मंगलवार, 11 अप्रैल 2023

क्रीम पाउडरा.../ कुमाऊँनी लोक गीत / रचना : पारम्परिक एवं राकेश खनवाल / गायन : राकेश खनवाल एवं माया उपाध्याय

 https://youtu.be/-r-PMDXH3as 

क्रीम पाउडरा घिसने किले ने,
-क्रीम पाउडर लगा क्यों नहीं रही हो?
मेरी निर्मला समझी किले ने
-मेरी निर्मला,समझ क्यों नहीं रही हो?
मेरी निर्मला समझी किले ने
-मेरी निर्मला, समझ क्यों नहीं रही
सबै नसगई ओनो किले ने ,
-सब चले गए हैं। आ क्यों नहीं रही हो?
मेरी निर्मला तु हिटनी किले ने
-मेरी निर्मला, तुम चल क्यों नहीं रही हो? (हिटनी -चलना)
मेरी निर्मला तु हिटनी किले ने
-मेरी निर्मला, तुम चल क्यों नहीं रही हो?

फीमेल -

क्रीम पाउडरा कावे लगो में ,
-क्रीम पाउडर मैं कहाँ से लगाऊँ?
नियोनी त्यार दगा का लारेछे तू
-तुम्हारे साथ नहीं आऊँगी, क्या करोगे तुम ?
सब नस गई तुले नसी जा
-सब चले गये हैं, तुम भी चले जाओ।
रोज कचकचा नी करा
-रोज ऐसी कच-कच न करो।

अंतरा - १
तैयार तू हैजा भागी
-प्रिये, तुम तैयार हो जाओ।
नी करे तू देर ला....
-देर मत करो।
म्यार संज्ञाति म्याल पूजी जाल
-मेरे साथी मेला पहुँच जायेंगे।
जल्दी बटी जा तू ला
-तुम जाओ जल्दी करो।
ओ त्वे के छोड़ बेरा कैसी के हीटूला
-तुम्हें छोड़ कर कैसे चला जाऊँ मैं ?
मेरी निर्मला हिटनी....
-मेरी निर्मला चलो...

अंतरा - २
नी भली यो साड़ी मिथे,
-न तो मेरी साड़ी ठीक है।
नी भलो चप्पला,
-न चप्पल ठीक है।
नी भली ख्वारा पिछोड़ी
-न बालों की पिछोड़ी ठीक है।
नी भला धम्याल
-न बालों में लगाने वाला धमेला ठीक है।
ओ भूतनी जैसी में कसीके हिटूलो
-ओ ! भूतनी जैसी कैसे चलूँ मैं ?
रोज कचकाचा नी...
-रोज कचकचा मत करो...

अंतरा - ३
हे म्याल में बे चूड़ियां लाली
-मेले में मैं खरीद दूँगा चूड़ियां, लाली
और बिंदुली कपाली
-और माथे की बिंदिया।
साड़ी बिलौज खवारा पिछोड़ी,
-साड़ी, ब्लाउज और बालों के लिये पिछोड़ी
और बालो धमेली
-और बालो को बाँधने के लिए धमेली।
ओ सामुस जलेबी तवे के खउलो
-और समोसा-जलेबी भी खिलाऊँगा।
मेरी निर्मला हिटनी..
-मेरी निर्मला चलो....

अंतरा -४
हाथे की चूड़ी कपाली बिंदुली
-हाथ की चूड़ी, माथे की बिंदुली,
पूरी श्रृंगार में हिनी ल्याला
-पूरा श्रंगार मुझे ले दोगे ?
कसमें तुम खाओ पेली
-पहले तुम कसम खाओ,
तब ओलो में तुम दगाडा
-तब तुम्हारे साथ चलूँगी।
आहा चरकी में मीके बैठा ला,
-आहा ! चरखी में मुझे बिठाओगे ?
फटा फट हिटो देर नी करा...
-फटाफट चलो, देर मत करो।
मेरी निर्मला हिटनी किले ने...
-मेरी निर्मला चलती क्यों नहीं?

शनिवार, 8 अप्रैल 2023

रघुनन्दन दीन दयाल हो तुम श्री राम तुम्हारी जय होवे.../ गीत एवं संगीत : धनञ्जय तिवारी एवं शक्ति सिंह / गायन : अगम अग्रवाल

 https://youtu.be/HwSufSlVzgg  

रघुनन्दन दीन दयाल हो तुम श्री राम तुम्हारी जय होवे...

