल्ल
घन महिम विजय विठल निन्न भकुतर केळो सॊल्ल

*Sada Yenna Hrudaya Dalli*
*Composer : Saint Vijaya Vittala Dasar*

Pallavi
sadaa enna hrudayadalli vaasamaado shri hari

Oh Lord of Lakshmi, Sri Hari, kindly reside in my heart forever

Anupallavi

Naadhamurthi ninna paada modhadhinda bhajisuve

Oh Lord of Music, with great enthusiasm and happiness I worship your divine lotus feet

Charanam – 1
jnaana vembo navaratna mantapada madhyadalli
gaana lolana kullirisi dhyaanadinda bhajisuve

I shall seat Lord Hari, who is the admirer of music, in the grand hall of wisdom decorated with nine precious gems and shall worship the Lord through meditation.

Charanam – 2
bhakthi rasavembo muddu maanikyada harivaanadi
muktanaaga beku endu muttina aarathi yetthuve

I shall worship through performing the aarathi with the lamp made of pearls, kept in the plate of devotion made of gold decked with pearls and jewels, through which I wish to become liberated.

Charanam – 3
ninna naanu biduvanalla yenna neenu bidalu palli
pannaga shayana vijaya vithala kelo ninna bhaktara solla

I would not leave you and will neither allow you to leave me. Oh Lord the one who recline on a serpent, Oh Vijaya Vittala, kindly hear the plea of your devotees.

मंगलवार, 23 जून 2026

जॊ जो जो जो जो साधुवंत.../ लोरी / भाषा : कन्नड़ / सन्त पुरन्दर दास कृति / गायन : बाम्बे जय श्री

https://youtu.be/kUvYeK189jU  


जॊ जो जो जो जो साधुवंत...

सन्त पुरन्दर दास कृति
गायन : बाम्बे जय श्री

जॊ जो जो जो जो साधुवंत
जो जॊ जो जो जो भाग्यवंत
जो जो जो जो गुणवंत
जो जो जो जो लक्ष्मीकांत

भक्तवत्सल भवहरने जो जो तप्तिवास प्रिय कृष्णने जो जो
मुक्ति दायक मुरहरने जो जो चित्तजनय्य परवस्तुवे जो जो
करुणाकर करि वरदने जो जो सुरनर मुनि वंदितने जो जो
गरुड वाहन नागधरने जो जो खर दूषण संहारने जो जो

सोमवार, 22 जून 2026

कन्ननिदम् एदुत्तु.../ संगीतकार : अंबुजम् कृष्ण / भाषा: तमिल / गायन : सितारा कृष्ण कुमार (सिथु मनी)

https://youtu.be/E0x027psWlU  

Text and meaning of the song

This is a song set in the 'heroine-heroine' vein. In it, the heroine (Radha/Gopi) sends her friend (played by a parrot in the song) to convey her heart-melting love to Kannan (Krishna)

Below is a summary of the main meaning of the lyrics:


• Pallavi:


Meaning: "Tell Kannan, parrot, about this deep love I, a virgin, have for Kannan." 


• Anupallavi:


Meaning: "Let him understand that I am losing my sleep and physical strength at the thought of him, and my mind is melting.


*कन्ननिदम् एदुत्तु*
*रागम् : रागमालिका*
*तालम्: आदि*
*संगीतकार: अंबुजम् कृष्ण*
*भाषा: तमिल*
*गायन : सितारा कृष्ण कुमार (सिथु मनी)*


*पल्लवी*


कन्ननिदम् एदुत्तु शोल्लादि किलिये कन्नी नान अवनमेल कोंडा कडलाई


*अनुपल्लवी*


उनुरक्कम् विट्टु अवनै निनैन्दु उल्लम् मेझुगै ऐ उरुगुगिरेन एनरु


चरणम् १


एन्ननि निदम् नान कन्निर पोझिंडुम एन्नै निनैक्कडा करणम् केल किलिये (कन्नी नान)


चरणम् २


अम्बुजअक्सा अन अंबु केटका वेम्बिये वादुरल विरेनदु शेल्वे एनरु

रविवार, 21 जून 2026

राम की जल समाधि' - महान गीतकार भारत भूषण के स्वर में...

https://youtu.be/3VGNls6nzmc


कविता की पृष्ठभूमि--

   भगवान श्री राम के अवतार लेने का  प्रयोजन पूर्ण होने पर, ब्रह्मा जी ने कहा आप जैसे चाहें वैसे विष्णु-लोक में आएँ। केवल योगमाया सीतादेवी आपको यथार्थ रूप को पहचानती हैं। ब्रह्मा जी की बात सुनकर वे सरयू नदी में प्रवेश कर, अपने वैष्णव तेज रूप में  समा गए थे। उस समय अप्सराओं ने नृत्य किया , गंधर्वों ने गान किया, देवताओं ने पुष्पवर्षा की। श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण के उत्तर काण्ड के ११० वें सर्ग में इसका वर्णन है। 

    भारत भूषण जी ने एक कवि सम्मलेन में कहा था कि वे सरयू-तट पर बैठे थे, उन्हें रामायण का उपरोक्त प्रसंग याद आया। वे वहाँ दिव्य  भावों में खो गये। कैसे राम को सीता का स्मरण ने विचलित किया होगा। विशाल राज्य,सारा सुख तुच्छ लगा होगा। सीता का बिछोह असहनीय हो गया होगा। कैसे जल में प्रवेश किया होगा। पानी पहले घुटनों तक, फिर नाभि से होता हुआ छाती तक आया होगा। राम कैसे सरयू में आगे बढे होंगे। माँ सीता और उनकी सखियों ने कैसे उनका स्वागत किया होगा। इस तरह उनकी यह कविता बन गयी। 

   आप यह कालजयी रचना पढ़ें, सुनें और महसूस करें। शब्द और स्वर, एक दिव्य अनुभूति दे जाते हैं। 

राम की जल समाधि

पश्चिम में ढलका सूर्य 
उठा वंशज सरयू की रेती से 
हारा-हारा रीता-रीता 
निःशब्द धरा, निःशब्द व्योम 
निःशब्द अधर, पर रोम-रोम 
था टेर रहा सीता-सीता 

किसलिए रहे अब ये शरीर 
ये अनाथ मन किसलिए रहे 
धरती को मैं किसलिए सहूँ 
धरती मुझको किसलिए सहे

तू कहाँ खो गई वैदेही 
वैदेही तू खो गई कहाँ 
मुरझे राजीव नयन बोले 
काँपी सरयू, सरयू काँपी 

देवत्व हुआ लो पूर्णकाम 
नीली माटी निष्काम हुई 
इस स्नेहहीन देह के लिए 
अब साँस-साँस संग्राम हुई 

ये राजमुकुट ये सिंहासन 
ये दिग्विजयी वैभव अपार 
ये प्रिया-हीन जीवन मेरा 
सामने नदी की अगम धार

माँग रे भिखारी-लोक माँग 
कुछ और माँग अंतिम बेला 
आदर्शों के जल-महल बना 
फिर राम मिले न मिले तुझको 
फिर ऐसी शाम ढले न ढले 

ओ खंडित प्रणयबंध मेरे 
किस ठौर कहाँ तुझको जोड़ूँ 
कब तक पहनूँ ये मौन धैर्य 
बोलूँ भी तो किससे बोलूँ 
सिमटे अब ये लीला सिमटे 
भीतर-भीतर गूँजा भर था 
छप से पानी में पॉंव पड़ा 
चरणों से लिपट गई सरयू 

