रविवार, 7 अगस्त 2011

बहन मेरी कलाई पर जो तुमने तार बाँधा है....













रक्षा-सूत्र 
-अरुण मिश्र  

"बहन,  मेरी  कलाई  पर,
 जो तुमने  तार  बॉधा  है।
 तो,इसके साथ स्मृतियों-
 का, इक  संसार  बॉधा है।।"

(टिप्पणी : यह कविता इस ब्लाग की २२, अगस्त, २०१० की पोस्ट में पूर्व प्रकाशित है |)  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें