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सोमवार, 5 अक्टूबर 2015

तुम्हारा जन्म दिवस....

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तुम्हारा जन्म दिवस------

&अरुण मिश्र 

तुम्हारा जन्म दिवस
तुमको मुबारक साथी।

कि साथ&साथ गुज़ारी है
हमने उम्र तमाम।
तमाम ख़ुशियाँ मिलीं
और ग़म हुये हैं कम।
पिये हैं साथ मसर्रत के
छलकते हुये जाम।


तुम्हारा जन्म दिवस
तुमको मुबारक साथी।।


उम्र का क्या है \
ये तो यूँ ही बढ़ती जायेगी।
असल है ज़िन्दगी
जो लौट कर न आयेगी।
मैंने भी कब का साठ पार किया।
तुम्हारी उम्र भी]
इस बीच कुछ बढ़ी होगी।
गो कि] अन्दाज़ा नहीं लगता है।
इस लिये जन्म दिवस पर तेरे]
दिल से बस ये ही
निकलती है दुआ-
तुम न पचपन से कभी आगे बढ़ो।
शोखि़याँ बचपने की]
तुझ में सदा जिन्दा रहें]
तुम न इस बचपन से कभी आगे बढ़ो।
मुस्कराहट से] चहक से] तमाम जीवट से]
यूँ ही गुलज़ार सदा करती रहो-
हमारी ज़िन्दगी की बगि़या को।
मेरी साथी की तरह]
बच्चों की मम्मी की तरह।


तुम्हारा जन्म दिवस
तुमको मुबारक साथी।।


           *
          
        

 

 

 

शनिवार, 27 जून 2015

LAWN MEN SHAAM KO GUNGUNATEY HUYE.......

लॉन में शाम को गुनगुनाते हुये .....





तिरे भी पास ऐसा तो कोई जादू नहीं होगा....

-अरुण मिश्र



भले  ज़ाहिर   सहारे  को    कोई    बाज़ू  नहीं  होगा 
मगर   उस  पर  यकीं  तो  बेसहारा  तू   नहीं  होगा 

निकलते रोज़ हैं शम्श-ओ-क़मर फिर डूब जाने को 
पै  तेरे  हुस्न  पर   ये   फ़लसफ़ा   लागू  नहीं  होगा 

नहीं ज़ल्वानशीं देखा था उस को बज़्म में  जब तक 
गुमाँ  ये  था  कभी  दिल  अपना  बेक़ाबू  नहीं होगा 

न   तेरी  याद   भी   आये   हमें   गर  तू   नहीं  चाहे 
तिरे   भी   पास   ऐसा   तो   कोई   जादू  नहीं  होगा

'अरुन'  तू  दूर  होता  है  तो  अक्सर  सोचता  हूँ  मैं 
हमीं  रह  जायगें  तनहा  जो   तनहा  तू  नहीं  होगा

                                                                *