https://youtu.be/aw83W-y-0_A?si=0KR35wVa7YNXjbIr
शुक्रवार, 12 जून 2026
गुरुवार, 11 जून 2026
मन अटक्या बेपरवाह दे नाल.../ शाह हुसैन फकीर / वडाली बन्धु
https://youtu.be/-qk67qMDuaM
One of the original renditions of Mann Atkeya Beparwah, immortalized by the legendary Wadali Brothers -
तू सुत्ता रब जागदा, तेरी ढाढ़े नाल परीत
"Awaken Fareed, and go broom the mosque.
You’re asleep while your Lord, whom you so dearly love, is awake."
मन अटक्या बेपरवाह दे नाल
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल
My soul is entangled with the indifferent one
Lord of all things visible and invisible
क़ाज़ी मुल्ला मत्ती दैन्दे
ख़रय सियाने राह दसेंदे
इश्क़ की लागे राह दे नाल
Judges and clerics are full of advice,
The righteous and wise show you the path,
But love itself needs no guidance
नदियों पार रांझन दा थाना
कीते क़ोल ज़रूरी जाना
मिंतां कर्रन मल्लाह दे नाल
Ranjha’s dwelling is across the stream,
Having given my word, I must go
I will beseech the boatman
कहे हुसैन फ़क़ीर साईं दा
दर ते छोलियां अद्दियां में
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल
I am a novice, what do I know of committed love?
The separation pulls at my sinews
Says Hussain, Gods faqir, I spread my robe before you
Lord of all things visible and invisible
कहे हुसैन फ़क़ीर नुमांरहा
सच्चे साहिब नू में जाना
औरहक कम अल्लाह दे नाल
Says Hussain, the worthless faqir,
I know the true Lord
In the end I will meet my Creator
𝗧𝗵𝗲 𝗪𝗮𝗱𝗮𝗹𝗶 𝗕𝗿𝗼𝘁𝗵𝗲𝗿𝘀 - Ustad Puranchand Wadali And Late Ustad Pyarelal Wadali, Rendering Soulful Poetry Of Shah Hussain Sufi Poet Of 𝗣𝘂𝗻𝗷𝗮𝗯𝗶 In Their Mystical Style “The Punjabi Sufi Music And Classic Folk Gayaki Of Punjab At Its Very Best, Pure Classicism Of This Kind Rarely Heard These Days.
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल
मेरी आत्मा समस्त दृश्य एवं अदृश्य वस्तुओं के उदासीन स्वामी से बंधी हुई है।
वसदी हरदम मन मेरे विच, सूरत यार प्यारे दी
अपने शाह नू आप रजावां, हाजत नई पसराय दी
काहे हुसैन फकीर नुमान्हा, थीवां खाक दवारे दी
प्रियतम की छवि मेरी आत्मा में निरंतर बसी रहती है।
मैं केवल अपने प्रेम को ही प्रसन्न कर सकता हूँ, मुझे किसी दिखावे की आवश्यकता नहीं है।
निकम्मे फकीर हुसैन कहते हैं, मैं तुम्हारे द्वार की धूल हूँ।
मन अटक्या बेपरवाह दे नाल
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल
मेरी आत्मा समस्त दृश्य एवं अदृश्य वस्तुओं के उदासीन स्वामी से बंधी हुई है।
क़ाज़ी मुल्ला मत्ती दैन्दे
ख़रय सियाने राह दसेंदे
इश्क़ की लागे राह दे नाल
न्यायाधीश और धर्मगुरु सलाहों से परिपूर्ण हैं,
धर्मी और बुद्धिमान लोग आपको मार्ग दिखाते हैं,
परन्तु प्रेम को स्वयं किसी मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं होती।
मेरी आत्मा उदासीन व्यक्ति से बंधी हुई है
नदियों पार रांझन दा थाना
कीते क़ोल ज़रूरी जाना
मिंतां कर्रन मल्लाह दे नाल
रांझा का घर नदी के उस पार है,
मैंने वचन दे दिया है, मुझे जाना ही होगा,
मैं नाविक से विनती करूँगा।
मन अटक्या बेपरवाह दे नाल
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल
मेरी आत्मा समस्त दृश्य एवं अदृश्य वस्तुओं के उदासीन स्वामी से बंधी हुई है।
साजन बिन रतन होइयां वड्डियां
रांझा जोगी में जोगियाणी
कमली कर कर सद्दियां
साजन बिन रतन होइयां वड्डियां
में हन अयानी नूह की जाणा
बिरहोन तनावां गड्डियां
मेरे प्रियतम के बिना रातें लंबी लगती हैं,
रांझा एक संत है और मैं उसका अनुयायी हूँ।
उसने मुझे बेसुध कर दिया है।
कहे हुसैन फ़क़ीर सईं दा
डर ते छोलियां अद्दियां में
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल
मैं तो नौसिखिया हूँ, मुझे सच्चे प्रेम का क्या ज्ञान है?