फिर लहरों पर वाटिका खिली 
रतिमुख सखियाँ नतमुख सीता 
सम्मोहित मेघबरन बरसे 
पानी घुटनों-घुटनों आया 
आया घुटनों-घुटनों पानी 

फिर धुआँ-धुआँ फिर अँधियारा 
लहरों-लहरों धारा-धारा 
व्याकुलता फिर पारा-पारा 

फिर एक हिरन -सी किरण देह 
दौड़ती चली आगे-आगे 
नयनों में जैसे बाण सधा 
दो पाँव उड़े जल में आगे 

पानी लो नाभि-नाभि आया 
आया लो नाभि-नाभि पानी 
जल में तम, तम में जल बहता  
ठहरो बस, और नहीं, कहता 
जल में कोई जीवित दहता 

फिर एक तपस्विनी शांत-सौम्य 
धक्-धक् लपटों -सी निर्विकार 
सशरीर सत्य-सी सन्मुख थी 

उन्माद नीर चीरने लगा 
पानी छाती-छाती आया 
आया छाती-छाती पानी 

भीतर लहरें, बाहर लहरें 
आगे जल था, पीछे जल था 
केवल जल था, वक्ष स्थल था 
वक्ष-स्थल तक केवल जल था 

जल पर तिरता था नीलकमल 
बिखरा -बिखरा-सा नीलकमल 
कुछ और-और-सा नीलकमल 

फिर फूटा जैसे ज्योति प्रहर 
धरती से नभ तक जगर-मगर 
दो टुकड़े धनुष पड़ा नीचे 
जैसे सूरज के हस्ताक्षर 

बाँहों के चन्दन घेरे से 
दीपित जयमाल उठी ऊपर 
सर्वस्व सौंपता शीश झुका 
लो शून्य राम, लो राम लहर 

फिर लहर-लहर लहरें-लहरें 
सरयू-सरयू सरयू-सरयू 
लहरें -लहरें लहरें-लहरें 
केवल तम ही तम
तम ही तम 

जल ही जल 
जल ही जल केवल 
हे राम-राम 
हे राम-राम 
हे राम-राम 
हे राम-राम

अज़ दैर-ए-मुग़ाँ आयम बे-गर्दिश-ए-सहबा मस्त.../ अल्लामा इक़बाल / गायन : मुंशी रज़ीउद्दीन

 https://youtu.be/-R3OxAAlOx8


अज़ दैर-ए-मुग़ाँ आयम बे-गर्दिश-ए-सहबा मस्त
दर मंज़िल-ए-ला बूदम अज़ बादः-ए-इल्ला मस्त

मैं पीर-ए-मुग़ाँ के दैर (मय-ख़ाने) से शराब पिए बिना ही ब-हालत-ए-मस्ती आ रहा हूँ, मैं ‘ला’ (कोई नहीं) की मंज़िल में ‘इल्ला’ (इस के सिवाय) की शराब से मस्त रहा।

दानम कि निगाह-ए-ऊ ज़र्फ़-ए-हमः कस बीनद
कर्दस्त मरा साक़ी अज़ 'इश्वः-ओ-ईमा मस्त

मुझे मालूम है कि उसकी निगाह हर एक का ज़र्फ़ देख लेती है, चुनाँचे साक़ी ने मुझे अपने नाज़-ओ-अदा ही से मस्त कर दिया है।

वक़्तस्त कि ब-गुशायम मय-ख़ानः-ए-रूमी बाज़
पीरान-ए-हरम दीदम दर सेहन-ए-कलीसा मस्त

अब वक़्त आ गया है कि मैं मौलाना रूम का मय-ख़ाना फिर से खोल दूँ, मैंने पीरान-ए-हरम को कलीसा के सहन में मस्त देखा है।

ईं कार-ए-हकीमे नीस्त दामान-ए-कलीमे गीर
सद बंदः-ए-साहिल मस्त यक बंदः-ए-दरिया मस्त

यह काम समझदार लोगों का नहीं है, तुम तो हज़रत मूसा के दामन को पकड़ लो, साहिल पर मस्त रहने वाले सौ आदमी भी समुंदर में डूबकर मस्त होने वाले एक व्यक्ति के बराबर नहीं होते।

दिल रा ब-चमन बुर्दम अज़ बाद-ए-चमन अफ़सुर्द
मीरद ब-ख़याबाँ-हा ईं लालः-ए-सहरा मस्त

मैं अपने दिल को चमन में ले गया, वह खिलने के बजाए उल्टा बाग़ की हवा से अफ़्सुर्दा हो गया, सहरा में मस्त रहने वाला यह लाला (मेरा दिल) फुलवारियों में मुरझा के रह जाता है।

अज़ हर्फ़-ए-दिल आवेज़िश असरार-ए-हरम पैदा
दी काफ़िरके दीदम दर वादी-ए-बतहा मस्त

उसकी दिल-आवेज़ आवाज़ से हरम के असरार ज़ाहिर हो रहे थे, कल मैं ने बतहा की वादी में एक काफ़िर को बे-ख़ुदी के आलम में ये कहते हुए देखा:

सीनास्त कि फ़ारान अस्त या-रब चे मक़ाम अस्त ईं
हर ज़र्रः-ए-ख़ाक-ए-मन चश्मेस्त तमाशा मस्त

यह वादी-ए-सीना है या फ़ारान की वादी, या रब यह कौन सी जगह है, कि मेरी ख़ाक-ए-बदन का हर ज़र्रा आँख बन कर मस्त-ए-तमाशा है।

शनिवार, 20 जून 2026

अन्नपूर्णे विशालाक्षी.../ मुथुस्वामी दीक्षितार कृति / गायन : मीरा राम मोहन

https://youtu.be/ei0kt6QkaZk?si=FSNBlyvJRzwmYeox


*संगीत रचना : मुथुस्वामी दीक्षितार*
*गायन : मीरा राम मोहन*
*भाषा: संस्कृत*


*पल्लवी*

अन्नपूर्णे विशालाक्षी (रक्षा)
अखिला भुवन साक्षी कटाक्षी

*अनुपल्लवी*

उन्नत गर्त्ता तीरा विहारिणी
ओंकारिणी दुरितादि निवारिणी

*मध्यकालम्*

पन्नगभरण रजनी पुराणी
परमेश्वर विश्वेश्वर भास्वरी (अन्नपूर्णे)

*चरणम्*

पायसअन्नपुरिता माणिक्य
पात्र हेमादर्वी विधृतकरे कायाजादि रक्षणा
निपुणतारे
कंचनमय भूषणा अंबरधारे

*मध्यकालम्*

तोयाजासनादि सेवितापारे तुम्बुरु नारदादि नुता वारे
त्रयातिता मोक्षप्रदा चतुरे त्रिपदा शोभिता गुरुगुहासादरे

