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सोमवार, 5 अक्टूबर 2015

तुम्हारा जन्म दिवस....

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तुम्हारा जन्म दिवस------

&अरुण मिश्र 

तुम्हारा जन्म दिवस
तुमको मुबारक साथी।

कि साथ&साथ गुज़ारी है
हमने उम्र तमाम।
तमाम ख़ुशियाँ मिलीं
और ग़म हुये हैं कम।
पिये हैं साथ मसर्रत के
छलकते हुये जाम।


तुम्हारा जन्म दिवस
तुमको मुबारक साथी।।


उम्र का क्या है \
ये तो यूँ ही बढ़ती जायेगी।
असल है ज़िन्दगी
जो लौट कर न आयेगी।
मैंने भी कब का साठ पार किया।
तुम्हारी उम्र भी]
इस बीच कुछ बढ़ी होगी।
गो कि] अन्दाज़ा नहीं लगता है।
इस लिये जन्म दिवस पर तेरे]
दिल से बस ये ही
निकलती है दुआ-
तुम न पचपन से कभी आगे बढ़ो।
शोखि़याँ बचपने की]
तुझ में सदा जिन्दा रहें]
तुम न इस बचपन से कभी आगे बढ़ो।
मुस्कराहट से] चहक से] तमाम जीवट से]
यूँ ही गुलज़ार सदा करती रहो-
हमारी ज़िन्दगी की बगि़या को।
मेरी साथी की तरह]
बच्चों की मम्मी की तरह।


तुम्हारा जन्म दिवस
तुमको मुबारक साथी।।


           *
          
        

 

 

 

शनिवार, 1 अगस्त 2015

तुम भी तो दोस्त हो....फ्रेंडशिप डे, रविवार, 02, अगस्त, 2015.



फ्रेंडशिप डे, रविवार, 02, अगस्त, 2015.

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तुम भी तो दोस्त हो....

-अरुण मिश्र


तुम भी तो दोस्त हो;

तुम को भी पता ही होगा;

बहुत दिनों से उदासी किये घर बैठी है।

जि़न्दगी रूठी हुई लगती है माशूक़ा सी।

चहचहे गुम हैं, बग़ीचे गुम-सुम।

दिल सुकूँ ढूँढ़ता है माज़ी में;

ऐसे में दोस्त ! याद आते तुम।।


जब भी याद आती है,

दिल से ये निकलती है दुआ,

मेरी बदहाली मुझी तक सिमटे।

तुम हो जिस ओर
 
वहाँ हर तरफ़ ख़ुशहाली हो।

औ’ कभी तुमको भी

याद आये मेरी, ऐसे ही।। 


तुम भी तो दोस्त हो।।

                   *
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सोमवार, 27 जुलाई 2015

कारगिल के वीर .......

श्रद्धांजलि


   कारगिल के वीर

    -अरुण मिश्र


  तुमने बज़्मे-जंग में छलकाये  अपने खूँ के जाम।
  कारगिल के वीर तुमको, देश  का सौ-सौ सलाम।।


                    धूर्त   दुश्मन   जब  घुसा,  घर  में  हमारे   चोर सा।
                    बंकरों    में   जब     हमारे    ही    जमाया   मोरचा।
                    उसपे थीं लंदन की सिगरेट्स, तुम पे जूते तक नहीं।
                    लात फिर भी खा तुम्हारी,  पैर  रख  सर  पर भगा।।


  तुम हिमानी चोटियों पर टांक आये  अपना नाम।
  कारगिल के वीर तुमको, देश  का सौ-सौ सलाम।।


                     वीरता    के    आवरण   में,  शूरता   का   आचरण।
                     शत्रुओं  के  शीश  पर,  शोभित  हुये  विजयी चरण।
                     देख कर  पुरुषार्थ,  रण  में   मृत्यु  तक मोहित हुई।
                     डालकर जयमाल,  जय का,  कर  लिया तेरा वरण।।


  उन शहीदों पर वतन के,  है निछावर  ये कलाम।
  कारगिल के वीर तुमको, देश का सौ-सौ सलाम।।


                      एक-एक, चोटी को  तुमने,   खून  से  सींचा जवान।
                      जान की बाज़ी लगा दी, औ'  बचा  ली माँ की आन।
                      है     तेरी     कुर्बानियों    के    रंग    से    रंगी   हुई-
                      आज की  ये जश्ने-आज़ादी,  तिरंगे  की   ये  शान।।


  सज गये गौरव-मुकुट से, भाल-भारत के ललाम।
  कारगिल के वीर तुमको, देश  का सौ-सौ सलाम।।


                                        *
(संग्रह 'न जाने किन ज़मीनों से' से साभार )

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गुरुवार, 1 जनवरी 2015

इस नये साल में ये पहली दुआ है मेरी …..

नव वर्ष सभी को मंगलमय हो । 

इस नये  साल में  ये पहली दुआ है मेरी  ….. 

-अरुण मिश्र



  
२०१५ 

 
 

शनिवार, 1 जनवरी 2011

चमके उम्मीद का सूरज...



नव-वर्ष २०११ मंगलमय हो !!!





- अरुण मिश्र 


  ‘‘दिल की धरती 
 कभी बंजर नहीं होने पाये। 
  आँच मन की कभी 
 मद्धिम नहीं होवे, या रब! 
 चमके उम्मीद का सूरज 
 औ’, बरसें प्यार के मेह।। 

 मन में गहरे हैं पड़े 
बीज, कितनी सुधियों के- 
गुज़िश्ता बरसों के; 
उनमें नये अँखुए फूटें।। 
फिर से लहरायें 
नई फसलें, 
नई खुशिओं की।।

इस नये साल में। 
ये पहली दुआ 
है, मेरी।।’’ 
        *
 आडिओ क्लिप :       

                       
   
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