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सोमवार, 5 अक्टूबर 2015

तुम्हारा जन्म दिवस....

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तुम्हारा जन्म दिवस------

&अरुण मिश्र 

तुम्हारा जन्म दिवस
तुमको मुबारक साथी।

कि साथ&साथ गुज़ारी है
हमने उम्र तमाम।
तमाम ख़ुशियाँ मिलीं
और ग़म हुये हैं कम।
पिये हैं साथ मसर्रत के
छलकते हुये जाम।


तुम्हारा जन्म दिवस
तुमको मुबारक साथी।।


उम्र का क्या है \
ये तो यूँ ही बढ़ती जायेगी।
असल है ज़िन्दगी
जो लौट कर न आयेगी।
मैंने भी कब का साठ पार किया।
तुम्हारी उम्र भी]
इस बीच कुछ बढ़ी होगी।
गो कि] अन्दाज़ा नहीं लगता है।
इस लिये जन्म दिवस पर तेरे]
दिल से बस ये ही
निकलती है दुआ-
तुम न पचपन से कभी आगे बढ़ो।
शोखि़याँ बचपने की]
तुझ में सदा जिन्दा रहें]
तुम न इस बचपन से कभी आगे बढ़ो।
मुस्कराहट से] चहक से] तमाम जीवट से]
यूँ ही गुलज़ार सदा करती रहो-
हमारी ज़िन्दगी की बगि़या को।
मेरी साथी की तरह]
बच्चों की मम्मी की तरह।


तुम्हारा जन्म दिवस
तुमको मुबारक साथी।।


           *
          
        

 

 

 

सोमवार, 13 अक्टूबर 2014

महालक्ष्मी अष्टकम् (क्रमशः ४)










महालक्ष्मी अष्टकम्
का काव्य-भावानुवाद (क्रमशः ४)


-अरुण मिश्र.


सिद्धि-बुद्धि सब देने वाली, भोग अरु मोक्ष प्रदायिनि! माता।
मन्त्र-पूत    हे    देवि     सर्वदा !    महालक्ष्मी  तुम्हें  नमन है।।४ ।।


                                                                  *

मूल संस्कृत  :

                        इन्द्र उवाच

सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनी।
मन्त्रपूते  सदा  देवि  महालक्ष्मि नमोस्तु ते॥४॥  

                                   *

रविवार, 12 अक्टूबर 2014

अक्टूबर में आम्र-मंजरी

अक्टूबर में आम्र-मंजरी














अक्टूबर में आम्र-मंजरी

-अरुण  मिश्र 

पेड़  आम  का   मेरे लॉन  में,
यूँ  तो  आम    आम  जैसा है । 
पर  इस में  कुछ ख़ास बात है,
यह भी  मनमौजी  मुझ सा है ॥ 

वर्षा, ग्रीष्म, शरद सब में सम,
जब जी आये  फगुआ,  कजरी ।
नव-पल्लव  हैं  मध्य शरद में, 
अक्टूबर    में      आम्र-मंजरी ॥ 

                            *