शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020

जो मैं जानती बिसरत हैं सैंया... / कलाम अमीर ख़ुसरो / उस्ताद फ़रीद अयाज़ एवं उस्ताद अबू मुहम्मद क़व्वाल

https://youtu.be/anHvAeEYBQw
Jo Mein Jaanti Bichhrat Hein Sayyan / Amir Khusro
Attributed to Shakeel Badayuni for Film shabnam (1954)
Recital: Ustad Farid Ayaz and Ustad Abu Muhammad Qawwal Party

जो मैं जानती बिसरत हैं सैंया 
घुँघटा में आग लगा देती 
मैं लाज के बंधन तोड़ सखी 
पिया प्यारे को अपने मना लेती 

मेरे हार-सिंगार की रात गई
पियू संग उमंग मेरी आज गई
घर आए ना मोरे साँवरिया 
मैं तो तन-मन उनपे लुटा देती
जो मैं जानती ...

मोहे प्रीत की रीत न भाई सखी
मैं बनके दुल्हन पछताई सखी 
होती ना अगर दुनिया की शरम
उन्हें भेज के पतियाँ बुला लेती
जो मैं जानती ...

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