*अर्थ: (टी.के. गोविंदा राव की पुस्तक से)*

हे अन्नपूर्णा देवी, विशालाक्षी - विशाल नेत्रों वाली, कृपया मेरी रक्षा करें। आप संसार में घटित होने वाली सभी घटनाओं की साक्षी हैं ("अखिलभुवनसाक्षी")। कृपया मुझे अपनी दृष्टि से अनुग्रहित करें ("कटाक्षी")। वह प्रसिद्ध ("उन्नत") गर्त्ततिरा-कुझिक्कराई ("गर्त-तिरा-विहारिणी") में निवास करती हैं। वह ओंकार ("ओंकारिणी") के रूप में हैं। वह दुखों ("दुरितादि") को दूर करती हैं ("निवारिणी")। वह भगवान शिव की संगिनी ("रजनी") हैं, जो स्वयं को सर्पों ("पन्नग") से सुशोभित करते हैं ("आभरण")। वह प्राचीन ("पुरानी") हैं। वह भगवान परमेश्वर ("विश्वेश्वर") की ज्योति ("भास्वरी") हैं। वह एक हाथ में रत्नजड़ित पात्र (मणिक्य पात्र) मीठे चावल-पायसन से भरा हुआ (पुरिता) और दूसरे हाथ में सोने का चम्मच (दर्वी) धारण किए हुए हैं। वह कामदेव और अन्य लोगों की रक्षा करने में निपुण हैं। वह अलंकृत सोने के आभूषणों और सुनहरे रेशम से सुशोभित हैं। ब्रह्मा और तुम्बुरु एवं नारद जैसे प्रख्यात ऋषियों द्वारा उनकी पूजा की जाती है। वह धर्म-अर्थ-काम से परे मोक्ष प्रदान करने में कुशल हैं।वह गुरुगुहा ("त्रिपदा सोभिता") ("गुरुगुहा-सदारे") की प्रिय मां हैं।


गुरुवार, 18 जून 2026

अम्बा स्तवम् / ब्रह्मर्षि सदाशिवन कृत

https://youtu.be/O_0PVXI4RJ0?si=Z7MhM4zarVmYwku1


वन्देऽहन्तेऽनन्ते सुपदर -
विन्दे विन्दे शन्ते निजसुख -
कन्देऽमन्दे स्पन्दे शुभकरि
बहुदयहृदययुते ।
मायेऽमेये लीये पुरहर -
जायेऽजेये ज्ञेये ननु भव -
दीये ध्येयेऽभ्येये निरुपम -
पदि हृदि मृदितमृते ॥१॥

रुन्धे हतनतबन्धे मम हृदयन्ते स्मितजितकुन्दे
अमलतररूपेऽपापे दीपे भवकूपे पतितं व्यथितं
देवि समुद्धर करुणाजलराशे सुरुचिरवेषे॥२॥

धीरे वीरे शूरे सदमृत -
धारे तारेऽसारे बत भव -
कारागारे घोरे निपतित -
मव शिशुमतुलबले ।
अम्बालम्बे लम्बोदरपरि -
पाले बाले काले खलुजग -
दीशे धीशेऽनीशे हृदि शिव -
मनुमनुदिनममले ॥३॥

शिष्टहितैषिणि दुष्टविनाशिनि
कष्टविभेदिनि दृष्टिविनोदिनि
सङ्कटकण्टकभिन्दनकुशलकले सकले सबले
श्रद्धाबद्धे न्यस्ताभयहस्ते सुरगणविनुते॥४॥

श्रेष्ठे प्रेष्ठे ज्येष्ठे हिमगिरि -
पुष्टे जुष्टे तिष्ठे: शिवपरि -
निष्ठे स्पष्टे हृष्टे मम हृदि
मुनिजननुतिमुदिते ।
आद्ये वेद्ये वैद्ये त्रिजगति
रामे वामे श्यामे कुरु करु -
णान्ते दान्ते शान्ते भयहर -
भगवति सति शिवदे ॥५॥

बुधवार, 17 जून 2026

दर्द हो दिल में तो दवा कीजे.../ दर्द से मेरे है तुझ को बे-क़रारी हाए हाए.../ शायर : मिर्ज़ा ग़ालिब / गायन : दीक्षा तूर

https://youtu.be/aDi1Bj98-mY?si=gYq5AqmA63uEnLLM


दर्द हो दिल में तो दवा कीजे
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजे

हमको फ़रियाद करनी आती है
आप सुनते नहीं तो क्या कीजे

रंज उठाने से भी ख़ुशी होगी
पहले दिल दर्द आशना कीजे

मौत आती नहीं कहीं, ग़ालिब
कब तक अफ़सोस जीस्त का कीजे

************

दर्द से मेरे है तुझ को बे-क़रारी हाए हाए
क्या हुई ज़ालिम तिरी ग़फ़लत-शिआरी हाए हाए

तेरे दिल में गर न था आशोब-ए-ग़म का हौसला
तू ने फिर क्यूँ की थी मेरी ग़म-गुसारी हाए हाए

क्यूँ मिरी ग़म-ख़्वार्गी का तुझ को आया था ख़याल
दुश्मनी अपनी थी मेरी दोस्त-दारी हाए हाए

उम्र भर का तू ने पैमान-ए-वफ़ा बाँधा तो क्या
उम्र को भी तो नहीं है पाएदारी हाए हाए

ज़हर लगती है मुझे आब-ओ-हवा-ए-ज़िंदगी
या'नी तुझ से थी इसे ना-साज़गारी हाए हाए

रविवार, 14 जून 2026

मैं गीत बेचकर घर आया.../ कवि : स्वर्गीय भारत भूषण

https://youtu.be/Y4QBJXGdpRM?si=s_IxrEZuFf21J3ys


मैं गीत बेचकर घर आया, सीमेंट ईंट लोहा लाया 
कवि-मन माया ने भरमाया, हे ईश्वर मुझे क्षमा करना !

जनमा था आँसू गाने को, खोया झूठी मुसकानों  में 
भीतर का सुख खोजता फिरा , बाहर से सजी दुकानों में 
मैं अश्रु बेचकर घर आया, प्लास्टिक के गुलदस्ते लाया 
अपनी आत्मा को बहकाया, हे ईश्वर मुझे क्षमा करना ! 

शब्दों-शब्दों सौंदर्य गढ़ा, नगरों-नगरों नीलाम किया 
संतों की संगत छोड़ किसी, वैश्या के घर विश्राम किया 
मैं प्यार  बेचकर घर आया, चुटकी भर सुविधाएँ लाया 
क्या करना था क्या कर आया, हे ईश्वर मुझे क्षमा करना ! 

सारे दागों को ढके रहा, छंदों की शिल्पित चादर से 
गोरे कागज काले करता, टेढ़े-मेढ़े हस्ताक्षर से 
मैं शर्म बेचकर घर आया, गहरे रंग का चश्मा लाया 
दर्पण पर परदा लटकाया हे ईश्वर मुझे क्षमा करना !

शुक्रवार, 12 जून 2026

नृसिंह आरती हिंदी में – अर्थ के साथ

https://youtu.be/aw83W-y-0_A?si=0KR35wVa7YNXjbIr

(१)
नमस्ते नरसिंहाय 
    प्रह्लादाह्लाद-दायिने। 
   हिरण्यकशिपोर्वक्षः- 
        शिला-टङ्क-नखालये।।


मैं नृसिंह भगवान्‌ को प्रणाम करता हूँ जो प्रह्लाद महाराज को आनन्द प्रदान करने वाले हैं तथा जिनके नख दैत्यराज हिरण्यकशिपु के पाषाण सदृश वक्षस्थल के ऊपर छेनी के समान हैं।


(२) 
  इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो 
       यतो यतो यामि ततो नृसिंहः। 
बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहो 
नृसिंहमादि शरणं प्रपद्ये॥


नृसिंह भगवान्‌ यहाँ है और वहाँ भी हैं। मैं जहाँ कहीं भी जाता हॅूँ वहाँ नृसिंह भगवान्‌ हैं। वे हृदय में हैं और बाहर भी हैं। मैं नृसिंह भगवान्‌ की शरण लेता हूँ जो समस्त पदार्थों के स्रोत तथा परम आश्रय हैं।


(3) 
तव कर-कमल-वरे नखम्‌ 
अद्‌भुत-श्रृंङ्गम्‌ 
दलित-हिरण्यकशिपु-
तनु-भृंङ्गम्‌ 
केशव धृत-नरहरिरूप 
जय जगदीश हरे॥


हे केशव! हे जगत्पते! हे हरि! आपने नरसिंह का रूप धारण किया है आपकी जय हो। जिस प्रकार कोई अपने नाखूनों से भ्रमर को आसानी से कुचल सकता है उसी प्रकार भ्रमर सदृश दैत्य हिरण्यकशिपु का शरीर आपके सुन्दर कर-कमलों के नुकीले नाखूनों से चीर डाला गया है।

गुरुवार, 11 जून 2026

मन अटक्या बेपरवाह दे नाल.../ शाह हुसैन फकीर / वडाली बन्धु

https://youtu.be/-qk67qMDuaM  


One of the original renditions of Mann Atkeya Beparwah, immortalized by the legendary Wadali Brothers -

उठ फरीदा सुत्तिया, तू झाड़ू दे मसीत 
तू सुत्ता रब जागदा, तेरी ढाढ़े नाल परीत 

"Awaken Fareed, and go broom the mosque.
You’re asleep while your Lord, whom you so dearly love, is awake."

