गुरुवार, 27 मार्च 2025

निरर्थकं जन्मगता नलिन्या.../ बिल्हण / प्रस्तुति : नवनीत गलगली

 https://youtu.be/rpYxWvk4oJ4  


निरर्थकं जन्मगता नलिन्या 
यया न दृष्टं तुहिनांशुविम्बं।
उत्पत्तिरिन्दोरपि निष्फलैव 
कृता विनिद्रा नलिनी न येन।।

बुधवार, 26 मार्च 2025

आदमी वो है मुसीबत से परेशान ना हो.../ गीतकार : शम्स लखनवी एवं बेहज़ाद लखनवी / गायन : पद्‍मश्री पुष्पा हंस

https://youtu.be/Vuy4ShsxDNk  

गीतकार : शम्स लखनवी एवं बेहज़ाद लखनवी
संगीतकार: वसंत देसाई
फिल्म: शीशमहल 1950

इस गीत को पद्‍मश्री पुष्पा हंस ने गाया है 
और फिल्म में अभिनय भी किया है।

आदमी वो है मुसीबत से परेशान ना हो-2
कोई मुश्किल नहीं ऐसी के जो आसान ना हो-2
आदमी वो है मुसीबत से परेशान ना हो 

ये हमेशा से है तक़दीर की गर्दिश का चालन-2
चाँद सूरज को भी लग जाता है एक बार ग्रहण 
वक़्त की देख के तब्दीलियां हैरान ना हो- 2 
आदमी वो है मुसीबत से परेशान ना हो 

ये है दुनियां यहाँ दिन ढलता है शाम आती है- 2 
सुबह हर रोज नया ले के पयाम आती है 
जानी बूझी हुई बातों से तू अन्ज़ान ना हो 
आदमी वो है मुसीबत से परेशान ना हो 

कोई मुश्किल नहीं ऐसी के जो आसान ना हो
आदमी वो है मुसीबत से परेशान ना हो

मंगलवार, 25 मार्च 2025

फिर कुछ इक दिल को बे-क़रारी है.../ मिर्ज़ा ग़ालिब / गायन : आबिदा परवीन

https://youtu.be/Pz1j01JkM8c  

फिर कुछ इक दिल को बे-क़रारी है
सीना जूया-ए-ज़ख़्म-ए-कारी है


फिर जिगर खोदने लगा नाख़ुन
आमद-ए-फ़स्ल-ए-लाला-कारी है

क़िब्ला-ए-मक़्सद-ए-निगाह-ए-नियाज़
फिर वही पर्दा-ए-अमारी है

चश्म दल्लाल-ए-जिंस-ए-रुस्वाई
दिल ख़रीदार-ए-ज़ौक़-ए-ख़्वारी है

वही सद-रंग नाला-फ़रसाई
वही सद-गोना अश्क-बारी है

दिल हवा-ए-ख़िराम-ए-नाज़ से फिर
महशरिस्तान-ए-सितान-ए-बेक़रारी है

जल्वा फिर अर्ज़-ए-नाज़ करता है
रोज़ बाज़ार-ए-जाँ-सिपारी है

फिर उसी बेवफ़ा पे मरते हैं
फिर वही ज़िंदगी हमारी है

फिर खुला है दर-ए-अदालत-ए-नाज़
गर्म-बाज़ार-ए-फ़ौजदारी है

हो रहा है जहान में अंधेर
ज़ुल्फ़ की फिर सिरिश्ता-दारी है

फिर दिया पारा-ए-जिगर ने सवाल
एक फ़रियाद ओ आह-ओ-ज़ारी है

फिर हुए हैं गवाह-ए-इश्क़ तलब
अश्क-बारी का हुक्म-जारी है

दिल ओ मिज़्गाँ का जो मुक़द्दमा था
आज फिर उस की रू-बकारी है

बे-ख़ुदी बे-सबब नहीं 'ग़ालिब'
कुछ तो है जिस की पर्दा-दारी है

बुधवार, 19 मार्च 2025

हटो काहे को झूठी बनाओ बतिया.../ फिल्म : मंज़िल (1960) / मजरुह सुल्तानपुरी / मन्ना डे

https://youtu.be/DoNOYo7fupU  


हटो काहे को झूटीइ बनाओ बतियाँ
ग़ैर का साथ है और रोज़ मुलाक़ातें हैं
प्यार है उस के लिये और हम से फ़क़त बातें हैं
जाओ जाओ जाओ झूठी बात न बनाओ
जल रही विरह में सैंया और न जलाओ

हटो काहे को झूटी ...

