रविवार, 13 दिसंबर 2020

कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है.../ साहिर होशियारपुरी /जगजीत सिंह-चित्रा सिंह

https://youtu.be/CKOn9nlMZq4 

Jagjit Singh and Chitra Singh performing first time in Toronto,
Canada on 29 April, 1978.

कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है
ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है


वो न आये तो सताती है ख़लिश सी दिल को
वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है


(ख़लिश = चुभन, वेदना)

रूह को शाद करे, दिल को जो पुरनूर करे
हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है


(शाद = प्रसन्न), (पुरनूर = प्रकाशमान, ज्योतिर्मय), 
(तनवीर = रौशनी, प्रकाश)

ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोकें
दिल में जो बात हो आँखों से अयाँ होती है


(ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत = मुहब्बत की बाढ़ की सहनशीलता), 
(अयाँ = साफ़ दिखाई पड़ने वाला, स्पष्ट, ज़ाहिर)

ज़िन्दग़ी एक सुलगती-सी चिता है 'साहिर'
शोला बनती है न ये बुझ के धुआँ होती है


-साहिर होशियारपुरी

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