सोमवार, 27 मई 2024

सीपिया बरन मंगलमय तन.../ स्वर्गीय भारत भूषण जी का गीत

https://youtu.be/V_0ZZzgfGVI  


सीपिया बरन मंगलमय तन,
जीवन दर्शन बांचते नयन। 
संस्कृत सूत्रों जैसी अलकें,
है भाल चन्द्रमा का बचपन।।
हल्के जमुनाए होठों पर,
दीये की लौ-सी मुस्कानें।
धूपिया कपोलों पर रोली से,
शुभम् लिखा चन्दरमा ने।
सम्मुख हो तो आरती सजी 
सुधि में हो तो चंदन-चंदन।।
वरदानों से उजले-उजले, 
कर्पूरी बाँहों के घेरे। 
ईंगुरी हथेली में जैसे, 
अंकित हों भाग्य-लेख मेरे। 
पल भर तो बैठो, बिखरा दूँ 
पूजा में अंजुरी भरे सुमन।।
साड़ी की सिकुड़न-सिकुड़न में,
किसने रच दी गंगा-लहरी। 
चितवन-चितवन ने पूरी है,
रंगोली सी गहरी-गहरी।
अवतरित हो रहे नख-शिख में,
सारे पावन, सारे शोभन।।

गुरुवार, 16 मई 2024

जय मैथिली, धरनी-सुता, सिया, जनक-तनया, जानकी.../ गायन : रंजना झा

सीता-नवमी पर विशेष :

https://youtu.be/egLSFNPFUpk


जय मैथिली, धरनी-सुता, सिया, जनक-तनया, जानकी।
जय भूमिजा, जनकात्मजा, प्राणप्रिया श्री राम की ।।
माण्डवी-उर्मिला भगिनी, अग्रजा श्रुतिकीर्ति की। 
सुनयना-मिथिलेश कन्या, अंक रघुवर वाम की ।।

दशरथ-कौशल्या की पुत्रवधू, जन्मदा लव-कुश की। 
भारत-लक्ष्मण भातृ-पत्नी, वरप्रदा हनुमान की। 
शत्रुघन की प्यारी भाभी, अवध-मिथिला शान की। 
सुमन तिरहुत के चमन की, माला अयोध्या-धाम की।

लक्ष्मीनिधि की दुलरी बहना, कुशध्वज की  भातृजा। 
अनुज माधव ज्ञान वर्धिनि, नाशिनी अज्ञान की

माँ मैथिली !
माँ जानकी !!

शुक्रवार, 10 मई 2024

ढूँढते फिरोगे लाखों में..../ स्वर्गीय भारत भूषण जी का गीत

 https://youtu.be/9sRDF_aPmeY 

जिस दिन भी बिछड़ गया प्यारे

ढूँढते फिरोगे लाखों में
फिर कौन सामने बैठेगा
बंगाली भावुकता पहने
दूरों दूरों से लाएगा
केशों को गंधों के गहने
ये देह अजंता शैली सी
किसके गीतों में सँवरेगी
किसकी रातें महकाएँगी
जीने के मोड़ों की छुअनें
फिर चाँद उछालेगा पानी
किसकी समुंदरी आँखों में

दो दिन में ही बोझिल होगा
मन का लोहा तन का सोना
फैली बाहों सा दीखेगा
सूनेपन में कोना कोना

अपने रुचि-रंगों का चुनाव 
किसके कपड़ों में टाँकोगे
अखरेगा किसकी बातों में
पूरी दिनचर्या ठप होना

दरकेगी सरोवरी छाती
धूलिया जेठ वैशाखों में

ये गुँथे गुँथे बतियाते पल
कल तक गूँगे हो जाएँगे
होंठों से उड़ते भ्रमर गीत
सूरज ढलते सो जाएँगे
जितना उड़ती है आयु परी
इकलापन बढ़ता जाता है
सारा जीवन निर्धन करके
ये पारस पल खो जाएँगे