मन अटक्या बेपरवाह दे नाल
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल

My soul is entangled with the indifferent one
Lord of all things visible and invisible

क़ाज़ी मुल्ला मत्ती दैन्दे
ख़रय सियाने राह दसेंदे
इश्क़ की लागे राह दे नाल

Judges and clerics are full of advice,
The righteous and wise show you the path,
But love itself needs no guidance

नदियों पार रांझन दा थाना
कीते क़ोल ज़रूरी जाना
मिंतां कर्रन मल्लाह दे नाल

Ranjha’s dwelling is across the stream,
Having given my word, I must go
I will beseech the boatman

कहे हुसैन फ़क़ीर साईं दा
दर ते छोलियां अद्दियां में
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल

I am a novice, what do I know of committed love?
The separation pulls at my sinews
Says Hussain, Gods faqir, I spread my robe before you
Lord of all things visible and invisible

कहे हुसैन फ़क़ीर नुमांरहा
सच्चे साहिब नू में जाना
औरहक कम अल्लाह दे नाल

Says Hussain, the worthless faqir,
I know the true Lord
In the end I will meet my Creator

𝗧𝗵𝗲 𝗪𝗮𝗱𝗮𝗹𝗶 𝗕𝗿𝗼𝘁𝗵𝗲𝗿𝘀 - Ustad Puranchand Wadali And Late Ustad Pyarelal Wadali, Rendering Soulful Poetry Of Shah Hussain Sufi Poet Of 𝗣𝘂𝗻𝗷𝗮𝗯𝗶 In Their Mystical Style “The Punjabi Sufi Music And Classic Folk Gayaki Of Punjab At Its Very Best, Pure Classicism Of This Kind Rarely Heard These Days.

मन अटक्या बेपरवाह दे नाल
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल

मेरी आत्मा समस्त दृश्य एवं अदृश्य वस्तुओं के उदासीन स्वामी से बंधी हुई है।

वसदी हरदम मन मेरे विच, सूरत यार प्यारे दी
अपने शाह नू आप रजावां, हाजत नई पसराय दी
काहे हुसैन फकीर नुमान्हा, थीवां खाक दवारे दी

प्रियतम की छवि मेरी आत्मा में निरंतर बसी रहती है।
मैं केवल अपने प्रेम को ही प्रसन्न कर सकता हूँ, मुझे किसी दिखावे की आवश्यकता नहीं है।
निकम्मे फकीर हुसैन कहते हैं, मैं तुम्हारे द्वार की धूल हूँ।

मन अटक्या बेपरवाह दे नाल
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल

मेरी आत्मा समस्त दृश्य एवं अदृश्य वस्तुओं के उदासीन स्वामी से बंधी हुई है।

क़ाज़ी मुल्ला मत्ती दैन्दे
ख़रय सियाने राह दसेंदे
इश्क़ की लागे राह दे नाल

न्यायाधीश और धर्मगुरु सलाहों से परिपूर्ण हैं,
धर्मी और बुद्धिमान लोग आपको मार्ग दिखाते हैं,
परन्तु प्रेम को स्वयं किसी मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं होती।
मेरी आत्मा उदासीन व्यक्ति से बंधी हुई है

नदियों पार रांझन दा थाना
कीते क़ोल ज़रूरी जाना
मिंतां कर्रन मल्लाह दे नाल

रांझा का घर नदी के उस पार है,
मैंने वचन दे दिया है, मुझे जाना ही होगा,
मैं नाविक से विनती करूँगा।

मन अटक्या बेपरवाह दे नाल
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल

मेरी आत्मा समस्त दृश्य एवं अदृश्य वस्तुओं के उदासीन स्वामी से बंधी हुई है।

साजन बिन रतन होइयां वड्डियां
रांझा जोगी में जोगियाणी
कमली कर कर सद्दियां
साजन बिन रतन होइयां वड्डियां
में हन अयानी नूह की जाणा
बिरहोन तनावां गड्डियां

मेरे प्रियतम के बिना रातें लंबी लगती हैं,
रांझा एक संत है और मैं उसका अनुयायी हूँ।
उसने मुझे बेसुध कर दिया है।

कहे हुसैन फ़क़ीर सईं दा
डर ते छोलियां अद्दियां में
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल

मैं तो नौसिखिया हूँ, मुझे सच्चे प्रेम का क्या ज्ञान है?
जुदाई मेरे शरीर को जकड़ लेती है।
हुसैन, अल्लाह के फ़कीर, कहते हैं, मैं आपके सामने अपना वस्त्र बिछाता हूँ,
हे समस्त दृश्य और अदृश्य वस्तुओं के स्वामी।
मेरी आत्मा उदासीन व्यक्ति से बंधी हुई है

कहे हुसैन फ़क़ीर नुमांरहा
सच्चे साहिब नू में जाना
औरहक कम अल्लाह दे नाल

हुसैन, निकम्मे फकीर, कहते हैं,
मैं सच्चे ईश्वर को जानता हूँ।
अंत में मैं अपने सृष्टिकर्ता से मिलूंगा।

मन अटक्या बेपरवाह दे नाल
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल

मेरी आत्मा समस्त दृश्य एवं अदृश्य वस्तुओं के उदासीन स्वामी से बंधी हुई है।

बुधवार, 10 जून 2026

रघुपति राघव राजाराम.../ श्री लक्ष्माचार्य कृत / स्वर : अरुणा साईराम

https://youtu.be/7V5dQnLtaus 


रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥

सुंदर विग्रह मेघश्याम
गंगा तुलसी शालग्राम ॥

रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥

भद्रगिरीश्वर सीताराम
भगत-जनप्रिय सीताराम ॥

रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥

जानकीरमणा सीताराम
जयजय राघव सीताराम ॥

रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥

रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥

शुक्रवार, 5 जून 2026

घाट पर ठाड़े श्री मदनगोपाल.../ गायन : मुदिता एवं रुचिता जमरिया

https://youtu.be/WIKkpp2liSU?si=O2Q6KbL6F3BqdqKl


घाट पर ठाड़े श्री मदनगोपाल ।
कौन युक्ति कर भरों री यमुनाजल पर्यो है हमारे ख्याल ।।

घोस बढ़्यो घर सास  रिसैहै चल न सकत एक चाल ।
कहा करुं अब यो नहीं मानत सुंदर नंदको लाल ।।

कछुक संकोच कछु चोप मिलन की परी प्रेम की जाल ।
परमानंद स्वामी चित चोर्यों वेणु बजाय रसाल ।।