जुदाई मेरे शरीर को जकड़ लेती है।
हुसैन, अल्लाह के फ़कीर, कहते हैं, मैं आपके सामने अपना वस्त्र बिछाता हूँ,
हे समस्त दृश्य और अदृश्य वस्तुओं के स्वामी।
मेरी आत्मा उदासीन व्यक्ति से बंधी हुई है
कहे हुसैन फ़क़ीर नुमांरहा
सच्चे साहिब नू में जाना
औरहक कम अल्लाह दे नाल
हुसैन, निकम्मे फकीर, कहते हैं,
मैं सच्चे ईश्वर को जानता हूँ।
अंत में मैं अपने सृष्टिकर्ता से मिलूंगा।
मन अटक्या बेपरवाह दे नाल
उस दीन दुनी दे शाह दे नाल
मेरी आत्मा समस्त दृश्य एवं अदृश्य वस्तुओं के उदासीन स्वामी से बंधी हुई है।
बुधवार, 10 जून 2026
रघुपति राघव राजाराम.../ श्री लक्ष्माचार्य कृत / स्वर : अरुणा साईराम
https://youtu.be/7V5dQnLtaus
पतित पावन सीताराम ॥
सुंदर विग्रह मेघश्याम
गंगा तुलसी शालग्राम ॥
रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥
भद्रगिरीश्वर सीताराम
भगत-जनप्रिय सीताराम ॥
रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥
जानकीरमणा सीताराम
जयजय राघव सीताराम ॥
रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥
रघुपति राघव राजाराम
पतित पावन सीताराम ॥
शुक्रवार, 5 जून 2026
घाट पर ठाड़े श्री मदनगोपाल.../ गायन : मुदिता एवं रुचिता जमरिया
https://youtu.be/WIKkpp2liSU?si=O2Q6KbL6F3BqdqKl
कौन युक्ति कर भरों री यमुनाजल पर्यो है हमारे ख्याल ।।
घोस बढ़्यो घर सास रिसैहै चल न सकत एक चाल ।
कहा करुं अब यो नहीं मानत सुंदर नंदको लाल ।।
कछुक संकोच कछु चोप मिलन की परी प्रेम की जाल ।
परमानंद स्वामी चित चोर्यों वेणु बजाय रसाल ।।
कण्डु कण्डु नियन्ना.../ संत पुरंदर दासर कृति / गायन : सुषमा अनिल / भाषा: कन्नड़
https://youtu.be/92RwKoSfukI?si=l1jzfH3Du9jSiuQa
कण्डु कण्डु नियन्ना कइया बिदुवारे पुंडरीकाक्ष पुरूषोत्तम हरे
चरणम् १
बन्धुगालू एनगिला बदुकिनाली सुखविल्ला निन्देयली नन्देनै निराजाक्ष
तन्दे तैय्यु निने बन्धु बालगावु नी इने एंडेन्डिगु निन्ना नम्बिडेनो कृष्ण
चरणम् २
केसनवोन्दु युगावगि त्रनकिन्त कादेयि एनिसलआरादा भवाडी नोंदे नानु
सनकादि मुनि वन्द्या वनज संभव जनक फणिशायी प्रह्लादगोलिड श्री कृष्ण
चरणम् ३
भक्तवत्सलनेम्ब बिरुड़ पोट्टा मेले भक्तअधिनानगिरा बेदावे
मुक्ति दायक निनु होन्नुरु पूर्वसा शाक्त गुरु पुरंदर विट्ठल श्री कृष्ण
Meaning:
C1:
C2:
C3:
पर्यावरण वन्दना.../ कविता / अरुण मिश्र
https://youtu.be/pc4LKrM5qH4
धरा के पर्यावरण की।।
झर रहे निर्झर सुरीले,
और नदियाँ बहें कल-कल।
ताल, पोखर, झील, सागर,
हर तरफ है, नीर निर्मल।।
चर-अचर जिसमें सुरक्षित,
स्नेहमय उस आवरण की।।
मन्द, मन्थर पवन शाीतल;
आँधियों का तीव्रतर स्वर।
सर्वव्यापी वायु पर ही,
प्राणियों की साँस निर्भर।।
जीव-जग-जीवनप्रदायिनि-
प्रकृति के, शुभ आचरण की।।
अन्न के भण्डार दे भर,
भूमि उर्वर, शस्य-श्यामल।
भूख सबकी मेटने को-
वृक्ष, फलते हैं मधुर फल।।
माँ धरा की गोद के,
इस मोदमय वातावरण की।।
*
(काव्य-संग्रह 'कस्मै देवाय' से साभार)
गुरुवार, 4 जून 2026