ये उड़ी उड़ी सी रंगत
ये खुले खुले से गेसु
तेरी सुबह कह रही है
तेरी रात का फ़साना

देखो जी किसी का प्यार हम से न छुपाओ
सब हमें पता है प्यारे नैन न झुकाओ

सुनो कहती है क्या क्या तुम्हरी अखियाँ
हटो काहे को झूटी ...

मंगलवार, 18 मार्च 2025

चंचल चपल चतुर चंद्रावली चाले, चटक मटककी चाल.../ पुष्टिमार्गीय रसिया

https://youtu.be/NwabFS39tgM   

चंचल चपल चतुर चंद्रावली चाले,
चटक मटककी चाल।
चटक मटककी चाल चाले,  चटक मटककी चाल ||ध्रु||

चंद्रावली दधि बेचन चालीजी,
घेरी गैल छैल बन मालीजी।
दान दधि जोबन देऊ चुकाय,
दहेड़ीको नेक दही दै खवाय,
कहे यो चंद्रावली मुस्काय,

दोहा- जो कान्हा पल्ले परो, लाओ पतौआ तोर।
छोड़ मनसुखा को गए, मोहन माखन चोर।

चंद्रावली गई सटक, मारा मनसुखके गुलचा लाल-(२)

... चंचल ||१||


पत्ता तोड़ श्याम जब आए जी,
मनसुखलाल रोवते पाएजी।
ना देखी चंद्रावली बृजनार,
करन लागे मनमें सोच विचार,
खीरकमे जाय सोये मन मार,

दोहा ढूंढते ढूंढते डोलती, घर-घर जसुमति माय।
मेरो कान्हा कीत गयो, कोई देहो बताय।

कहे मनसुखलाल खिरक में, सोय रहे नंदलाल-(२)

... चंचल ||२||

हैरत मात श्याम नाये बोलेजी,
क्यों लाला तू पर्यों रे खटोलेजी
कि तोकू कौने दीनी गार,
कि तोको आवत ताव बुखार,
बताई दे मेरे प्राण आधार,

दोहा ना काहू गारी देई, ताव न आवत मोय।
छल कर गई चंद्रावली, कहा बताउं तोय।

आपके लालके चार ब्याह करूं, घर चल मदन गोपाल-(२)

... चंचल ||३||

समद बहाऊ मैया चार बहुरीया जी,
मेरे मन बसी चंद्रावली गुजरीया जी।
कहे मैया मो डिंग आऊ,
तोए छल गई तोय वाय छलवाऊ,
चल्यो तू री ढोरे कू जाऊ,

दोहा इतनी सुनके श्यामने, सखी भेष लियो धार।
लहंगा फरीया पहर के, कर सोलह श्रृंगार।

चलत कमर वलखाएं बन गई, नव नवरंगी बाल-(२)

... चंचल ||४||

तुरंत श्याम बन गए हैं जनानीजी,
यशोदाने प्रभु नाय पहचानेजी।
उलाहना देने लगे घनश्याम,
सांवरी सखी बतायो नाम,
तिहारो छोड़ जाऊंगी गाम,

दोहा यशोदाने पहचानके, लिए कंठ लगाय।
मैया की आज्ञा भईके, रिठोरा गए आय। 
चंद्रावलीको कुछ रहे घर, सखी बने नंदलाल-(२)

... चंचल ||५||

चंद्रावलीके घरकी यहीतो डगरिया जी,
ऊंचीसी अटरीयामें लाल किवरया जी।
पहुंच गए चंद्रावलीके द्वार,
खोल बहना नेक जंग किवार,
द्वार पर कबकी रही है पुकार,

दोहा- चंद्रावली कहने लगी, सुनो सखी सुकुमार।
*कहांसे आई नाम गांम, तो मुखते उच्चार।*उसके
कहां लगे नाते में अली, कह दे सोच हवाल-(२)

... चंचल ||६||

चंद्रावली सुन सांचे बे नारी,
पीहर ते आई लागू तोरी बहनारी
कहे यो चंद्रावली समझाय,
खिलाइ गोदन जन्मी माय,
कहां ते बहन गई तू आय,

दोहा- चंद्रावली ते सामरी, सखी लगी यों कहन।
मामा फूफी की दोऊ, हम तुम लगे बहन।

ब्याह तेरे ते मोय सासरे, भेज दही तत्काल-(२)

... चंचल ||७||

मिलत बहन दोऊ भुजा रे पसारी जी, 
चंद्रावलीने गिरा रे ऊझारी जी 
कहत मे लगे लाज बानी,
लगे तेरी छाती मरदानी,
सामरी सखी कहे सयानी,