कण्डु कण्डु नियन्ना.../ संत पुरंदर दासर कृति / गायन : सुषमा अनिल / भाषा: कन्नड़

https://youtu.be/92RwKoSfukI?si=l1jzfH3Du9jSiuQa


पल्लवी

कण्डु कण्डु नियन्ना कइया बिदुवारे पुंडरीकाक्ष पुरूषोत्तम हरे

चरणम् १

बन्धुगालू एनगिला बदुकिनाली सुखविल्ला निन्देयली नन्देनै निराजाक्ष
तन्दे तैय्यु निने बन्धु बालगावु नी इने एंडेन्डिगु निन्ना नम्बिडेनो कृष्ण

चरणम्  २

केसनवोन्दु युगावगि त्रनकिन्त कादेयि एनिसलआरादा भवाडी नोंदे नानु
सनकादि मुनि वन्द्या वनज संभव जनक फणिशायी प्रह्लादगोलिड श्री कृष्ण

चरणम्  ३

भक्तवत्सलनेम्ब बिरुड़ पोट्टा मेले भक्तअधिनानगिरा बेदावे
मुक्ति दायक निनु होन्नुरु पूर्वसा शाक्त गुरु पुरंदर विट्ठल श्री कृष्ण

English Translation  :

Geetha Naresh May 5, 2024 at 6:45 AM

Meaning: 

O pundarikAksha, purushottama Hare, Ranga will you (Ni enna) leave(biDuvare) my hand(kai) (after having) seen(kanDu) me so far. (will you stop your protection to me now?)

C1: 

O nIrajaksha, I have no(enagilla) relatives(bandhu galu), there is no happiness(sukha) in life(baduku), I am pained(nonde) at the ridicule(ninde) directed towards me. You are my mother(tAyi) and father(tande), you are all that there is as my relatives(bandhu-baLaga), O Krishna, I believe (nambideno) in you at all times(endendigU)

C2: 

A moment(kSaNa) has become an age(yuga - like dwaparayuga), I have been (treated) lower than a blade of grass(by others), I have suffered(nonde) uncountable(eNisalarada) indignities(bhava). O krishna, respected by sages like sanaka, vanaja sambhava janaka, the one resting on a snake, and the one who blessed Prahlada.(don’ leave me…)

C3: 

(Tell me) Once you assume (potta mele) the title of bhaktavatsala(the one who protects his devotees), don’t you have to be under the control(AdhIna) of your devotees? O Krishna, the one who lives in Honnuru (honnuru puravAsa), the almighty(shakta) guru purandaravithala. (don’t leave me…)

पर्यावरण वन्दना.../ कविता / अरुण मिश्र

https://youtu.be/pc4LKrM5qH4  

वन्दना करिये धरा की;
धरा के पर्यावरण की।।

झर रहे निर्झर सुरीले,
और नदियाँ बहें कल-कल।
ताल, पोखर, झील, सागर,
हर तरफ है, नीर निर्मल।।

चर-अचर जिसमें सुरक्षित,
स्नेहमय उस आवरण की।।

मन्द, मन्थर पवन शाीतल;
आँधियों का तीव्रतर स्वर।
सर्वव्यापी वायु पर ही,
प्राणियों की साँस निर्भर।।

जीव-जग-जीवनप्रदायिनि-
प्रकृति के, शुभ आचरण की।।

अन्न के भण्डार दे भर,
भूमि उर्वर, शस्य-श्यामल।
भूख सबकी मेटने को-
वृक्ष, फलते हैं मधुर फल।।

माँ धरा की गोद के,
इस मोदमय वातावरण की।।
                   *
(काव्य-संग्रह 'कस्मै देवाय' से साभार)

गुरुवार, 4 जून 2026

श्री कृष्णाष्टकं.../ आदि शंकराचार्य कृत/ गायन : गीता, कल्पिता एवं श्रुति उपासनी

https://youtu.be/a7fMQVfZHY8?si=ygzjk_EyP7Vs7UdD

आदि शंकराचार्य द्वारा रचित श्री कृष्णाष्टक भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति का एक अत्यंत दिव्य स्रोत है। इसमें आठ श्लोक हैं जो उनकी मनमोहक छवि, लीलाओं और महिमा का वर्णन करते हैं। 

श्लोक १
भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव नन्दनन्दनम् ।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम् ॥१॥ 


अर्थ: जो ब्रजभूमि के एकमात्र आभूषण हैं, समस्त पापों को नष्ट करने वाले हैं और अपने भक्तों के चित्त को आनंदित करने वाले हैं, उन नंदनन्दन (नंद के पुत्र) का मैं सदा भजन करता हूँ। जिनके मस्तक पर सुंदर मोर मुकुट है, हाथों में सुरीली बांसुरी है और जो कामदेव के समान सौंदर्य के सागर हैं, उन चतुर श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ। 


श्लोक २
मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम् ।
करारविन्दभूधरं स्मतावलोकसुन्दरं महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णवारणम् ॥२॥ 


अर्थ: जो कामदेव के अहंकार को नष्ट करने वाले हैं, विशाल और चंचल नेत्रों वाले हैं तथा ग्वालों के कष्टों को दूर करने वाले हैं, उन कमल नयन (पद्मलोचन) श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ। जिन्होंने अपने कमल रूपी हाथों से गोवर्धन पर्वत को धारण किया, जिनकी मंद मुस्कान अत्यंत सुंदर है तथा जिन्होंने देवराज इंद्र के मान (अहंकार) को तोड़ा था, उन नटखट कृष्ण को मेरा प्रणाम है। 


श्लोक ३
कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं व्रजाङ्गनाङ्कवल्लभं नमामि कृष्णदुर्लभम् ॥३॥(पंक्ति का तीसरा चरण)
यशोषया समोदया सगोपया सनन्दया युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम् ॥३॥ 


अर्थ: जिनके कानों में कदम्ब के फूलों के कुण्डल हैं, जिनके गाल अत्यंत आकर्षक हैं, जो ब्रज की गोपियों के प्रियतम हैं और जो बड़े-बड़े देवताओं को भी दुर्लभ हैं, उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ। जो यशोदा माता के साथ अत्यंत प्रसन्न हैं, गोपगणों और नंदजी से घिरे हुए हैं और भक्तों को एकमात्र आनंद प्रदान करने वाले हैं, उन गोपों के नायक को मैं नमन करता हूँ। 


श्लोक ४
सदैव पादपङ्कजं मदीयमानसे निजं दधानमुत्तमालकं नमामि नन्दबालकम् ।
समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणं समस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम् ॥४॥


अर्थ: जिनके चरण कमल सदैव मेरे मन में बसे रहते हैं, जो घुंघराले बालों से सुशोभित हैं, उन नन्दबालक को मैं प्रणाम करता हूँ। जो सभी दोषों/बुराइयों का नाश करने वाले हैं, समस्त लोकों का पोषण करने वाले हैं और सभी ग्वालों के मन में निवास करने वाले हैं, उन नंदलाल को मैं नमन करता हूँ। 


श्लोक ५
भुवोभरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं यशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम् ।
दृगन्तकान्तभङ्गिनं सदासदालसङ्गिनं दिने दिने नवं नवं नमामि नन्दसंभवम् ॥५॥ 


अर्थ: जो पृथ्वी का भार उतारने वाले और संसार रूपी सागर से पार लगाने वाले (नाविक) हैं, यशोदा माता के दुलारे हैं और भक्तों के चित्त को चुराने वाले हैं, उन्हें मेरा प्रणाम। जिनकी तिरछी और सुंदर चितवन मन मोह लेती है, जो भक्तों के सदा संग रहते हैं और जो प्रतिदिन नए और मनोहर प्रतीत होते हैं, उन नंदनंदन को मैं नमन करता हूँ। 


