मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024

लक्ष्मी स्तोत्रं / सर्वदेवकृत / स्वर : माधवी मधुकर झा

https://youtu.be/HaRSDKZPQ3I  


क्षमस्व भगवत्यम्ब क्षमाशीले परात्परे ।
शुद्धसत्त्वस्वरूपे च कोपादिपरिवर्जिते ॥ १ ॥

उपमे सर्वसाध्वीनां देवीनां देवपूजिते ।
त्वया विना जगत्सर्वं मृततुल्यं च निष्फलम् ॥ २ ॥

सर्वसम्पत्स्वरूपा त्वं सर्वेषां सर्वरूपिणी ।
रासेश्वर्यधिदेवी त्वं त्वत्कलाः सर्वयोषितः ॥ ३ ॥

कैलासे पार्वती त्वं च क्षीरोदे सिन्धुकन्यका ।
स्वर्गे च स्वर्गलक्ष्मीस्त्वं मर्त्यलक्ष्मीश्च भूतले ॥ ४ ॥

वैकुण्ठे च महालक्ष्मीर्देवदेवी सरस्वती ।
गङ्गा च तुलसी त्वं च सावित्री ब्रह्मलोकतः ॥ ५ ॥

कृष्णप्राणाधिदेवी त्वं गोलोके राधिका स्वयम् ।
रासे रासेश्वरी त्वं च वृन्दावनवने वने ॥ ६ ॥

कृष्णप्रिया त्वं भाण्डीरे चन्द्रा चन्दनकानने ।
विरजा चम्पकवने शतशृङ्गे च सुन्दरी ॥ ७॥

पद्मावती पद्मवने मालती मालतीवने ।
कुन्ददन्ती कुन्दवने सुशीला केतकीवने ॥ ८ ॥

कदम्बमाला त्वं देवी कदम्बकाननेऽपि च।
राजलक्ष्मी राजगेहे गृहलक्ष्मीगृहे गृहे ॥ ९ ॥

इत्युक्त्वा देवताः सर्वे मुनयो मनवस्तथा ।
रुरुदुर्नम्रवदनाः शुष्ककण्ठोष्ठतालुकाः ॥ १०॥

इति लक्ष्मीस्तवं पुण्यं सर्वदेवैः कृतं शुभम् ।
यः पठेत्प्रातरुत्थाय स वै सर्वं लभेद् ध्रुवम् ॥ ११ ॥

अभार्यो लभते भार्यां विनीतां च सुतां सतीम् ।
सुशीलां सुन्दरीं रम्यामतिसुप्रियवादिनीम् ॥ १२ ॥

पुत्रपौत्रावतीं शुद्धां कुलजां कोमलां वराम् ।
अपुत्रो लभते पुत्रं वैष्णवं चिरजीवनम् ॥ १३॥

परमैश्वर्ययुक्तं च विद्यावन्तं यशस्विनम् ।
भ्रष्टराज्यो लभेद्राज्यं भ्रष्टश्रीर्लभते श्रियम् ॥ १४ ॥

हतबन्धुर्लभेद्वन्धुं धनभ्रष्टो धनं लभेत्।
कीर्तिहीनो लभेत्कीर्तिं प्रतिष्ठां च लभेध्रुवम् ॥ १५ ॥

सर्वमङ्गलदं स्तोत्रं शोकसंतापनाशनम् ।
हर्षानन्दकरं शश्वद्धर्ममोक्षसुहृत्प्रदम् ॥ १६ ॥

सोमवार, 28 अक्टूबर 2024

शिव कैलाशों के वासी.../ गायन : सिद्धार्थ मोहन

https://youtu.be/71cMcLFmUfg  


शिव कैलाशो के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥

शिव कैलाशो के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥तेरे कैलाशों का अंत ना पाया,
तेरे कैलाशों का अंत ना पाया,
अंत बेअंत तेरी माया,
ओ भोले बाबा,
अंत बेअंत तेरी माया,
शिव कैलाशों के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥

