शनिवार, 12 मार्च 2011

मैं होली में आऊँगा...













ग़ज़ल 
-अरुण मिश्र 


टिप्पणी : होली की मस्ती भरी वर्ष १९९४ में लिखी यह ग़ज़ल, आने वाली होली की 
शुभकामनाओं के साथ ब्लागार्पित है | रंगों एवं मस्तियों का यह त्यौहार सभी को 
बहुत-बहुत शुभ हो | 
- अरुण मिश्र.









































                     




3 टिप्‍पणियां:

  1. इन पंक्तियों में होली की भरपूर मस्ती भी है और सुंदर काव्य भी....साधुवाद.

    ओमप्रकाश यती

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  2. प्रिय डॉ. डंडा लखनवी जी एवं प्रिय यती जी,आप सब को बहुत-बहुत धन्यवाद|
    - अरुण मिश्र.

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