श्लोक ६
वराङ्गकल्कशोभितं गलेचलद्विनिर्जितं लसन्नखन्दुभासुरं नमामि कृष्णसुन्दरम् ।
समस्तगोपनन्दनं हृदम्बुजैकनन्दनं व्रजाङ्गनामनोहरं नमामि कृष्णसुन्दरम् ॥६॥


अर्थ: जिनके अंग सुगंधित लेप से सुशोभित हैं, गले में मोतियों की माला और आभूषण झिलमिलाते हैं और जिनके नख चंद्रमा के समान चमकते हैं, उन परम सुंदर श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ। जो सभी गोप-बालकों को आनंदित करने वाले हैं, सबके हृदय रूपी कमल में वास करने वाले हैं और ब्रज की स्त्रियों का मन मोह लेने वाले हैं, उन सुंदर कृष्ण को मेरा नमन है। 


श्लोक ७
पिनाङ्कपाणिमण्डलं सदाविकासिसद्गुणं जगत्त्रयाकतारकं नमामि कृष्णतत्त्वम् ॥७॥


अर्थ: जो अपने हाथों में मुरली धारण किए रहते हैं, जिनके दिव्य गुण सदा विकसित रहते हैं और जो तीनों लोकों का उद्धार करने वाले हैं, उस परमतत्त्व रूपी श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ। 


श्लोक ८
कृष्णाष्टकमिदं पुण्यं प्रातरुत्थाय यः पठेत् ।
कोटिजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥८॥ 


अर्थ: इस पवित्र 'कृष्णाष्टकम्' का जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर पाठ करता है, उसके करोड़ों जन्मों के पाप केवल इसके स्मरण मात्र से ही नष्ट हो जाते हैं।

बुधवार, 3 जून 2026

कोई तनहाई का एहसास दिलाता है मुझे.../ शायर : शाज़ तमकनत / गायन : वन्दना श्रीनिवासन

https://youtu.be/TXvMTnsZLZ4



कोई तन्हाई का एहसास दिलाता है मुझे
मैं बहुत दूर हूँ नज़दीक बुलाता है मुझे

मैं ने महसूस किया शहर के हंगामे में
कोई सहरा में है, सहरा में बुलाता है मुझे

तू कहाँ है कि तिरी ज़ुल्फ़ का साया साया
हर घनी छाँव में ले जा के बिठाता है मुझे

ऐ मिरे हाल-ए-परेशाँ के निगह-दार ये क्या
किस क़दर दूर से आईना दिखाता है मुझे

ऐ मकीन-ए-दिल-ओ-जाँ मैं तिरा सन्नाटा हूँ
मैं इमारत हूँ तिरी किस लिए ढाता है मुझे

रहम कर मैं तिरी मिज़्गाँ पे हूँ आँसू की तरह
किस क़यामत की बुलंदी से गिराता है मुझे

'शाज़' अब कौन सी तहरीर को तक़दीर कहूँ
कोई लिखता है मुझे कोई मिटाता है मुझे

शनिवार, 30 मई 2026

मिर्जापुर कइले गुलज़ार कचौड़ी गली सून कइले बलमू.../ गायन : डाॅ सोमा घोष

https://youtu.be/ieq9PVKHitE?si=8cREB8jb3psnhxtX


मिर्जापुर कइला गुलज़ार हो!

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय बनारस की कचौड़ी गली से एक क्रांतिकारी को रात तब पकड़ लिया जब वह अपनी प्रेयसी के साथ था। उसे पकड़ कर वे बनारस के पास एक शहर है मिर्जापुर, वहाँ ले गए। वहाँ से फिर उसे सजा देकर काला पानी (रंगून) भेज दिया। जहाँ से वह कभी न लौट सके!
यहाँ कचौड़ी गली में उसकी प्रेयसी तड़प उठी। उसने उसके विरह में घर बार त्याग दिया और संन्यासिन की तरह विचरने लगी। जब थोड़ा उसे देह और आत्मा की सच्चाई का कुछ भान हुआ तो उसने अपनी विरह पीड़ा को निर्गुण भजन में लोकगीत की प्रख्यात कजरी शैली में लिपिबद्ध किया है। इसे मशहूर ठुमरी गायिका गौहर जान ने बड़े दिल से गाया है।

मिर्जापुर कैले गुलजार हो,
कचौड़ी गली सून कैले बलमू


एही मिर्जापुर से उड़ेले जहजिया,
सैंया चल गइले रंगून हो,
कचौड़ी गली सून कैले बलमू


पनवा से पातर भइल तोर धनिया,
देहिया गलेला जइसे नून हो,
कचौड़ी गली सून कैले बलमू

शुक्रवार, 29 मई 2026

बड़ा जबरदस्त उसका इन्तजाम है... / फिल्म : कण कण में भगवान (१९६३) / गायक : महेंद्र कपूर / संगीत : पंडित शिवराम/ गीतकार : भारत व्यास

https://youtu.be/ZMB8mqS6sPA?si=H-nTT5kKLLkvapR5


ये दुनिया बनाना और बनाके फिर चलाना
बस उसी का काम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है

रात को ही रात परभात को परभात
शाम ही को शाम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है
ये दुनिया बनाना और बनाके फिर चलाना
बस उसी का काम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है

जल पे है थल और थल पे आसमान है
फिर भी एक दुजे पे न बोझ के समान है
जल पे है थल और थल पे आसमान है
फिर भी एक दुजे पे न बोझ के समान है
गजब का ये जहान है
बिन खम्बे का मकान है
गजब का ये जहान है
बिन खम्बे का मकान है
जहा का एक एक तन उसका गुलाम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है
ये दुनिया बनाना और बनाके फिर चलाना
बस उसी का काम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है

सूर्य चंदर तारे अपने धरम से न टल सके
इंसान की मजाल क्या जो उसका क्रम बदल सके
सूर्य चंदर तारे अपने धरम से न टल सके
इंसान की मजाल क्या जो उसका क्रम बदल सके
इक फूल भी खिले नहीं एक पत्ता भी हिले नहीं
इक फूल भी खिले नहीं एक पत्ता भी हिले नहीं
सारे जहाँ की उसके हाथ में लगाम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है
ये दुनिया बनाना और बनाके फिर चलाना
बस उसी का काम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है

रविवार, 24 मई 2026

मैं तो सांवरे के रंग राची.../ मीराबाई / गायन : शैला हट्टंगणी

https://youtu.be/nk_vqliI5wU?si=YvC3Uu8ZqNoS6Kp


मैं तो सांवरे के रंग राची।

साजि सिंगार बांधि पग घूंघरू, लोक-लाज तजि नाची।।

गई कुमति, लई साधुकी संगति, भगत रूप भइ सांची।

गाय गाय हरि के गुण निसदिन,कालव्यालसूं बांची।।

उण बिन सब जग खारो लागत, और बात सब कांची।

मीरा श्रीगिरधरन लालसूं, भगति रसीली जांची।।

गुरुवार, 21 मई 2026

एक तो नैनाँ कजरारे और तिस पर डूबे काजल में.../ शायर : जां निसार अख़्तर / संगीत : जय देव / गायन : शैला हट्टंगड़ी

https://youtu.be/Hs0jM7xCNow?si=mdnHVmBa3nqLeVaZ


एक तो नैनाँ कजरारे और तिस पर डूबे काजल में
बिजली की बढ़ जाए चमक कुछ और भी गहरे बादल में

आज ज़रा ललचाई नज़र से उस को बस क्या देख लिया
पग-पग उस के दिल की धड़कन उतरी आए पायल में