श्री कृष्णाष्टकं.../ आदि शंकराचार्य कृत/ गायन : गीता, कल्पिता एवं श्रुति उपासनी
आदि शंकराचार्य द्वारा रचित श्री कृष्णाष्टक भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति का एक अत्यंत दिव्य स्रोत है। इसमें आठ श्लोक हैं जो उनकी मनमोहक छवि, लीलाओं और महिमा का वर्णन करते हैं।
श्लोक १
भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव नन्दनन्दनम् ।
सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं अनंगरंगसागरं नमामि कृष्णनागरम् ॥१॥
अर्थ: जो ब्रजभूमि के एकमात्र आभूषण हैं, समस्त पापों को नष्ट करने वाले हैं और अपने भक्तों के चित्त को आनंदित करने वाले हैं, उन नंदनन्दन (नंद के पुत्र) का मैं सदा भजन करता हूँ। जिनके मस्तक पर सुंदर मोर मुकुट है, हाथों में सुरीली बांसुरी है और जो कामदेव के समान सौंदर्य के सागर हैं, उन चतुर श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।
श्लोक २
मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम् ।
करारविन्दभूधरं स्मतावलोकसुन्दरं महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णवारणम् ॥२॥
अर्थ: जो कामदेव के अहंकार को नष्ट करने वाले हैं, विशाल और चंचल नेत्रों वाले हैं तथा ग्वालों के कष्टों को दूर करने वाले हैं, उन कमल नयन (पद्मलोचन) श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ। जिन्होंने अपने कमल रूपी हाथों से गोवर्धन पर्वत को धारण किया, जिनकी मंद मुस्कान अत्यंत सुंदर है तथा जिन्होंने देवराज इंद्र के मान (अहंकार) को तोड़ा था, उन नटखट कृष्ण को मेरा प्रणाम है।
श्लोक ३
कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं व्रजाङ्गनाङ्कवल्लभं नमामि कृष्णदुर्लभम् ॥३॥(पंक्ति का तीसरा चरण)
यशोषया समोदया सगोपया सनन्दया युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम् ॥३॥
अर्थ: जिनके कानों में कदम्ब के फूलों के कुण्डल हैं, जिनके गाल अत्यंत आकर्षक हैं, जो ब्रज की गोपियों के प्रियतम हैं और जो बड़े-बड़े देवताओं को भी दुर्लभ हैं, उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ। जो यशोदा माता के साथ अत्यंत प्रसन्न हैं, गोपगणों और नंदजी से घिरे हुए हैं और भक्तों को एकमात्र आनंद प्रदान करने वाले हैं, उन गोपों के नायक को मैं नमन करता हूँ।
श्लोक ४
सदैव पादपङ्कजं मदीयमानसे निजं दधानमुत्तमालकं नमामि नन्दबालकम् ।
समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणं समस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम् ॥४॥
अर्थ: जिनके चरण कमल सदैव मेरे मन में बसे रहते हैं, जो घुंघराले बालों से सुशोभित हैं, उन नन्दबालक को मैं प्रणाम करता हूँ। जो सभी दोषों/बुराइयों का नाश करने वाले हैं, समस्त लोकों का पोषण करने वाले हैं और सभी ग्वालों के मन में निवास करने वाले हैं, उन नंदलाल को मैं नमन करता हूँ।
श्लोक ५
भुवोभरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं यशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम् ।
