शनिवार, 15 सितंबर 2018

अभियंता-दिवस पर विशेष...


श्री मोक्षगुण्डम विश्वेशरैया को कोटिशः नमन ...
अरुण मिश्र

अभियन्त्रण के हे ! महा-प्राण 
संरचना के हे ! अग्रदूत ।
निर्माण-कला-कौशलप्रवीण ;
इस मिटटी के सच्चे सपूत !!

अभियंताओं के शीर्ष-पुरुष !
भारत -भुवि के गौरव ललाम 

है कीर्ति तुम्हारी, अजर-अमर ;
यश-काया को शत-शत प्रणाम।।
                      *
(पूर्वप्रकाशित)

शुक्रवार, 14 सितंबर 2018

हिंदी-दिवस पर विशेष.......

कुछ तो हिंदी में बोलिए साहिब...


-अरुण मिश्र

कुछ तो हिंदी में बोलिए साहिब।
मन की गांठों को खोलिए साहिब।।

पाँच-तारे से निकल कर तो कभी।
गाँव - गलियों में डोलिए साहिब।।

फ़र्ज़ कुछ आप का भी बनता है।
अपना दिल तो टटोलिये साहिब।।

आप ने है बहुत तरक्की की।
आप गैरों के हो लिए साहिब।।

आप ने भी मनाया हिंदी-दिवस।
सब के संग थोड़ा रो लिए साहिब।।
                          *
(पूर्वप्रकाशित)

सोमवार, 3 सितंबर 2018

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष 

मधुराष्टक ( भावानुवाद ) 

-अरुण मिश्र. 

अधर  मधुर   है,   हास्य  मधुर  है,  वदन   मधुर  है,  नयन   मधुर है।
हृदय  मधुर  है,  गमन  मधुर  है,  मधुराधिपति  का  अखिल मधुर है॥

चरित   मधुर  है,  वचन   मधुर  है,  वलय  मधुर  है,  वसन  मधुर  है।
चाल मधुर है,   भ्रमण  मधुर है,  मधुराधिपति   का  अखिल  मधुर है॥

वेणु  मधुर,   पद-रेणु  मधुर,   शुभ-पाणि  मधुर,  मृदु-चरण  मधुर है।
नृत्य   मधुर  है,  सख्य  मधुर  है, मधुराधिपति  का  अखिल मधुर है॥

भोज्य  मधुर  है,   पान  मधुर   है,   गीत   मधुर  है,   शयन  मधुर  है।
तिलक  मधुर है,  रूप  मधुर  है,  मधुराधिपति   का  अखिल  मधुर है॥

कार्य  मधुर   है,   तरण  मधुर  है,   हरण   मधुर,   स्मरण   मधुर   है।
कथन  मधुर है,  शमन  मधुर  है,  मधुराधिपति  का  अखिल मधुर है॥

शिखा  मधुर   है,    हार  मधुर   है,    यमुना  मधुर,    तरंग   मधुर  है।
सलिल मधुर है,  कमल मधुर है,  मधुराधिपति  का  अखिल  मधुर है॥

लीला   मधुर,    गोपियां   मधुरा,    योग  मधुर   है,    भोग  मधुर   है।
मधुर  प्रेक्षण,   मधुर  आचरण,   मधुराधिपति   का  अखिल  मधुर है॥

गौयें   मधुर,   गोप   सब  मधुरा,   मधुर   लकुटिया,   सृष्टि   मधुर  है।
दलन मधुर, प्रतिफलन मधुर अति, मधुराधिपति का अखिल मधुर है॥
                                                              *
                                ( इति श्रीमद वल्लभाचार्य कृत मधुराष्टक संपूर्ण।) 



(पूर्वप्रकाशित)



रविवार, 2 सितंबर 2018

जन्माष्टमी पर विशेष


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क्या ख़ूब साँवले! हो

- अरुण मिश्र

जब चाँदनी खिली हो, और चाँद सामने हो।
देखूँ तुम्हें , न उसको , क्या ख़ूब साँवले! हो।।