प्यासे प्यासे नैनाँ उस के जाने पगली चाहे क्या
तट पर जब भी जावे सोचे नदिया भर लूँ छागल में

आज पता क्या कौन से लम्हे कौन सा तूफ़ाँ जाग उठे
जाने कितनी दर्द की सदियाँ गूँज रही हैं पल पल में

हम भी क्या हैं कल तक हमको फिक्र सुखों की रहती थी
आज सुखों से घबराते हैं चैन मिले है हलचल में

बुधवार, 20 मई 2026

कोई चौदहवीं-रात का चाँद बन कर.../ शायर : अख़्तर आज़ाद / गायन : जगजीत सिंह

https://youtu.be/IAKOa0McuaI?si=CrtGFMfIH7bXwu9J


कोई चौदहवीं-रात का चाँद बन कर तुम्हारे तसव्वुर में आया तो होगा
किसी से तो की होगी तुम ने मोहब्बत किसी को गले से लगाया तो होगा

लबों से मोहब्बत का जादू जगा के भरी बज़्म में सब से नज़रें बचा के
निगाहों के रस्ते से दिल में समा के किसी ने तुम्हें भी चुराया तो होगा

तुम्हारे ख़यालों की अँगनाइयों में मिरी याद के फूल महके तो होंगे
कभी अपनी आँखों के काजल से तुम ने मिरा नाम लिख कर मिटाया तो होगा

कभी आइने से निगाहें मिला कर जो ली होगी भरपूर अंगड़ाई तू ने
तो घबरा के ख़ुद तेरी अंगड़ाइयों ने तिरे हुस्न को गुदगुदाया तो होगा

निगाहों में शम-ए-तमन्ना जला कर तकी होंगी तुम ने भी राहें किसी की
किसी ने तो वा'दा किया होगा तुम से किसी ने तो तुम को रुलाया तो होगा

जुदा हो गया होगा जब कोई तुम से दिया होगा जब तुम को धोका किसी ने
हमारी वफ़ा याद आई तो होगी हमें अपने नज़दीक पाया तो होगा

सोमवार, 18 मई 2026

नवनीतचोरा नमो नमो.../ अन्नमाचार्य कृति / गायन : सिन्धु रागेश्वरी एवं सिवानन्द यसस्वी

https://youtu.be/TVQxun4tFBg?si=eRXl-QF9mdjOEA-N


Navaneetha Chora Namo Namo is a beautiful Carnatic composition written by the 15th-century saint-poet Talapaka Annamacharya. Dedicated to Lord Krishna, the song praises his various incarnations and divine attributes. 

पल्लवी

नवनीतचोरा नमो नमो
 नव महिमार्णव नमो नमो

चरणम् १

हरि नारायण केशव अच्युत कृष्ण नरसिम्हा वामन नमो नमो
मुराहर पद्मनाभ मुकुंद गोविंद नारायण नारायण नमो नमो

चरणम् २

निगम गोचार विष्णु नीरजाक्ष वासुदेव नागधर नंदगोप नमो नमो
त्रिगुणातीत देव त्रिविक्रम द्वारका नगराधि नायक नमो नमो

चरणम् ३

वैकुंठ रुक्मिणी वल्लभ चक्रधर नकेश वंदिता नमो नमो
श्रीकर गुणनिधि श्री वेंकटेश्वर नकाजनुता नमो नमो


Brief Meaning

The song translates to: "Salutations to the stealer of butter, salutations to the ocean of new and divine glories." The stanzas worship Lord Krishna in all his forms, including as Hari, Narayana, and Venkateshwara, as well as the protector of his devotees and the Lord of Dwaraka.

बुधवार, 6 मई 2026

वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा.../ शायरा : परवीन शाकिर

https://youtu.be/LQ_o30t-Y3c?si=69mLwwupWSezPEcd

वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा


हम तो समझे थे कि इक ज़ख़्म है भर जाएगा
क्या ख़बर थी कि रग-ए-जाँ में उतर जाएगा


वो हवाओं की तरह ख़ाना-ब-जाँ फिरता है
एक झोंका है जो आएगा गुज़र जाएगा


वो जब आएगा तो फिर उस की रिफ़ाक़त के लिए
मौसम-ए-गुल मिरे आँगन में ठहर जाएगा


आख़िरश वो भी कहीं रेत पे बैठी होगी
तेरा ये प्यार भी दरिया है उतर जाएगा


मुझ को तहज़ीब के बर्ज़ख़ का बनाया वारिस
जुर्म ये भी मिरे अज्दाद के सर जाएगा

शनिवार, 2 मई 2026

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी.../ शायरा : परवीन शाकिर

https://youtu.be/alsvzGEttAM 

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी


बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की
चाँद भी 'ऐन चैत का उस पे तिरा जमाल भी


सब से नज़र बचा के वो मुझ को कुछ ऐसे देखता
एक दफ़'अ तो रुक गई गर्दिश-ए-माह-ओ-साल भी


दिल तो चमक सकेगा क्या फिर भी तराश के देख लें
शीशा-गिरान-ए-शहर के हाथ का ये कमाल भी


उस को न पा सके थे जब दिल का 'अजीब हाल था
अब जो पलट के देखिए बात थी कुछ मुहाल भी


मेरी तलब था एक शख़्स वो जो नहीं मिला तो फिर
हाथ दु'आ से यूँ गिरा भूल गया सवाल भी


उस की सुख़न-तराज़ियाँ मेरे लिए भी ढाल थीं
उस की हँसी में छुप गया अपने ग़मों का हाल भी


गाह क़रीब-ए-शाह-रग गाह बईद-ए-वहम-ओ-ख़्वाब
उस की रफ़ाक़तों में रात हिज्र भी था विसाल भी


उस के ही बाज़ुओं में और उस को ही सोचते रहे
जिस्म की ख़्वाहिशों पे थे रूह के और जाल भी


शाम की ना-समझ हवा पूछ रही है इक पता
मौज-ए-हवा-ए-कू-ए-यार कुछ तो मिरा ख़याल भी

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

ऐसा लगता है जिन्दगी तुम हो.../ शायर : बशीर बद्र / गायन : काव्या लिमये

https://youtu.be/nUcSdta05Q


ऐसा लगता है जिन्दगी तुम हो
अजनबी कैसे अजनबी तुम हो

अब कोई आरज़ू नहीं बाक़ी
जुस्तजू मेरी आख़री तुम हो

(आरज़ू = इच्छा), (जुस्तजू = तलाश, खोज)

मैं ज़मीं पर घना अँधेरा हूँ
आसमानों की चांदनी तुम हो

दोस्तों से वफ़ा की उम्मीदें
किस ज़माने के आदमी तुम हो

गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

प्रातः - स्मरण स्तोत्रम् / आदिशंकराचार्य विरचित

https://youtu.be/DpHdEZCFk28. 