रघुनंदन दीनदयाल हो तुम

श्री राम तुम्हारी जय होवे

राजा राम तुम्हारी जय होवे

दीनानाथ तुम्हारी जय होवे

रघुनाथ तुम्हारी जय होवे

सिया राम तुम्हारी जय होवे

रघुनंदन दीनदयाल हो तुम

श्री राम तुम्हारी जय होवे

राजा राम तुम्हारी जय होवे।।


इक मुकुट तुम्हारे सर सोहे

कानो में कुंडल मन मोहे

गुण-शील तुम्हारे जग जाने

रघुनाथ तुम्हारी जय होवे

राजा राम तुम्हारी जय होवे

रघुनंदन दीनदयाल हो तुम

श्री राम तुम्हारी जय होवे

राजा राम तुम्हारी जय होवे।।


हनुमान,भरत सब जन पालक

हो खर-दूषण दुर्जन घालक 

रणधीर, महा बलबीर हो तुम  

श्री राम तुम्हारी जय होवे

रघुनाथ तुम्हारी जय होवे

रघुनंदन दीनदयाल हो तुम

श्री राम तुम्हारी जय होवे

रघुनाथ तुम्हारी जय होवे।।


इस जग के पालनहार हो तुम 

भव सागर तारणहार हो तुम 

तुम इष्ट सभी के दाता हो 

रघुनाथ तुम्हारी जय होवे

श्री राम तुम्हारी जय होवे

रघुनंदन दीनदयाल हो तुम 

श्री राम तुम्हारी जय होवे

रघुनाथ तुम्हारी जय होवे।।


रघुनंदन दीनदयाल हो तुम 

रघुनंदन दीनदयाल हो तुम 

श्री राम तुम्हारी जय होवे

राजा राम तुम्हारी जय होवे।।

शुक्रवार, 7 अप्रैल 2023

वह शक्ति हमें दो दयानिधे.../ रचयिता : मुरारीलाल शर्मा 'बालबंधु' / गायन : विधि देशवाल

https://youtu.be/sr1MLKoDj6M

'वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्त्तव्य मार्ग पर डट जावें' 
नामक कविता के लेखक मुरारीलाल शर्मा बालबंधु थे। 
जिनका जन्म 1893 ई. में ग्राम 'साइमल की टिकड़ी' 
जिला मेरठ, उत्तर-प्रदेश में हुआ था।
आश्चर्य की बात ये कि इतनी ज्यादा लोकप्रिय प्रार्थना/कविता 
के लेखक के बारे में लोगों को पता नहीं है। इन्टरनेट पर 
भी इस कविता के लेखक के बारे में मतभेद पाया गया है। 
कई वेबसाइट्स पर लिखा है कि इसके लेखक 
मुरारीलाल शर्मा 'बालबंधु' थे परंतु कई विद्वानों ने कहा 
है कि ये कविता श्री परशुराम पान्डे जी द्वारा लिखित है। 
परशुराम पान्डे जी मध्यप्रदेश के रीवा जिले की गुढ तहसील 
में द्वारी ग्राम के निवासी थे। 

वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्त्तव्य मार्ग पर डट जावें। पर-सेवा पर-उपकार में हम, जग-जीवन सफल बना जावें॥ ॥ वह शक्ति हमें दो दयानिधे…॥ हम दीन-दुखी निबलों-विकलों के, सेवक बन संताप हरें। जो हैं अटके, भूले-भटके, उनको तारें खुद तर जावें॥ ॥ वह शक्ति हमें दो दयानिधे…॥ छल, दंभ-द्वेष, पाखंड-झूठ, अन्याय से निशिदिन दूर रहें। जीवन हो शुद्ध सरल अपना, शुचि प्रेम-सुधा रस बरसावें॥ ॥ वह शक्ति हमें दो दयानिधे…॥ निज आन-मान, मर्यादा का, प्रभु ध्यान रहे अभिमान रहे। जिस देश-जाति में जन्म लिया, बलिदान उसी पर हो जावें॥ ॥ वह शक्ति हमें दो दयानिधे…॥