दृगन्तकान्तभङ्गिनं सदासदालसङ्गिनं दिने दिने नवं नवं नमामि नन्दसंभवम् ॥५॥
अर्थ: जो पृथ्वी का भार उतारने वाले और संसार रूपी सागर से पार लगाने वाले (नाविक) हैं, यशोदा माता के दुलारे हैं और भक्तों के चित्त को चुराने वाले हैं, उन्हें मेरा प्रणाम। जिनकी तिरछी और सुंदर चितवन मन मोह लेती है, जो भक्तों के सदा संग रहते हैं और जो प्रतिदिन नए और मनोहर प्रतीत होते हैं, उन नंदनंदन को मैं नमन करता हूँ।
श्लोक ६
वराङ्गकल्कशोभितं गलेचलद्विनिर्जितं लसन्नखन्दुभासुरं नमामि कृष्णसुन्दरम् ।
समस्तगोपनन्दनं हृदम्बुजैकनन्दनं व्रजाङ्गनामनोहरं नमामि कृष्णसुन्दरम् ॥६॥
अर्थ: जिनके अंग सुगंधित लेप से सुशोभित हैं, गले में मोतियों की माला और आभूषण झिलमिलाते हैं और जिनके नख चंद्रमा के समान चमकते हैं, उन परम सुंदर श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ। जो सभी गोप-बालकों को आनंदित करने वाले हैं, सबके हृदय रूपी कमल में वास करने वाले हैं और ब्रज की स्त्रियों का मन मोह लेने वाले हैं, उन सुंदर कृष्ण को मेरा नमन है।
श्लोक ७
पिनाङ्कपाणिमण्डलं सदाविकासिसद्गुणं जगत्त्रयाकतारकं नमामि कृष्णतत्त्वम् ॥७॥
अर्थ: जो अपने हाथों में मुरली धारण किए रहते हैं, जिनके दिव्य गुण सदा विकसित रहते हैं और जो तीनों लोकों का उद्धार करने वाले हैं, उस परमतत्त्व रूपी श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।
श्लोक ८
कृष्णाष्टकमिदं पुण्यं प्रातरुत्थाय यः पठेत् ।
कोटिजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥८॥
अर्थ: इस पवित्र 'कृष्णाष्टकम्' का जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर पाठ करता है, उसके करोड़ों जन्मों के पाप केवल इसके स्मरण मात्र से ही नष्ट हो जाते हैं।
बुधवार, 3 जून 2026
कोई तनहाई का एहसास दिलाता है मुझे.../ शायर : शाज़ तमकनत / गायन : वन्दना श्रीनिवासन
मैं बहुत दूर हूँ नज़दीक बुलाता है मुझे
मैं ने महसूस किया शहर के हंगामे में
कोई सहरा में है, सहरा में बुलाता है मुझे
तू कहाँ है कि तिरी ज़ुल्फ़ का साया साया
हर घनी छाँव में ले जा के बिठाता है मुझे
ऐ मिरे हाल-ए-परेशाँ के निगह-दार ये क्या
किस क़दर दूर से आईना दिखाता है मुझे
ऐ मकीन-ए-दिल-ओ-जाँ मैं तिरा सन्नाटा हूँ
मैं इमारत हूँ तिरी किस लिए ढाता है मुझे
रहम कर मैं तिरी मिज़्गाँ पे हूँ आँसू की तरह
किस क़यामत की बुलंदी से गिराता है मुझे
'शाज़' अब कौन सी तहरीर को तक़दीर कहूँ
कोई लिखता है मुझे कोई मिटाता है मुझे
शनिवार, 30 मई 2026
मिर्जापुर कइले गुलज़ार कचौड़ी गली सून कइले बलमू.../ गायन : डाॅ सोमा घोष
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय बनारस की कचौड़ी गली से एक क्रांतिकारी को रात तब पकड़ लिया जब वह अपनी प्रेयसी के साथ था। उसे पकड़ कर वे बनारस के पास एक शहर है मिर्जापुर, वहाँ ले गए। वहाँ से फिर उसे सजा देकर काला पानी (रंगून) भेज दिया। जहाँ से वह कभी न लौट सके!