प्रातः स्मरामि हृदि संस्फुर्दात्मत्त्वं
सच्चित्सुखं परमहंसगतिं तुरीयम्।
यत्स्वप्नजागरसुषुपतिमवैति नित्यं
तद्ब्रह्म निष्कलमहं न च भूतसङ्घः ॥१॥

भोर में मुझे उस वास्तविकता की याद आती है जो आत्मा है, जो हृदय में चमक रही है, अस्तित्व-चेतना-खुशी, परमहंससंन्यासियों (संतों) का लक्ष्य, चौथा; जो स्वप्न, जाग्रत और सुषुप्ति की अवस्थाओं को सदैव जानता है, वह ब्रह्म जो अंशहीन है, मैं तत्वों का समूह नहीं हूं।

प्रातर्भाजामि मनसा वाचसामगम्यं
वाचो विभान्ति निखिला यदनुगृहेन।
यन्नेतिनेतिवचनैर्निग्मा अवोचं_
स्तं देवदेवमजमच्युतमाहुग्रग्र्यम् ॥२॥

भोर में मैं उसकी स्तुति गाता हूं जो मन और वाणी से अप्राप्य है, लेकिन जिसकी कृपा से सभी शब्द चमकते हैं। जिसे शास्त्र 'यह नहीं', 'यह नहीं' शब्दों के माध्यम से घोषित करते हैं - वे कहते हैं कि देवताओं का भगवान अजन्मा और अपरिवर्तनीय है।


प्रातर्नमामि तमसः परमर्कवर्णं
पूर्णं सनातनपदं उत्तमाख्यम्।
यस्मिन्निदं जगदशेषमशेषमूरतौ
रज्ज्वां भुजंगम इव प्रतिभासितं वै ॥३॥

भोर में मैं उसे नमस्कार करता हूं जिसे सर्वोच्च आत्मा कहा जाता है जो अंधेरे से परे है, सूर्य के रंग का प्राचीन लक्ष्य है जो पूर्णांक है - वह, अवशिष्ट रूप (यानी संपूर्ण) जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड रस्सी में सांप की तरह प्रकट होता है।

फलश्रुति

श्लोकत्रयमिदं पुण्यं लोकत्रयविभूषणम्।
प्रातःकाले पठेद्यस्तु स गच्छेत्परमं पदम् ॥

यह पुण्यकारी श्लोकों का त्रिक, तीन शब्दों का आभूषण - जो भोर में पढ़ता है, वह परम लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है।

बुधवार, 8 अप्रैल 2026

नवरत्नमालिका / आदि शंकराचार्य विरचित / स्वर : माधवी मधुकर झा

https://youtu.be/HLaVF2NZn0g  

हारनूपुरकिरीटकुण्डलविभूषितावयवशोभिनीं 
कारणेशवरमौलिकोटिपरिकल्प्यमानपदपीठिकाम् । 
काल काल फणिपाश बाण धनुर‌ङ्कुशाम् अरुण मेखलाम् 
फालभूतिलकलोचनां मनसि भावयामि परदेवताम् ॥१॥


गन्धसारघनसारचारुनवनागवल्लिरसवासिनीं 
सान्ध्यरागमधुराधराभरणसुन्दराननशुचिस्मिताम् । 
मन्थरायतविलोचनाममलबालचन्द्रकृतशेखरीं 
इन्दिरारमणसोदरीं मनसि भावयामि परदेवताम् ॥२।।


स्मेरचारुमुखमण्डलां विमलगण्डलम्बिमणिमण्डलां 
हारदामपरिशोभमानकुचभारभीरुतनुमध्यमाम् । 
वीरगर्वहरनूपुरां विविधकारणेशवरपीठिकां 
मारवैरिसहचारिणीं मनसि भावयामि परदेवताम् ॥३॥


भूरिभारधरकुण्डलीन्द्रमणिबद्धभूवलयपीठिकां 
वारिराशिमणिमेखलावलयवह्निमण्डलशरीरिणीम् ।
वारिसारवहकुण्डलां गगनशेखरीं च परमात्मिकां 
चारुचन्द्ररविलोचनां मनसि भावयामि परदेवताम् ॥४॥


कुण्डलत्रिविधकोणमण्डलविहारषड्दलसमुल्लस- 
त्पुण्डरीकमुखभेदिनीं तरुणचण्डभानुतडिदुज्ज्वलाम् । 
मण्डलेन्दुपरिवाहितामृततरङ्गिणीमरुणरूपिणीं 
मण्डलान्तमणिदीपिकां मनसि भावयामि परदेवताम् ॥५॥


वारणाननमयूरवाहमुखदाहवारणपयोधरां 
चारणादिसुरसुन्दरीचिकुरशेखरीकृतपदाम्बुजाम् । 
कारणाधिपतिपञ्चकप्रकृतिकारणप्रथममातृकां 
वारणान्तमुखपारणां मनसि भावयामि परदेवताम् ॥६॥


पद्मकान्तिपदपाणिपल्लवपयोधराननसरोरुहां 
पद्मरागमणिमेखलावलयनीविशोभितनितम्बिनीम् । 
पद्मसम्भवसदाशिवान्तमयपञ्चरत्नपदपीठिकां 
पद्मिनीं प्रणवरूपिणीं मनसि भावयामि परदेवताम् ॥७॥


आगमप्रणवपीठिकाममलवर्णमङ्गलशरीरिणीं 
आगमावयवशोभिनीमखिलवेदसारकृतशेखरीम् । 
मूलमन्त्रमुखमण्डलां मुदितनादबिन्दुनवयौवनां 
मातृकां त्रिपुरसुन्दरीं मनसि भावयामि परदेवताम् ॥८॥


कालिकातिमिरकुन्तलान्तघनभृङ्गमङ्गलविराजिनीं 
चूलिकाशिखरमालिकावलयमल्लिकासुरभिसौरभाम् । 
वालिकामधुरगण्डमण्डलमनोहराननसरोरुहां 
कालिकामखिलनायिकां मनसि भावयामि परदेवताम् ॥९॥

रविवार, 22 मार्च 2026

मत जा, मत जा, जोगी.../ मीराबाई / गायन : संध्या राव

https://youtu.be/uAWn21bTc5c?si=1QRGh7K4LkOKuMW9

मत जा, मत जा, जोगी, 
पाँव पढ़ूँ मैं तोरे, पाँव पढ़ूँ मैं तोरे,
मत जा, मत जा, जोगी, जोगी, जोगी 

प्रेम भक्ति को पंथ ही न्यारो, 
हम को गैल(रास्ता) बता जा जोगी 
पाँव पढ़ूँ मैं तोरे, पाँव पढ़ूँ मैं तोरे,
मत जा, मत जा, जोगी, जोगी, जोगी 

अगर चंदन की चिता बनाऊँ, 
अपने हाथ जला जा जोगी, जोगी 
पाँव पढ़ूँ मैं तोरे, पाँव पढ़ूँ मैं तोरे,
मत जा, मत जा, जोगी, जोगी, जोगी 

जल जल भयी भस्म की ढेरी, 
अपने अंग लगा जा जोगी 
पाँव पढ़ूँ मैं तोरे, पाँव पढ़ूँ मैं तोरे,
मत जा, मत जा, जोगी, जोगी, जोगी 

मीरा कहे प्रभि गिरधर नगर, 
ज्योत से ज्योत मिला जा जोगी 
पाँव पढ़ूँ मैं तोरे, पाँव पढ़ूँ मैं तोरे,
मत जा, मत जा, जोगी, जोगी, जोगी 
मत जा, मत जा, जोगी, जोगी, जोगी

शुक्रवार, 6 मार्च 2026

जीवन के ७६वें वर्ष में प्रवेश...

ईश्वर की कृपा, पूर्वजों के आशीर्वाद, परिवार के स्नेह तथा मित्रों की शुभेच्छाओं के सम्बल पर मैं इस चैत्र कृष्ण चतुर्थी, विक्रम संवत २०८२, आंग्ल दिनांक ०६ मार्च, २०२६ को जीवन के ७५ वर्ष पूर्ण कर रहा हूँ।

सभी का स्नेह-आशीर्वाद अपेक्षित है।🙏

रश्मि-रेख के 5,33,809 पेज व्यूज के लिए कृपापूर्वक ब्लॉग तक पधारे अतिथियों का आभार। 

-अरुण मिश्र 

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