शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

अपणे सुसरे के आगै बहुअड कैसे चालैगी.../ हरियाणवी लोकगीत

 https://youtu.be/I7GN4ZclP_g 

अपणे सुसरे के आगै बहुअड कैसे चालैगी
अपणे सुसरे के आगै बहुअड कैसे चालैगी


मैं तो गज का घूँघट काढ़ मटक क चालूंगी


हे मटक क चालूंगी

हे चटक क चालूंगी


मेरा रोवै हीरालाल गोदी म ले ल्यूंगी

हे गोदी म ले ल्यूंगी हे छाती क ला ल्यूंगी

उसके पैर तले का रेत चूल्हे म डालूंगी


हे चटक क चालूंगी

हे मटक क चालूंगी


अपणे जेठ के आगै बहुअड कैसे चालैगी

अपणे जेठ के आगै बहुअड कैसे चालैगी


मेरा रोवै हीरालाल गोदी म ले ल्यूंगी

मैं तो काणा घूँघट काढ़ मटक क चालूंगी


हे मटक क चालूंगी

हे चटक क चालूंगी


मेरा रोवै हीरालाल गोदी म ले ल्यूंगी

हे गोदी म ले ल्यूंगी हे छाती क ला ल्यूंगी

उसके पैर तले का रेत चूल्हे म डालूंगी


हे चटक क चालूंगी

हे मटक क चालूंगी


अपणे देवर के आगै बहुअड कैसे चालैगी

अपणे देवर के आगै बहुअड कैसे चालैगी


मैं तो काँधे चुन्नी गेर मटक क चालूंगी


हे मटक क चालूंगी

हे चटक क चालूंगी


मेरा रोवै हीरालाल गोदी म ले ल्यूंगी

हे गोदी म ले ल्यूंगी हे छाती क ला ल्यूंगी

उसके पैर तले का रेत चूल्हे म डालूंगी


हे चटक क चालूंगी

हे मटक क चालूंगी


अपणे कंथे के आगै बहुअड कैसे चालैगी

अपणे कंथे के आगै बहुअड कैसे चालैगी


मैं तो धोरै कुर्सी घाल बरोबर बैठूंगी


हे बरोबर बैठूंगी

है मैं बातां कर ल्यूंगी


मेरा रोवै हीरालाल गोदी म ले ल्यूंगी

हे गोदी म ले ल्यूंगी हे छाती क ला ल्यूंगी

उसके पैर तले का रेत चूल्हे म डालूंगी


हे चटक क चालूंगी

हे मटक क चालूंगी

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