यहाँ कचौड़ी गली में उसकी प्रेयसी तड़प उठी। उसने उसके विरह में घर बार त्याग दिया और संन्यासिन की तरह विचरने लगी। जब थोड़ा उसे देह और आत्मा की सच्चाई का कुछ भान हुआ तो उसने अपनी विरह पीड़ा को निर्गुण भजन में लोकगीत की प्रख्यात कजरी शैली में लिपिबद्ध किया है। इसे मशहूर ठुमरी गायिका गौहर जान ने बड़े दिल से गाया है।
मिर्जापुर कैले गुलजार हो,
कचौड़ी गली सून कैले बलमू
एही मिर्जापुर से उड़ेले जहजिया,
सैंया चल गइले रंगून हो,
कचौड़ी गली सून कैले बलमू
पनवा से पातर भइल तोर धनिया,
देहिया गलेला जइसे नून हो,
कचौड़ी गली सून कैले बलमू
शुक्रवार, 29 मई 2026
बड़ा जबरदस्त उसका इन्तजाम है... / फिल्म : कण कण में भगवान (१९६३) / गायक : महेंद्र कपूर / संगीत : पंडित शिवराम/ गीतकार : भारत व्यास
https://youtu.be/ZMB8mqS6sPA?si=H-nTT5kKLLkvapR5
बस उसी का काम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है
रात को ही रात परभात को परभात
शाम ही को शाम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है
ये दुनिया बनाना और बनाके फिर चलाना
बस उसी का काम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है
जल पे है थल और थल पे आसमान है
फिर भी एक दुजे पे न बोझ के समान है
जल पे है थल और थल पे आसमान है
फिर भी एक दुजे पे न बोझ के समान है
गजब का ये जहान है
बिन खम्बे का मकान है
गजब का ये जहान है
बिन खम्बे का मकान है
जहा का एक एक तन उसका गुलाम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है
ये दुनिया बनाना और बनाके फिर चलाना
बस उसी का काम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है
सूर्य चंदर तारे अपने धरम से न टल सके
इंसान की मजाल क्या जो उसका क्रम बदल सके
सूर्य चंदर तारे अपने धरम से न टल सके
इंसान की मजाल क्या जो उसका क्रम बदल सके
इक फूल भी खिले नहीं एक पत्ता भी हिले नहीं
इक फूल भी खिले नहीं एक पत्ता भी हिले नहीं
सारे जहाँ की उसके हाथ में लगाम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है
ये दुनिया बनाना और बनाके फिर चलाना
बस उसी का काम है
बड़ा जोरदार उसका इंतज़ाम है
हो बड़ा जबर दस्त उसका इंतज़ाम है
रविवार, 24 मई 2026
मैं तो सांवरे के रंग राची.../ मीराबाई / गायन : शैला हट्टंगणी
https://youtu.be/nk_vqliI5wU?si=YvC3Uu8ZqNoS6Kp
मैं तो सांवरे के रंग राची।
साजि सिंगार बांधि पग घूंघरू, लोक-लाज तजि नाची।।
गई कुमति, लई साधुकी संगति, भगत रूप भइ सांची।
गाय गाय हरि के गुण निसदिन,कालव्यालसूं बांची।।
उण बिन सब जग खारो लागत, और बात सब कांची।
मीरा श्रीगिरधरन लालसूं, भगति रसीली जांची।।
गुरुवार, 21 मई 2026
एक तो नैनाँ कजरारे और तिस पर डूबे काजल में.../ शायर : जां निसार अख़्तर / संगीत : जय देव / गायन : शैला हट्टंगड़ी
https://youtu.be/Hs0jM7xCNow?si=mdnHVmBa3nqLeVaZ
एक तो नैनाँ कजरारे और तिस पर डूबे काजल में
बिजली की बढ़ जाए चमक कुछ और भी गहरे बादल में
आज ज़रा ललचाई नज़र से उस को बस क्या देख लिया
पग-पग उस के दिल की धड़कन उतरी आए पायल में
प्यासे प्यासे नैनाँ उस के जाने पगली चाहे क्या
तट पर जब भी जावे सोचे नदिया भर लूँ छागल में
आज पता क्या कौन से लम्हे कौन सा तूफ़ाँ जाग उठे
जाने कितनी दर्द की सदियाँ गूँज रही हैं पल पल में
हम भी क्या हैं कल तक हमको फिक्र सुखों की रहती थी
आज सुखों से घबराते हैं चैन मिले है हलचल में
बुधवार, 20 मई 2026
कोई चौदहवीं-रात का चाँद बन कर.../ शायर : अख़्तर आज़ाद / गायन : जगजीत सिंह
https://youtu.be/IAKOa0McuaI?si=CrtGFMfIH7bXwu9J
किसी से तो की होगी तुम ने मोहब्बत किसी को गले से लगाया तो होगा
लबों से मोहब्बत का जादू जगा के भरी बज़्म में सब से नज़रें बचा के
निगाहों के रस्ते से दिल में समा के किसी ने तुम्हें भी चुराया तो होगा
