रविवार, 19 सितंबर 2010

प्रिय पौत्र कुशाग्र के जन्म-दिवस पर

नवांकुर...


-अरुण मिश्र
कुशाग्र  मिश्र



यह    नवांकुर    कुक्षि   से,   
रुचिरा ऋचा के जो उगा है |
मिश्र -कुल-वंशावली-मणि-
माल, नव-कौस्तुभ लगा है ||


          प्रज्ज्वलित   नव - दीप   सा,
          जो  आज  घर की  देहरी  पर |
          क्षितिज पर  कुल - व्योम के,
          चमका  नया  नक्षत्र  भास्वर ||


लहलहाई,    वंश   की    फिर-
बेल,    फूटी     नई     कोंपल|
दूध  से   आँचल   भरा;  कुल -
तरु,  फला  है  पूत  का  फल|| 


           पुष्प    जो    अभिनव   खिला,
            परिवार-बगिया में विहंस कर |
            गोद  दादी   के,  पितामह  के, 
            ह्रदय    में ,   मोद    दे     भर ||


हो 'कुशाग्र', कुशाग्र-मेधायुत,
अपरिमित    बुद्धि - बल    हो|
मंगलम, मधुरं,  शुभम, प्रिय,
प्रोज्ज्वल,  प्रांजल,  प्रबल हो||
 

टिप्पणी :  अपने पौत्र चिरंजीव  'कुशाग्र' के जन्म पर, गत वर्ष लिखी गई यह कविता, उसके प्रथम वर्ष-गांठ
                पर दुनिया के सभी दादाओं की ओर से दुनिया के सभी पोतों के लिए ब्लागार्पित/लोकार्पित करता 
                हूँ|    -अरुण मिश्र    
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4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा लिखा है...कुशाग्र को लम्बी उम्र और सफल जीवन मिले

    http://veenakesur.blogspot.com/

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  2. शानदार विषय-वस्तु जानदार प्रस्तुति.....बधाई।
    सद्भावी--डॉ० डंडा लखनवी

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  3. बालक कुशाग्र आयुष्मान् हो, यशस्वी हो, तपस्वी हो।
    उसके जन्मदिन पर मेरी हार्दिक मंगलकामनाएं स्वीकारें।
    सद्भावी--डॉ० डंडा लखनवी

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  4. सुश्री वीणा जी एवं डॉ. डंडा लखनवी जी, बालक कुशाग्र के प्रति आप सब की शुभकामनाओं हेतु आभारी हूँ |
    - अरुण मिश्र.

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