गुरुवार, 6 अप्रैल 2023

बिंदिया का रंग उडा जाये.../ दादरा / राग : भैरवी / गायन : विदुषी मंजूषा कुलकर्णी पाटिल

 https://youtu.be/Nt878hVqhsk


बिंदिया का रंग उडा जाये...
दादरा
राग :भैरवी
शैली : ग्वालियर,आगरा घराना गायन : विदुषी मंजूषा कुलकर्णी पाटिल
तबला : पण्डित नयन घोष
Manjusha Kulkarni-Patil Manjusha Tai started her initial training under the guidance
of Pt. Chintubua Mhaiskar.Then she continued her taalim
from Pt. Kanebua of Ichalkaranji of Agra and Gwalior Gharana.
Currently she in honing her advanced skills under the able
guidance of Gantapasvi Padmashree Pt.Ulhas Kashalkar.
She has been gifted with a forceful & seasoned voice.
Tunefulness, confidence of rhythm, purity in exposition of Raga,
complex patterning of 'Taan', speed & clarity are a few other
highlights of her singing.

Pt. Nayan Ghosh
He is acclaimed worldwide for being the only maestro with a
superlative command on the Tabla and the Sitar. He received
his training in tabla, sitar and vocal from his father, the renowned
tabla maestro and guru, Padmabhushan Pt. Nikhil Ghosh.
He also received invaluable guidance from his father’s Guru,
the ‘Mt. Everest of Tabla’ Ustad Ahmed Jan Thirakwa.
Presently, Nayan Ghosh heads Sangit Mahabharati, one of
India’s premier music education and research institutions and
has been imparting advanced training to numerous young
aspiring musicians.

सुरज मुख ना जइबे,
रामा बिंदिया का रंग उडा जाये।
लाख टका की बिंदिया मोरी,
वो जो ननदी नजरिया लगाये,
रामा बिंदिया का रंग उडा जाये।
बिंदिया पहन मैं निकसी अंगनवा
वो जो देवरा नजरिया लगाये
रामा बिदिया का रंग उडा जाये।
बिंदिया पिया के जिया लुभाये,
वो जो मुखसे कहलो न जाये,
रामा बिंदिया का रंग उडा जाये।

बुधवार, 5 अप्रैल 2023

आधी-आधी रतिया के कुंहके कोयलिया.../ भोजपुरी पुरबी विरह गीत / रचना : स्वर्गीय महेन्दर मिसिर / गायन : चन्दन तिवारी

 https://youtu.be/zbULYoW-NoY 

आधी आधी रतिया के,
कुहके कोयलिया,
हाय राम !
राम बैरनिया रे भईले ना...
मोरा आँखिया के नीनिया।
राम बैरनिया भईले ना...

पिया परदेसिया,
ना पतिया पेठवलन ;
हाय राम !
राम अनेरिया भइले ना...
मोरा छतिया के कोरिया।

पुरुबा के देसवा गइले,
मतिया मरइले ;
निरमोहिया भइले ना...
कान्हा दगा देके गइले,
निरमोहिया भइले ना...

कहत महेन्दर मिसिर, 
कवन चूक भइलें ;
हो राम !
राम अन्हेरिया लागे ना... 
मोरा घरवा दुअरवा।  

मंगलवार, 4 अप्रैल 2023

महावीराष्टक-स्तोत्रम्‌ / कविवर श्री भागचंद जी कृत

https://youtu.be/rZLP2q5F_mY  

यदीये चैतन्ये मुकुर इव भावाश्चिदचिताः
समं भान्ति ध्रौव्य व्यय-जनि-लसन्तोऽन्तरहिताः।
जगत्साक्षी मार्ग-प्रकटन परो भानुरिव यो
महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(१)


अताम्रं यच्चक्षुः कमल-युगलं स्पन्द-रहितं
जनान्कोपापायं प्रकटयति वाभ्यन्तरमपि।
स्फुटं मूर्तिर्यस्य प्रशमितमयी वातिविमला
महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(२)


नमन्नाकेंद्राली-मुकुट-मणि-भा जाल जटिलं
लसत्पादाम्भोज-द्वयमिह यदीयं तनुभृताम्‌।
भवज्ज्वाला-शान्त्यै प्रभवति जलं वा स्मृतमपि
महावीर स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(३)


