रविवार, 14 जून 2026

मैं गीत बेचकर घर आया.../ कवि : स्वर्गीय भारत भूषण

https://youtu.be/Y4QBJXGdpRM?si=s_IxrEZuFf21J3ys


मैं गीत बेचकर घर आया, सीमेंट ईंट लोहा लाया 
कवि-मन माया ने भरमाया, हे ईश्वर मुझे क्षमा करना !

जनमा था आँसू गाने को, खोया झूठी मुसकानों  में 
भीतर का सुख खोजता फिरा , बाहर से सजी दुकानों में 
मैं अश्रु बेचकर घर आया, प्लास्टिक के गुलदस्ते लाया 
अपनी आत्मा को बहकाया, हे ईश्वर मुझे क्षमा करना ! 

शब्दों-शब्दों सौंदर्य गढ़ा, नगरों-नगरों नीलाम किया 
संतों की संगत छोड़ किसी, वैश्या के घर विश्राम किया 
मैं प्यार  बेचकर घर आया, चुटकी भर सुविधाएँ लाया 
क्या करना था क्या कर आया, हे ईश्वर मुझे क्षमा करना ! 

सारे दागों को ढके रहा, छंदों की शिल्पित चादर से 
गोरे कागज काले करता, टेढ़े-मेढ़े हस्ताक्षर से 
मैं शर्म बेचकर घर आया, गहरे रंग का चश्मा लाया 
दर्पण पर परदा लटकाया हे ईश्वर मुझे क्षमा करना !

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