बेल की पत्तियां भांग धतुरा,
बेल की पत्तियां भांग धतुरा,
शिव जी के मन को लुभायें,
ओ भोले बाबा,
शिव जी के मन को लुभायें
शिव कैलाशों के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥

एक था डेरा तेरा,
चम्बे रे चौगाना,
दुज्जा लायी दित्ता भरमौरा,
ओ भोले बाबा,
दुज्जा लायी दित्ता भरमौरा,
शिव कैलाशों के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥

शिव कैलाशो के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥

रविवार, 27 अक्टूबर 2024

आये हैं समझाने लोग.../ शायर : कुँवर महेंद्र सिंह बेदी 'सहर' / गायन : आकांक्षा ग्रोवर

https://youtu.be/HzDJ4SgbU-w  


आये हैं समझाने लोग
हैं कितने दीवाने लोग

दैर-ओ-हरम में चैन जो मिलता
क्यों जाते मैख़ाने लोग

जान के सब कुछ, कुछ भी न जाने
हैं कितने अंजाने लोग

वक़्त पे काम नहीं आते हैं
ये जाने पहचाने लोग

अब जब मुझ को होश नहीं है
आये हैं समझाने लोग

शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2024

दिन गुज़र गया ऐतबार में.../ फ़ना निज़ामी / गायन : कृपा ठक्कर

https://youtu.be/qk7Jg7L5y9E  


दिन गुज़र गया ऐतबार में
रात कट गयी इंतज़ार में

वो मज़ा कहाँ वस्ल-ए-यार में
लुत्फ़ जो मिला इंतज़ार में

उनकी इक नज़र, काम कर गयी
होश अब कहाँ होशियार में

मेरे कब्ज़े में कायनात है
मैं हूँ आपके इख़्तियार में

आँख तो उठी फूल की तरफ
दिल उलझ गया हुस्न-ए-ख़ार में

तुजसे क्या कहें, कितने ग़म सहे
हमने बेवफ़ा तेरे प्यार में

फ़िक्र-ए-आशियाँ, हर ख़िज़ाँ में की
आशियाँ जला हर बहार में

किस तरह ये ग़म भूल जाएं हम
वो जुदा हुआ इस बहार में

दिन गुज़र गया ऐतबार में
रात कट गयी इंतज़ार में

वो मज़ा कहाँ वस्ल-ए-यार में
लुत्फ़ जो मिला इंतज़ार में



(ऐतबार = भरोसा, विश्वास)
(फ़िक्र-ए-आशियाँ = घोंसले (घर) की चिंता), (ख़िज़ाँ = पतझड़)
हुस्न-ए-ख़ार = काँटों की खूबसूरती)

(कायनात = सृष्टि, जगत), (इख़्तियार = अधिकार, काबू, स्वामित्व, प्रभुत्व)
(वस्ल-ए-यार = प्रिय से मिलन)

गुरुवार, 24 अक्टूबर 2024

महालक्ष्मी अष्टकं.../ इन्द्र कृत / पद्म पुराण / स्वर : सूर्य गायत्री

https://youtu.be/ucKk_AQvQA4  


नमस्तेस्तु महामाये श्री पीठे सुर पूजिते!
शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते!!

नमस्तेतु गरुड़ारुढ़े कोलासुर भयंकरी!
सर्वपाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते!!

सर्वज्ञे सर्व वरदे सर्व दुष्ट भयंकरी!
सर्वदुख हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते!!

सिद्धि बुद्धि प्रदे देवी भक्ति मुक्ति प्रदायनी!
मंत्र मुर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते!!

आद्यंतरहिते देवी आद्य शक्ति महेश्वरी!
योगजे योग सम्भूते महालक्ष्मी नमोस्तुते!!

स्थूल सुक्ष्म महारौद्रे महाशक्ति महोदरे!
महापाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते!!

पद्मासन स्थिते देवी परब्रह्म स्वरूपिणी!
परमेशी जगत माता महालक्ष्मी नमोस्तुते!!