यदर्चा-भावेन प्रमुदित-मना दर्दुर इह
क्षणादासीत्स्वर्गी गुण-गण-समृद्धः सुख-निधिः।
लभन्ते सद्भक्ताः शिव-सुख-समाजं किमुतदा
महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(४)


कनत्स्वर्णाभासोऽप्यपगत-तनुर्ज्ञान-निवहो
विचित्रात्माप्येको नृपति-वर-सिद्धार्थ-तनयः।
अजन्मापि श्रीमान्‌ विगत-भव-रागोद्भुत-गतिः
महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(५)


यदीया वाग्गंगा विविध-नय-कल्लोल-विमला
बृहज्ज्ञानांभोभिर्जगति जनतां या स्नपयति।
इदानीमप्येषा बुध-जन-मरालैः परिचिता
महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(६)


अनिर्वारोद्रेकस्त्रिभुवन-जयी काम-सुभटः
कुमारावस्थायामपि निज-बलाद्येन विजितः
स्फुरन्नित्यानन्द-प्रशम-पद-राज्याय स जिनः
महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(७)


महामोहातंक-प्रशमन-परा-कस्मिन्भिषग्
निरापेक्षो बंधु र्विदित-महिमा मंगलकरः।
शरण्यः साधूनां भव-भयभृतामुत्तमगुणो
महावीर-स्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे॥(८)


महावीराष्टकं स्तोत्रं भक्त्या 'भागेन्दु' ना कृतम्।
यः पठे च्छ्रणुयाच्चापि स याति परमां गतिम्‌॥(९)

अर्थ 

जिस प्रकार सन्मुख समागम पदार्थ दर्पण में झलकते है, 
उसी प्रकार जिनके केवलज्ञान में समस्त जीव-अजीव अनंत 
पदार्थ उत्पाद-व्यय-ध्रौव्य | सहित युगपत् प्रतिभासित होते 
रहते है; तथा जिस प्रकार सूर्य लौकिक मार्गों को प्रकाशित 
करता है, उसी प्रकार मोक्षमार्ग को प्रकाशित करनेवाले जो 
जगत के ज्ञाता–दृष्टा हैं; वे भगवान महावीर मेरे ( हमारे ) 
नयनपथगामी हों अर्थात् मुझे ( हमें ) दर्शन दे।।१।।

स्पन्द (टिमकार ) और लालिमा रहित जिनके दोनों नेत्रकमल मनुष्यों 
को | बाह्य और अभ्यंतर क्रोधादि विकारों का प्रभाव प्रगट कर रहे हैं; 
और जिनकी मुद्रा स्पष्ट रूप से पूर्ण शान्त और अत्यंत विमल है; वे 
भगवान महावीर स्वामी मेरे ( हमारे ) नयनपथगामी हों अर्थात् मुझे 
( हमें ) दर्शन दे।।२।।

नम्रीभूत इन्द्रों के समूह के मुकुटों की मणियों के प्रभाजाल से जटिल 
( मिश्रित ) जिनके कान्तिमान दोनों चरणकमल, स्मरण करने मात्र से 
ही, शरीरधारियों की सांसारिक दुःख–ज्वालाओं का, जल के समान 
शमन कर देते | हैं; वे भगवान महावीर स्वामी मेरे ( हमारे ) नयनपथगामी 
हों अर्थात् मुझे | ( हमें ) दर्शन दे ।।३।।

जब पूजा करने के भाव मात्र से प्रसन्नचित्त मेढ़क ने क्षण भर में गुणगणों से 
समृद्ध सूख की निधि स्वर्गसंपदा को प्राप्त कर लिया, तब यदि उनके 
सद्भक्त मुक्ति-सुख को प्राप्त करलें तो कौनसा आश्चर्य हैं अर्थात् उनके 
सद्भक्त अवश्य ही मुक्ति को प्राप्त करेंगे। वे भगवान महावीर स्वामी मेरे 
( हमारे ) नयनपथगामी हों अर्थात् मुझे ( हमें ) दर्शन दे ।। ४ ।।

