शनिवार, 1 जनवरी 2011

चमके उम्मीद का सूरज...



नव-वर्ष २०११ मंगलमय हो !!!





- अरुण मिश्र 


  ‘‘दिल की धरती 
 कभी बंजर नहीं होने पाये। 
  आँच मन की कभी 
 मद्धिम नहीं होवे, या रब! 
 चमके उम्मीद का सूरज 
 औ’, बरसें प्यार के मेह।। 

 मन में गहरे हैं पड़े 
बीज, कितनी सुधियों के- 
गुज़िश्ता बरसों के; 
उनमें नये अँखुए फूटें।। 
फिर से लहरायें 
नई फसलें, 
नई खुशिओं की।।

इस नये साल में। 
ये पहली दुआ 
है, मेरी।।’’ 
        *
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2 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर कविता

    नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

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  2. धन्यवाद प्रिय ललित शर्मा जी|
    नव-वर्ष आप के एवं आप के परिवार के लिए मंगलमय हो|
    -अरुण मिश्र.

    उत्तर देंहटाएं