तुम्हारे ख़यालों की अँगनाइयों में मिरी याद के फूल महके तो होंगे
कभी अपनी आँखों के काजल से तुम ने मिरा नाम लिख कर मिटाया तो होगा
कभी आइने से निगाहें मिला कर जो ली होगी भरपूर अंगड़ाई तू ने
तो घबरा के ख़ुद तेरी अंगड़ाइयों ने तिरे हुस्न को गुदगुदाया तो होगा
निगाहों में शम-ए-तमन्ना जला कर तकी होंगी तुम ने भी राहें किसी की
किसी ने तो वा'दा किया होगा तुम से किसी ने तो तुम को रुलाया तो होगा
जुदा हो गया होगा जब कोई तुम से दिया होगा जब तुम को धोका किसी ने
हमारी वफ़ा याद आई तो होगी हमें अपने नज़दीक पाया तो होगा
सोमवार, 18 मई 2026
नवनीतचोरा नमो नमो.../ अन्नमाचार्य कृति / गायन : सिन्धु रागेश्वरी एवं सिवानन्द यसस्वी
https://youtu.be/TVQxun4tFBg?si=eRXl-QF9mdjOEA-N
पल्लवी
नवनीतचोरा नमो नमो
नव महिमार्णव नमो नमो
चरणम् १
हरि नारायण केशव अच्युत कृष्ण नरसिम्हा वामन नमो नमो
मुराहर पद्मनाभ मुकुंद गोविंद नारायण नारायण नमो नमो
चरणम् २
निगम गोचार विष्णु नीरजाक्ष वासुदेव नागधर नंदगोप नमो नमो
त्रिगुणातीत देव त्रिविक्रम द्वारका नगराधि नायक नमो नमो
चरणम् ३
वैकुंठ रुक्मिणी वल्लभ चक्रधर नकेश वंदिता नमो नमो
श्रीकर गुणनिधि श्री वेंकटेश्वर नकाजनुता नमो नमो
Brief Meaning
The song translates to: "Salutations to the stealer of butter, salutations to the ocean of new and divine glories." The stanzas worship Lord Krishna in all his forms, including as Hari, Narayana, and Venkateshwara, as well as the protector of his devotees and the Lord of Dwaraka.
बुधवार, 6 मई 2026
वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा.../ शायरा : परवीन शाकिर
वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा
हम तो समझे थे कि इक ज़ख़्म है भर जाएगा
क्या ख़बर थी कि रग-ए-जाँ में उतर जाएगा
वो हवाओं की तरह ख़ाना-ब-जाँ फिरता है
एक झोंका है जो आएगा गुज़र जाएगा
वो जब आएगा तो फिर उस की रिफ़ाक़त के लिए
मौसम-ए-गुल मिरे आँगन में ठहर जाएगा
आख़िरश वो भी कहीं रेत पे बैठी होगी
तेरा ये प्यार भी दरिया है उतर जाएगा
मुझ को तहज़ीब के बर्ज़ख़ का बनाया वारिस
जुर्म ये भी मिरे अज्दाद के सर जाएगा
शनिवार, 2 मई 2026
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी.../ शायरा : परवीन शाकिर
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की
चाँद भी 'ऐन चैत का उस पे तिरा जमाल भी
सब से नज़र बचा के वो मुझ को कुछ ऐसे देखता
एक दफ़'अ तो रुक गई गर्दिश-ए-माह-ओ-साल भी
दिल तो चमक सकेगा क्या फिर भी तराश के देख लें
शीशा-गिरान-ए-शहर के हाथ का ये कमाल भी
उस को न पा सके थे जब दिल का 'अजीब हाल था
अब जो पलट के देखिए बात थी कुछ मुहाल भी
मेरी तलब था एक शख़्स वो जो नहीं मिला तो फिर
हाथ दु'आ से यूँ गिरा भूल गया सवाल भी
उस की सुख़न-तराज़ियाँ मेरे लिए भी ढाल थीं
उस की हँसी में छुप गया अपने ग़मों का हाल भी
गाह क़रीब-ए-शाह-रग गाह बईद-ए-वहम-ओ-ख़्वाब
उस की रफ़ाक़तों में रात हिज्र भी था विसाल भी
उस के ही बाज़ुओं में और उस को ही सोचते रहे
जिस्म की ख़्वाहिशों पे थे रूह के और जाल भी
शाम की ना-समझ हवा पूछ रही है इक पता
मौज-ए-हवा-ए-कू-ए-यार कुछ तो मिरा ख़याल भी
सोमवार, 27 अप्रैल 2026
ऐसा लगता है जिन्दगी तुम हो.../ शायर : बशीर बद्र / गायन : काव्या लिमये
https://youtu.be/nUcSdta05Q
अजनबी कैसे अजनबी तुम हो
अब कोई आरज़ू नहीं बाक़ी
जुस्तजू मेरी आख़री तुम हो
(आरज़ू = इच्छा), (जुस्तजू = तलाश, खोज)
मैं ज़मीं पर घना अँधेरा हूँ
आसमानों की चांदनी तुम हो
दोस्तों से वफ़ा की उम्मीदें
किस ज़माने के आदमी तुम हो
गुरुवार, 16 अप्रैल 2026
प्रातः - स्मरण स्तोत्रम् / आदिशंकराचार्य विरचित
https://youtu.be/DpHdEZCFk28.