जो अंतरंग दृष्टि से ज्ञानशरीरी ( केवलज्ञान के पुज ) एवं बहिरंग दृष्टि से तप्त 
स्वर्ण के समान आभामय शरीरवान होने पर भी शरीर से रहित हैं; अनेक 
ज्ञेय उनके ज्ञान मे झलकते हैं - अतः विचित्र ( अनेक ) होते हुए भी एक 
(अखण्ड ) हैं; महाराजा सिद्धार्थ के पुत्र होते हुए भी अजन्मा हैं; और 
केवलज्ञान तथा समवशरणादि लक्ष्मी से युक्त होने पर भी संसार के राग से 
रहित हैं । इस प्रकार के आश्चर्यो के निधान वे भगवान महावीर स्वामी मेरे 
(हमारे ) नयनपथगामी हों अर्थात मुझे ( हमें ) दर्शन दे ।।५।।

जिनकी वाणीरूपी गंगा नाना प्रकार के नयरूपी कल्लोलों के कारण निर्मल हैं 
और अगाध ज्ञानरूपी जल से जगत की जनता को स्नान कराती रहती है तथा 
इस समय भी विद्वज्जनरूपी हंसों के परिचित है, वे भगवान महावीर स्वामी मेरे 
( हमारे ) नयनपथगामी हों अर्थात् मुझे ( हमें ) दर्शन दे ।।६।।

अनिर्वार हैं वेग जिसका और जिसने तीन लोकों को जीत लिया हैं, ऐसे 
कामरूपी सुभट को जिन्होने स्वयं आत्मबल से कुमारावस्था में ही जीत 
लिया हैं, परिणामस्वरूप जिनके अनन्तशक्ति का साम्राज्य एवं शाश्वतसुख 
स्फुरायमान हो रहा हैं; वे भगवान महावीर स्वामी मेरे ( हमारे ) 
नयनपथगामी हों अर्थात् मुझे (हमें ) दर्शन दे ।। ७ ।।

जो महा मोहरूपी रोग को शान्त करने के लिए निरपेक्ष वैद्य हैं, जो जीव मात्र के 
नि:स्वार्थ बन्धु हैं, जिनकी महिमा से सारा लोक परिचित हैं, जो महामंगल के 
करने वाले हैं, तथा भव-भय से भयभीत साधुओं को जो शरण हैं; वे उत्तम गुणो 
के धारी भगवान महावीर स्वामी मेरे ( हमारे ) नयनपथगामी हों अर्थात् मुझे 
( हमें ) दर्शन दे ।। ८ ।।

जो कविवर भागचंद द्वारा भक्तिपूर्वक रचित इस महावीराष्टक स्तोत्र का पाठ 
करता हैं व सुनता हैं, वह परमगति ( मोक्ष ) को पाता हैं।।। ९ ।।

रविवार, 2 अप्रैल 2023

प्रेम भोरे मोन रे गाहो रामकृष्णो नाम.../ गायन : अनिन्दिता चटर्जी

 https://youtu.be/54w9mzFYTiU  

प्रेम भोरे मोन रे गाहो रामकृष्णो नाम...
प्रेम भोरे मोनरे गाहो रामकृष्णो नाम
श्री रामकृष्ण नाम श्री रामकृष्णो नाम
प्रेम भोरे मोनरे गाहो रामकृष्णो नाम
श्री रामकृष्ण नाम श्री रामकृष्णो नाम
अन्तरे जोतन राखो मोनरे गाहो नाम।।
दीन काङालेर धाम रामकृष्णो नाम
श्री रामकृष्णो नाम श्री रामकृष्णो नाम
प्रेम भोरे मोनरे गाहो रामकृष्णो नाम
श्री रामकृष्णो नाम श्री रामकृष्णो नाम

एकइ बृन्त फूटिलोरे राधा कृष्णो श्याम
शिब कालि ब्रह्मा बिष्णु श्याम सीता राम
श्री रामकृष्णो नाम श्री रामकृष्णो नाम
प्रेम भोरे मोनरे गाहो रामकृष्णो नाम
श्री रामकृष्णो नाम श्री रामकृष्णो नाम

नाम ब्रह्म एकइ जेने मोनरे गाहो नाम
जनम मरण साथी रामकृष्णो नाम
नाम ब्रह्म एकइ जेने मोनरे गाहो नाम
जनम मरण साथी रामकृष्णो नाम
श्री रामकृष्णो नाम श्री रामकृष्णो नाम
प्रेम भोरे मोनरे गाहो रामकृष्णो नाम
श्री रामकृष्णो नाम श्री रामकृष्णो नाम
श्री रामकृष्णो नाम श्री रामकृष्णो नाम