दोहा - बहेना तेरो निशा दिना, करत रहत ही सोच।
सोच करत में है गई, मेरी छाती पोच।
तेरे देखे बिना बहन में, पाये दुख कराल-(२)

... चंचल ||८||

चलरी बहन दोऊ पानी भर लावेजी,
मिलजुलके कुआंपें आवेजी।
अचंबो भयो सखी मोहे आज,
कहत मे आवे मोकु लाज,
चले तु चाल मर्दयी भाज,

दोहा - बालापनमें बा करुवा, घेर चराई गाय।
वह लकब मोय लग रही, सुन बैना चिल्लाय!
चाल मेरी मरदानी पर तू, मति करे रे प्यार- 

...चंचल ||९||

चलरी बहन तोए ऊबट न्हवाऊजी,
तेल सुगंधित अत्तर मिलाऊजी।
सामरी सखी जोर कहे हात,
मेरे घर शेर शीतला मात,
सुनी बढ़िया पुराण में बात,

दोहा तो बहना न्हाओ मती, भोजन करो अघाय।
सखी सामरी प्रेम ते, बड़े-बड़े ग्रासन खाय।
खीर खाड पकवान मिठाई, छके अनेकन माल-(२)

... चंचल ||१०||

कहत सुनत मोहे शरम लगत है री,
मरदाने तू कोर भरत है री।
सामरी सखी करें अरदास,
मेरे घर में लड़हारी सास,
देर जो करूं देय दुख त्रास,  

दोहा- भोजन कर बीडी रही, फिर है आई रैन।
पचरंग पलंग बिछायके, करो सेज सुख चैन।
चराण पलोटतमें पिंडारीनमें, लगे खुरदरी खाल-(२)

... चंचल ||११||

तेरे बिरजमें लोग ठगोरारी,
कहां बूढ़ों कहा जवान छिछोरारी।  
बताई दई मोकु ऊबट बाट,
जहां कांटे करीन के घाट,
छिल्ली पिंडरी लहंगा गयो फाट,

दोहा- सोलह श्रृंगार उतार के, पितांबर लियो धार!
चंद्रावली चकित भई, करन लगी बलिहार।
मैंतो तोहे लाल जबभी जान गई, पर्यो न खाई जाए-(२)

... चंचल ||१२||

कौन तेरी बहना ने कौन तेरा बीरा री,
तू गुजर हम जात अहीरा री।
तनिक दधि कुछल आई मोये,
छल्ली वा कारण मैंने तोये,
परस्पर बदलो जग में होये,

दोहा - चंद्रावली लीला करी, प्रेम भरी घनश्याम। 
गोवर्धन दस बीस में, छितर घासीराम।
छीतर "घासीराम" युगल छवि, निरखत भये निहाल-(२)

... चंचल ||१३||

शुक्रवार, 14 मार्च 2025

गोपी गोपाल लाल रासमंडल माहीं.../ सूरदास कृति / गायन : पूर्वा धनश्री एवं पावनी कोटाह / प्रस्तुति : कुलदीप एम. पई

https://youtu.be/h-_GZHwK108   

गोपी गोपाल लाल
रासमंडल माहीं ।
तात्ताथेई ता सुधंग
निरत गहि बाहीं ।।

द्रुम द्रुम द्रुम द्रुम मृदंग
छन नन नन रूप रंग
दृगतादृग तालतंग
उघटत रसनाई ।।

बीच लाल बीच बाल
प्रति प्रति अति द्युति रसाल
अविगत गति अति उदार
निरखि दृग सराहीं ।।

श्रीराधामुख शरत चंद
पोंछत जल श्रम अनंद
श्रीव्रजचंद लटक लटकत
करत मुकुट छाहीं ।।

चकित थकित यमुना नीर
खग मृग जग मग शरीर
धन नंदके कुमार बलि-बलि जाय
सूरदास रास सुख तिहारहीं ।।

गुरुवार, 13 मार्च 2025

रास रमंता म्हारी नथनी खोवाई.../ रचना : भक्त कवि नरसिंह मेहता / गायन : आदित्य गढ़वी

https://youtu.be/iraezTzB938  

नागर नंदजी ना लाल
नागर नंदजी ना लाल
रास रमंता म्हारी नथनी खोवाई

कान्हा जड़ी होए तो आल,
कान्हा जड़ी होए तो आल
रास रमंता म्हारी नथनी खोवाई ...

वृन्दावन नी कुञ्ज गलीं मां
बोले झिना मोर
राधाजी नी नथनी नो
शामलियो छे चोर ....
नागर नंदजी ना लाल
नागर नंदजी ना लाल
रास रमंता म्हारी नथनी खोवाई.....