भिखारी ठाकुर (१८८७ -१९७१), भोजपुरी के समर्थ लोक कलाकार, रंगकर्मी, लोक-
जागरण के सन्देश वाहक, लोक गीत तथा भजन कीर्तन के अनन्य साधक थे। वे बहु-
आयामी प्रतिभा के व्यक्ति थे। वे भोजपुरी गीतों एवं नाटकों की रचना एवं अपने
सामाजिक कार्यों के लिये प्रसिद्ध हैं। वे एक महान लोक कलाकार थे जिन्हें 'भोजपुरी का
शेक्शपीयर' कहा जाता है।
एक समय था जब समाज की एक ऐसी प्रथा थी जहाँ छोटी लड़कियों की शादी बुज़ुर्ग इंसान से कर दी जाती थी। पैसों की कमी और बेटी को पालने का भार नहीं सहन कर पाने की क्षमता ने इस कुरीति को जन्म दिया और इसको दिल चीरकर इस गाने के माध्यम से समझाया, ‘शेक्सपियर ऑफ भोजपुरी’ माने जाने वाले, परम आदरणीय, भिखारी ठाकुर जी ने। ये गीत मन में कई सवाल खड़े करता है और विवश करता है सोचने पर कि क्या आज भी औरत की गिनती दूसरे दर्जे के नागरिकों में होती है? बेशक हालात सुधरे हैं पर अभी भी काम बाक़ी है !
ऐ तिरंगे ! तू जहॉ में हिन्द की पहचान है.... -अरुण मिश्र
ऐ तिरंगे ! तू जहॉ में, हिन्द की पहचान है। हिन्द की है शान तू औ’ हिन्दियों की आन है। तू हमारे वीर पुरखों की, शहादत का निशाँ । तेरे ज़ल्वों पर, वतन का हर बसर, क़ुरबान है।। तू लहरता, तो उमंगें, मन की हैं होती ज़वां। तू फहरता, तो रगों में, खून होता है रवां। तुझको छू कर के गुज़रती है, मुक़द्दस जो हवा। झूमता है , सॉस उसमें ले के , ये हिन्दोस्तां।। तू रहे रोशन हमेशा, नभ में, सूरज-चॉद बन। तेरी ही छाया में , लहरायें सदा , गंगो-जमन। आस्मां में तू सदा , लिखता रहे , हिन्दोस्तां। बॉटता यूँ ही रहे, दुनिया को , पैगामे-अमन।। तू हिलाता हाथ दुश्मन की तरफ भी मीत सा। तू फिज़ां में गूँजता है , हिन्द के संगीत सा।। तेरे रंगों में बहारें , हिन्द की, होती अयां। तू धरा पर, भारतीयों के सुयश के, गीत सा।। *
"জোছনা করেছে আড়ি,
আসেনা আমার বাড়ি
গলি দিয়ে চলে যায়,
লুটিয়ে রূপোলি শাড়ী
চেয়ে চেয়ে পথ তারি,
হিয়া মোর হয় ভারি
রূপের মধুর মোহ,
বলোনা কি করে ছাড়ি
জোছনা করেছে আড়ি"
कामदमनि कामता, कलपतरु सो जुग - जुग जागत जगतीतलु । तुलसी तोहि बिसेषि बूझिये, एक प्रतीति - प्रीति एकै बलु ॥६॥
भावार्थः-- हे चित्त ! अब तो चेतकर चित्रकूटको चल । कलियुगने क्रोध कर धर्म और ईश्वरभक्तिरुप कल्याणके मार्गोंका लोप कर दिया हैं; मोह, माया और पापोंकी नित्य वृद्धि हो रही हैं ॥१॥
चित्रकूटमें श्रीरामजीके चरणोंसे चिहिनत भूमिका और उनके विहारके स्थान वनका दर्शन कर ! वहाँ कपट, पाखण्ड और दम्भके दल ( समूह ) - का नाश करनेवाले पर्वत किए उन शिखरोंको देख, जो जन्म - मरणरुप संसारसे छुटकारा मिलनेके कारण हैं ॥२॥
जहाँपर जगत्पिता जगदीश्वर ब्रह्मा, विष्णु और शिवने सती अनसूयाके पुत्ररुपसे प्रपंच और छल छोड़कर जन्म लिया है । जिस चित्रकूटरुपी आश्रममें एक बार प्रवेश करते ही जुएमें हारकर वन - वन भटकते हुए युधिष्ठिर आदि पाण्डव और राजा नलका सारा दुःख दूर हो गया ॥३॥
वहाँ जानेमें अब देर न कर, अपनी अच्छी बुद्धिसे यह तो विचार कर कि जितने वर्ष बीत गये सो तो गये, अब आयुके जितने पल बाकी हैं, वे बीते हुए वर्षोंके समान हैं । एक - एक पलको एक - एक वर्षके समान बहुमूल्य समझकर, मृत्युको समीप जानकर, जल्दी चित्रकूट जाकर उस श्रीराम - मन्त्रका जप कर, जिसे जपनेसे श्रीशिवजी कालकूट विष पीनेपर भी अजर - अमर हो गये ॥४॥
जब तू वहाँ निरन्तर श्रीराम - नाम - जपरुपी सर्वश्रेष्ठ यज्ञ और पयस्विनी नदीके पवित्र जल में स्नान तथा उसके जलका पान करता रहेगा, तब श्रीरामजी तेरी मनः कामना पूरी कर देंगे और इस सुखमय साधनसे सहजहीमें तुझे धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष - ये चारों फल दे देंगे ॥५॥
चित्रकूटमें जो कामतानाथ पर्वत है, वही मनोरथ पूर्ण करनेवाली चिन्तामणि और कल्पवृक्ष है, जो युग - युग पृथ्वीपर जगमगाता है । यों तो चित्रकूट सभीके लिये सुखदायक है, परंतु हे तुलसीदास ! तुझे तो विशेषरुपसे उसीके विश्वास, प्रेम और बलपर निर्भर रहना चाहिये ॥६॥
आ आ हा हा हा हा असीर-ए-पंजा-ए-अहद ए-शबाब कर के मुझे कहाँ गया मेरा बचपन खराब कर के मुझे ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ ऐ हुए हम जिनके लिए बरबाद वो हमको चाहे करें न याद जीवन भर जीवन भर उनकी याद में हम गाए जाएंगे गाए जाएंगे
एक ज़माना था वो पल भर हमसे रहे न दूर हमसे रहे न दूर एक ज़माना था वो पल भर हमसे रहे न दूर हमसे रहे न दूर एक ज़माना है के हुए हैं मिलने से मजबूर मिलने से मजबूर एक ज़माना है के हुए हैं मिलने से मजबूर मिलने से मजबूर वो ग़म से लाख रहे आज़ाद सुने न दर्द भरी फ़रियाद अफ़्साना अफ़्साना हम तो प्यार का दोहराए जाएंगे गाए जाएंगे
मैं हूँ ऐसा दीपक जिस में ऐ ऐ ऐ मैं हूँ ऐसा दीपक जिस में न बाती न तेल न बाती न तेल बचपन बीता बनी मोहब्बत चार दिनों का खेल चार दिनों का खेल बचपन बीता बनी मोहब्बत चार दिनों का खेल चार दिनों का खेल रहे वो दिल का नगर आबाद बसी है जिस में किसी की याद हम दिल को हम दिल को उनके याद से बहलाए जाएंगे गाए जाएंगे हुए हम जिनके लिए बरबाद वो हमको चाहे करें न याद जीवन भर जीवन भर उनकी याद में हम गाए जाएंगे गाए जाएंगे