बुधवार, 31 अक्टूबर 2012

वो जो इल्मो-फ़न के थे आशना......




ग़ज़ल  

वो जो इल्मो-फ़न के थे आशना........
  
-अरुण मिश्र

वो जो इल्मो-फ़न के थे आशना,  कहीं दीखते वो बशर नहीं।
जो मिरे कलाम में था असर,  मुझे  अब लगे  वो असर नहीं॥

सभी  ग़ुल  हैं सूखते शाख़  पर, सभी हीरे  लिपटे हैं  धूल में।
न वो क़द्रदां,  न वे पारखी,  हैं वो पहले से  अहले-नज़र नहीं॥

हैं  बदलते  वक़्त के  संग-संग,  सभी  रूप-रंग   बदल  गये।
है ज़माना पहुँचा  कहाँ तलक, तुझे  इसकी  कोई ख़बर नहीं॥

अभी भी  बचे  हैं  दरख़्त  कुछ,   मेरे  शह्र में , मिरे  लान में।
पर थीं जिसपे  कूकती कोयलें,  कहीं दूर तक वो  शज़र नहीं॥

तेरे नग़मों में अभी ताजगी,  तेरी  ऑखों में  अभी  ख़्वाब  हैं।
तेरी जुस्तजू है  अथाह की,   कहीं  थक के  जाना  ठहर नहीं॥
                                                      *
(टिप्पणी : 31.08.2012 की पोस्ट में बिना वीडियो के पूर्वप्रकाशित।)


बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

हे! राम राम जय राम राम....

 हे!  राम राम जय राम राम....




 हे!  राम राम जय राम राम....

  - अरुण मिश्र

 जय  राम,  राम,  जय  रामचन्द्र।
 शोषित- जन- मन-विश्राम,चन्द्र।
 दशरथ -  हृत्व्योम - बिहारी    हे!
 रघुकुल  के  चिर-अभिराम चन्द्र।।

               शुचि, जीवन-मूल्यों के  मापक।
               हे पूर्ण-पुरुष! अग-जग-व्यापक।
               यश-वाहक,   संस्कृति-संवाहक। 
               मर्यादाओं       के       संस्थापक।।

    हे!   दीन - हीन   के   मन  के   बल।
    मुनि-हृदय-मीन, तव-भक्ति सुजल।
    हे!    चिर-नवीन- शुभ-आस-रश्मि।
    हे!  आर्त - दुखी- जन    के    संबल।।

               भारत-भुवि  के   गौरव   ललाम।
               हे! संत- सरल- चित- परमधाम।
               निष्काम !  करो  लीला- सकाम।
               हे!  राम,  राम,   जय   राम-राम।।
                                         *
(17 अक्टूबर , 2010 की पोस्ट में पूर्वप्रकाशित।)

                                      *विजय दशमी की शुभकामनायें *




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रविवार, 30 सितंबर 2012

आप मेरे हुज़ूर भी रहिये.....




ग़ज़ल

आप मेरे हुज़ूर भी रहिये.....

-अरुण मिश्र.

आप     मेरे     हुज़ूर    भी    रहिये।
बा-अदब,   बा-शऊर    भी   रहिये।।

कुछ अज़ब सी हैं ख़्वाहिशें उसकी।       
पास  भी  रहिये,   दूर   भी   रहिये।।

जाम   नज़रों  के,  पीजिये  हरदम।
और   फिर,    बेसुरूर   भी   रहिये।।

मिस्ले-काजल भी रहिये आँखों में।
हो  के  आँखों  का  नूर,  भी  रहिये।।

आप    बेशक़    गुनाह   भी   कीजे।
ज़ाहिरा     बेकुसूर      भी     रहिये।।
                               *

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शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

प्रिय पौत्र कुशाग्र के तीसरी वर्ष-गाँठ पर विशेष......












चिड़िया रानी आईं हैं...........

-अरुण मिश्र.

"चिड़िया  रानी  आईं   हैं,  मुन्ने  को  बुलाने।
 आओ  चलें  मुन्ने  राजा  बारिश  में  नहाने। 
 मुन्ना मुश्किल में,  भीगूँ तो  मम्मी डांटेंगी।
 बोलो चिड़िया फिर क्या  मैं बनाऊंगा बहाने।।"

         *                      *                    *

"नन्ही  चिड़िया  रानी  हैं,  मुन्ने  की  सहेली।
 मुन्ने  बिना  कहीं भी  न  जातीं  वो  अकेली।
 पर  जिस दिन  न आयें वो,  बनायें ये बहाना।
 'मुन्ना,  मैं  तो  सुरमा  लेने  गई  थी  बरेली'।।"

          *                     *                     *

"मुन्ने से दूनी  बढ़ती  मुन्ने की  कारस्तानी।
 मम्मी-पापा  आठों  पहर,   करते  निगरानी।
 मुन्ना  मुश्किल  में,  क्या बोले,  करे,  खेले।
 मुन्ने  की  हर  बात  ही   कहलाती  शैतानी।।"

           *                     *                    *   



टिप्पणी : मेरा बेटा जब दो-तीन वर्ष का था तब उसके लिए लिखी गई 
लोरियों में से तीन लोरियां, उसके बेटे (मेरे पोते) की तीसरी वर्ष-गाँठ 
पर आशीर्वाद एवं मंगलकामनाओं के साथ पोस्ट कर रहा हूँ।-अरुण मिश्र.    

रविवार, 16 सितंबर 2012

ये घर के सामने जो गुलमुहर है........


ये घर के सामने जो गुलमुहर है........ 



















ग़ज़ल 

ये घर के सामने जो गुलमुहर है........

-अरुण मिश्र.

ये   घर  के   सामने   जो   गुलमुहर  है।
मेरे    शे'रो-सुख़न    का   हमसफ़र   है॥

है सुब्हो-शाम हर सुख-दुख में शामिल।     
क़रीबी    है,   बहुत    ही    मो'तबर    है॥

हैं     बालो-पर     ख़याल-आराइयों   के।
हरी    जो     पत्तियां     ओढ़े   शजर   है॥

मैं   ख़ुश  होता  तो   ये  भी   झूमता  है।
इसे   दिल   की   हमारे    हर   ख़बर  है॥

टंके    हैं    सुर्ख़   फूलों   के   जो  गुच्छे।
भरा    उनमें     मेरा    ख़ूने-जिगर    है॥

है    परवाज़े-सुख़न   में    जोश   भरता।
ये   मेरी   ख़ाक    में    भरता  शरर   है॥

'अरुन'  है साथ  जब तक गुलमुहर का।
नहीं   तनहाइयों   का     कोई    डर   है॥

                                   *