प्रातः स्मरामि हृदि संस्फुर्दात्मत्त्वं
सच्चित्सुखं परमहंसगतिं तुरीयम्।
यत्स्वप्नजागरसुषुपतिमवैति नित्यं
तद्ब्रह्म निष्कलमहं न च भूतसङ्घः ॥१॥
भोर में मुझे उस वास्तविकता की याद आती है जो आत्मा है, जो हृदय में चमक रही है, अस्तित्व-चेतना-खुशी, परमहंससंन्यासियों (संतों) का लक्ष्य, चौथा; जो स्वप्न, जाग्रत और सुषुप्ति की अवस्थाओं को सदैव जानता है, वह ब्रह्म जो अंशहीन है, मैं तत्वों का समूह नहीं हूं।
प्रातर्भाजामि मनसा वाचसामगम्यं
वाचो विभान्ति निखिला यदनुगृहेन।
यन्नेतिनेतिवचनैर्निग्मा अवोचं_
स्तं देवदेवमजमच्युतमाहुग्रग्र्यम् ॥२॥
भोर में मैं उसकी स्तुति गाता हूं जो मन और वाणी से अप्राप्य है, लेकिन जिसकी कृपा से सभी शब्द चमकते हैं। जिसे शास्त्र 'यह नहीं', 'यह नहीं' शब्दों के माध्यम से घोषित करते हैं - वे कहते हैं कि देवताओं का भगवान अजन्मा और अपरिवर्तनीय है।
प्रातर्नमामि तमसः परमर्कवर्णं
पूर्णं सनातनपदं उत्तमाख्यम्।
यस्मिन्निदं जगदशेषमशेषमूरतौ
रज्ज्वां भुजंगम इव प्रतिभासितं वै ॥३॥
भोर में मैं उसे नमस्कार करता हूं जिसे सर्वोच्च आत्मा कहा जाता है जो अंधेरे से परे है, सूर्य के रंग का प्राचीन लक्ष्य है जो पूर्णांक है - वह, अवशिष्ट रूप (यानी संपूर्ण) जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड रस्सी में सांप की तरह प्रकट होता है।
फलश्रुति
श्लोकत्रयमिदं पुण्यं लोकत्रयविभूषणम्।
प्रातःकाले पठेद्यस्तु स गच्छेत्परमं पदम् ॥
यह पुण्यकारी श्लोकों का त्रिक, तीन शब्दों का आभूषण - जो भोर में पढ़ता है, वह परम लक्ष्य की ओर अग्रसर होता है।
बुधवार, 8 अप्रैल 2026
नवरत्नमालिका / आदि शंकराचार्य विरचित / स्वर : माधवी मधुकर झा
हारनूपुरकिरीटकुण्डलविभूषितावयवशोभिनीं
कारणेशवरमौलिकोटिपरिकल्प्यमानपदपीठिकाम् ।
काल काल फणिपाश बाण धनुरङ्कुशाम् अरुण मेखलाम्
फालभूतिलकलोचनां मनसि भावयामि परदेवताम् ॥१॥
गन्धसारघनसारचारुनवनागवल्लिरसवासिनीं
सान्ध्यरागमधुराधराभरणसुन्दराननशुचिस्मिताम् ।
मन्थरायतविलोचनाममलबालचन्द्रकृतशेखरीं
इन्दिरारमणसोदरीं मनसि भावयामि परदेवताम् ॥२।।
स्मेरचारुमुखमण्डलां विमलगण्डलम्बिमणिमण्डलां
हारदामपरिशोभमानकुचभारभीरुतनुमध्यमाम् ।
वीरगर्वहरनूपुरां विविधकारणेशवरपीठिकां
मारवैरिसहचारिणीं मनसि भावयामि परदेवताम् ॥३॥
भूरिभारधरकुण्डलीन्द्रमणिबद्धभूवलयपीठिकां
वारिराशिमणिमेखलावलयवह्निमण्डलशरीरिणीम् ।
