गुरुवार, 6 अगस्त 2026

बदरा उमरि घुमरि घन गरजे बुंदिया बरसन लागे ना.../ मैथिल कजरी लोक गीत

https://youtu.be/JevTe_AhECM  

बदरा उमरि घुमरि घन गरजे, 
बुंदिया बरसन लागी ना..
बुंदिया बरसन लागी न....!!

दादुर-मोर-पपीहा गाबय, 
जिया उमताबे न.... !
हाय हो रामा.! जिया उमताबे न..!!

विरह के आगि कुहुकी कुहुकाबय 
बैरी कोयलिया ना...!

बदरा उमरि घुमरि घन गरजे, 
बुंदिया बरसन लागी ना..!

पिऊ के पाती लिखल हम कत-विधि, 
तैय्यो न पिघलथि ना..!
हाय हो रामा..! तैय्यो न पिघलथि ना..!!

कंत हमर हियहंत भेल छथि, 
दरदो न जाने ना..!

बदरा उमरि घुमरि घन गरजे, 
बुंदिया बरसन लागी ना..!

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