गोरा मुख लिये खड़े रहना
खिड़की की स्याह सलाखों में

नोट : मैंने इस गीत को १९७० के दशक में रेडियो पर भारत भूषण जी 
के स्वर में सुना था। अद्भुत अनुभव था। उसकी छाप मन पर अमिट है। 
आज भी कानों में वह भावपूर्ण स्वर गूँजता है।  
वह ऑडियो खोज रहा हूँ पर कहीं मिल नहीं रहा है। किसी को मिले तो 
अवश्य सुनें। 

बुधवार, 8 मई 2024

सौ-सौ जनम प्रतीक्षा कर लूँ .../ स्वर्गीय भारत भूषण

 https://youtu.be/0l_qFx1CzeE

सौ-सौ जनम प्रतीक्षा कर लूँ 

प्रिय मिलने का वचन भरो तो ! 

पलकों-पलकों शूल बुहारूँ 

अँसुअन सींचू सौरभ गलियाँ 

भँवरों पर पहरा बिठला दूँ 

कहीं न जूठी कर दें कलियाँ 

फूट पडे पतझर से लाली 

तुम अरुणारे चरन धरो तो !

रात न मेरी दूध नहाई 

प्रात न मेरा फूलों वाला 

तार-तार हो गया निमोही 

काया का रंगीन दुशाला 

जीवन सिंदूरी हो जाए 

तुम चितवन की किरन करो तो ! 

सूरज को अधरों पर धर लूँ 

काजल कर आँजूँ अँधियारी 

युग-युग के पल छिन गिन-गिनकर 

बाट निहारूँ प्राण तुम्हारी 

साँसों की ज़ंजीरें तोड़ूँ 

तुम प्राणों की अगन हरो तो !

मंगलवार, 7 मई 2024

आई गयो फाग संभालो री चुनरिया.../ गायन : हेमा काण्डपाल

https://youtu.be/UmrPLbFY6Aw   

आयी गयो फाग,
कुँजन मा जे मोहन ठाढ़े,
मार रहे देखो भर पिचकरिया।।

राधा मोहन रास रचत हैं,
गोपियन की देखो उड़त चुनरिया।।

कुंकुम बदरी मा रंग फुहारें 
इंद्रधनुष छवि छाई सत रंगियाँ।। 

रविवार, 5 मई 2024

हँसि हँसि पनवा खियवले बेइमनवा...| भोजपुरी क्लासिक्स / गायन : दीपाली सहाय

https://youtu.be/JePkq2axC04 


ओ ऽ ऽ ऽ ऽ
हँसि हँसि पनवा खियवले बेइमनवा
हँसि हँसि पनवा खियवले बेइमनवा
कि अपना बसे रे परदेस
कोरी रे चुनरिया में दगिया लगाइ गइले
मारी रे करेजवा में ठेस 
हे ऽ ऽ ऽ ऽ
कजरी नजरिया से खेलइ रे बदरिया
कजरी नजरिया से खेलइ रे बदरिया
कि बरसइ रकतवा के नीर
दरदी के मारे छाइ जरदी चनरमा पे
गरदी मिली रे तकदीर
तकदीर दोहाई हऽ दोहाई हऽ
चढ़ते फगुनवा सगुनवा मनावइ गोरी
चइता करे रे उपवास
गरमी बेसरमी ना बेनिया डोलाये माने
डारे सँइया गरवा में फाँस
हो हँसि हँसि पनवा खियवले बेइमनवा
कि अपना बसे रे परदेस
कोरी रे चुनरिया में दगिया लगाइ गइले
मारी रे करेजवा में तीर

शनिवार, 4 मई 2024

अमवा महूअवा के झूमे डरिया.../ महेंदर मिसिर / गायन : दीपाली सहाय

https://youtu.be/tCzXEsv2YLw


अमवा महूअवा के झूमे डरिया
तनी ताकऽ ना बलमुआ हमार ओरिया

अमवा मोजरि गईलें महूआ कोताई गईलें
रसवा से भर गईल कुल डरिया

महूआ बिनन हम गईनी महूआ बगिया
रहिया जे छेंकले देवर पापिया

कोईली के बोली सुन मन बऊराई गईले
नही अईलें हमरो बलम रसिया