वारिसारवहकुण्डलां गगनशेखरीं च परमात्मिकां
चारुचन्द्ररविलोचनां मनसि भावयामि परदेवताम् ॥४॥
कुण्डलत्रिविधकोणमण्डलविहारषड्दलसमुल्लस-
त्पुण्डरीकमुखभेदिनीं तरुणचण्डभानुतडिदुज्ज्वलाम् ।
मण्डलेन्दुपरिवाहितामृततरङ्गिणीमरुणरूपिणीं
मण्डलान्तमणिदीपिकां मनसि भावयामि परदेवताम् ॥५॥
वारणाननमयूरवाहमुखदाहवारणपयोधरां
चारणादिसुरसुन्दरीचिकुरशेखरीकृतपदाम्बुजाम् ।
कारणाधिपतिपञ्चकप्रकृतिकारणप्रथममातृकां
वारणान्तमुखपारणां मनसि भावयामि परदेवताम् ॥६॥
पद्मकान्तिपदपाणिपल्लवपयोधराननसरोरुहां
पद्मरागमणिमेखलावलयनीविशोभितनितम्बिनीम् ।
पद्मसम्भवसदाशिवान्तमयपञ्चरत्नपदपीठिकां
पद्मिनीं प्रणवरूपिणीं मनसि भावयामि परदेवताम् ॥७॥
आगमप्रणवपीठिकाममलवर्णमङ्गलशरीरिणीं
आगमावयवशोभिनीमखिलवेदसारकृतशेखरीम् ।
मूलमन्त्रमुखमण्डलां मुदितनादबिन्दुनवयौवनां
मातृकां त्रिपुरसुन्दरीं मनसि भावयामि परदेवताम् ॥८॥
कालिकातिमिरकुन्तलान्तघनभृङ्गमङ्गलविराजिनीं
चूलिकाशिखरमालिकावलयमल्लिकासुरभिसौरभाम् ।
वालिकामधुरगण्डमण्डलमनोहराननसरोरुहां
कालिकामखिलनायिकां मनसि भावयामि परदेवताम् ॥९॥
रविवार, 22 मार्च 2026
मत जा, मत जा, जोगी.../ मीराबाई / गायन : संध्या राव
पाँव पढ़ूँ मैं तोरे, पाँव पढ़ूँ मैं तोरे,
मत जा, मत जा, जोगी, जोगी, जोगी
प्रेम भक्ति को पंथ ही न्यारो,
पाँव पढ़ूँ मैं तोरे, पाँव पढ़ूँ मैं तोरे,
मत जा, मत जा, जोगी, जोगी, जोगी
अगर चंदन की चिता बनाऊँ,
अपने हाथ जला जा जोगी, जोगी
पाँव पढ़ूँ मैं तोरे, पाँव पढ़ूँ मैं तोरे,
मत जा, मत जा, जोगी, जोगी, जोगी
जल जल भयी भस्म की ढेरी,
अपने अंग लगा जा जोगी
पाँव पढ़ूँ मैं तोरे, पाँव पढ़ूँ मैं तोरे,
मत जा, मत जा, जोगी, जोगी, जोगी
मीरा कहे प्रभि गिरधर नगर,
ज्योत से ज्योत मिला जा जोगी
पाँव पढ़ूँ मैं तोरे, पाँव पढ़ूँ मैं तोरे,
मत जा, मत जा, जोगी, जोगी, जोगी
मत जा, मत जा, जोगी, जोगी, जोगी
शुक्रवार, 6 मार्च 2026
जीवन के ७६वें वर्ष में प्रवेश...
ईश्वर की कृपा, पूर्वजों के आशीर्वाद, परिवार के स्नेह तथा मित्रों की शुभेच्छाओं के सम्बल पर मैं इस चैत्र कृष्ण चतुर्थी, विक्रम संवत २०८२, आंग्ल दिनांक ०६ मार्च, २०२६ को जीवन के ७५ वर्ष पूर्ण कर रहा हूँ।
सभी का स्नेह-आशीर्वाद अपेक्षित है।🙏
रश्मि-रेख के 5,33,809 पेज व्यूज के लिए कृपापूर्वक ब्लॉग तक पधारे अतिथियों का आभार।
-अरुण मिश्र
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