श्वेताम्भर धरे देवी नानालन्कार भुषिते!
जगत स्थिते जगंमाते महालक्ष्मी नमोस्तुते!!

महालक्ष्मी अष्टक स्तोत्रं य: पठेत भक्तिमान्नर:!
सर्वसिद्धिमवाप्नोती राज्यम् प्राप्नोति सर्वदा!!

एक कालम पठेनित्यम महापापविनाशनम!
द्विकालम य: पठेनित्यम धनधान्यम समन्वित:!!

त्रिकालम य: पठेनित्यम महाशत्रुविनाषम!
महालक्ष्मी भवेनित्यम प्रसंनाम वरदाम शुभाम!! 




बुधवार, 23 अक्टूबर 2024

सिसोद्यो रुठ्यो तो म्हारो कांई कर लेसी?.../ मीराबाई / गायन : अश्विनी भिडे देशपांडे

https://youtu.be/QCIa6n9pW3U 


मीरा का विवाह बारह वर्ष की उम्र में मेवाड़ के 
महाराणा संग्रामसिंहजी अर्थात् राणा सांगाजी 
के ज्येष्ठ पुत्र भोजराज के साथ हुआ। 
महाराणा सांगा और दिल्लीपति बादशहा बाबर 
इन दोनों के बीच जो जंग सन 1527 में 
‘खानवा की लडाई' के नामसे मशहूर हुई, 
उसमें राणा सांगा, उनके बेटे मीरा के पति 
भोजराज, मीरा के पिता रतनसिंह, सभी 
मारे गये और इस दुर्घटना के बाद से मीरा 
का बुरा वक्त शुरू हुआ। राणे भेजा विष 
का प्याला' इस उल्लेख में जिस 'राणा' का 
जिक्र है, वह है मीरा के देवर विक्रमादित्य 
जिन्होंने मीरा को 'बावरी' का नामाभिधान 
देकर, उसे ज़हर पिलाने के, या फिर फूलों 
के साथ जहरीला नाग भेजकर उसे खतम 
करने के षड्‌यंत्र रचे |

परंतु मीराबाई अपनी भक्ति के बलपर इन 
सभी खतरों से सहीसलामत निकल गई। 
मीरा ने कभी भी इन खतरों से जूझने के 
लिए अपने गिरिधर गोपाल ही सहायता 
नहीं माँगी। उनका भरोसा था - नामस्मरण 
के बल पर। सब संकटों का एकही उपाय वे 
जानती थीं।

आइए, आज जो पद हम सुनेंगे उसकी भाषा 
कुछ अलग है। जैसे लोकभाषा हो... और 
इसी कारण इस पद की संगीतरचना भी 
लोकसंगीत से नाता दर्शानेवाली। इस पद में 
मीराबाई सारे भगत गणोंको मानों यह सीख 
पढ़ा रही है कि सब कष्टों का एकही इलाज है 
ईश्वर का नामस्मरण! वे कहती हैं,

“सिसोद्यो रुठ्यो तो म्हारो कांई कर लेसी?”

और इनका जबाब है,

“म्हें तो गुण गोविंद का गास्यां हो माई ॥”
“म्हें तो गुण गोविंद का गास्यां”


बस, एक नामस्मरण से ही सभी भौतिक और 
लौकिक दुखों का नाश होगा, इसलिए, हरएक 
साँस के साथ नाम की माला जपनी चाहिए

सोमवार, 21 अक्टूबर 2024

हर हर हर महादेव महेश्वर.../ गायन : स्नीति मिश्रा

https://youtu.be/ik0zFmy-Dd8  


हर हर हर महादेव महेश्वर 
महाजोगी जोगेश्वर शंकर 
गिरिजापति परमेश्वर शुभकर 
हर हर हर महादेव महेश्वर 

जटाजूट पर शोभत गंगा 
नीलकंठ भूषित भुजंगा
उमा सहित षडनायक कार्तिक 
सुर नर वन्दित रुद्रगण सेवित 

हर हर हर महादेव महेश्वर