भादों की बदलियाँ थीं, थी रैन भी अँधेरी।
आँगन में आ अचानक, तुम चाँद सा खिले हो।।

चितचोर हो, छलिया हो,फिर भी यकीं तुम्हीं पे।
ब्रज की दही से मीठे, तुम दूध के धुले हो।।

तुम राम हो,कान्हा हो,इस मिट्टी की ख़ुशबू हो।
हर साँस में रवां हो, अहसास में घुले हो।।

तुझ साँवरे सा उजला, देखा न ‘अरुन’ हमने।
गो-रस में छलकते हो, मक्खन में तुम सने हो।।
                                        *
(पूर्वप्रकाशित)

रविवार, 5 अगस्त 2018

शनिवार, 28 जुलाई 2018

अब्दुल कलाम............................श्रद्धांजलि


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श्रद्धांजलि
अब्दुल कलाम
भारत की प्रतिभा की प्रतिकृति,
भारत की मेधा प्रबल, मुखर।
भारत की आँखों के सपने,
भारतीय कंठ के गौरव-स्वर।।
चेहरे पर थीं सुन्दर आँखें ,
आँखों में थे सुन्दर सपने।
सपनों में था सुन्दर भविष्य,
तेरे संग स्वप्न बुने सब ने।।
सब की आँखों को सपना दे,
सबको दिखला कर नई डगर।
तुम चले गये हे महामना !
तज कर शरीर अपना नश्वर।।
हैं साश्रु नयन, अवरुद्ध गिरा,
नत-शीश समर्पित है सलाम।
युग-युग तक गूँजे भारत में
यह मधुर नाम 'अब्दुल कलाम’।।
*
-अरुणमिश्र २८/०७/२०१५

गुरुवार, 26 जुलाई 2018

कारगिल के वीर



A TRIBUTE TO MARTYRS OF KARGIL

कारगिल के वीर 

 -अरुण मिश्र

तुमने बज़्मे-जंग में 
छलकाये  अपने खूँ के जाम।
कारगिल के वीर तुमको, 
देश  का सौ-सौ सलाम।।

धूर्त   दुश्मन   जब  घुसा,  
घर  में  हमारे  चोर सा।
बंकरों   में  जब   हमारे    
ही    जमाया   मोरचा।
उसपे थीं लंदन की सिगरेट्स, 
तुम पे जूते तक नहीं।
लात फिर भी खा तुम्हारी,  
पैर  रख  सर  पर भगा।।

तुम हिमानी चोटियों पर 
टांक आये  अपना नाम।
कारगिल के वीर तुमको, 
देश  का सौ-सौ सलाम।।

वीरता   के  आवरण  में,  
शूरता   का   आचरण।
शत्रुओं  के  शीश  पर,  
शोभित हुये विजयी चरण।
देख कर  पुरुषार्थ, रण में   
मृत्यु  तक मोहित हुई।
डालकर जयमाल, जय का,  
कर  लिया तेरा वरण।।

उन शहीदों पर वतन के,  
है निछावर  ये कलाम।
कारगिल के वीर तुमको, 
देश का सौ-सौ सलाम।।

एक-एक, चोटी को तुमने,   
खून  से  सींचा जवान।
जान की बाज़ी लगा दी, 
औ' बचा ली माँ की आन।
है तेरी कुर्बानियों के रंग से   
रंगी हुई, 
आज की ये जश्ने-आजादी, 
तिरंगे की ये शान।।

सज गये गौरव-मुकुट से, 
भाल-भारत के ललाम।
कारगिल के वीर तुमको, 
देश  का सौ-सौ सलाम।।

                                        *
(संग्रह 'न जाने किन ज़मीनों से' से साभार )
२७ जुलाई , २०१५ को पूर्वप्रकाशित