सोमवार, 24 जनवरी 2022

चाहत में क्या दुनिया-दारी इश्क़ में कैसी मजबूरी.../ मोहसिन भोपाली / गायन : गुल बहार बानो

 https://youtu.be/nkh2KkJPy2g

Mohsin Bhopali 
(Born 1932, Bhopal, India - Died 17 January 2007, Karachi, Pakistan) 
was a Pakistani poet. He was known for a travelogue Hairaton ki Sarzamin 
and a book of verses Shahr-i-Ashob in opposition to the 1992 military operation 
in Karachi.
Gulbahar Bano, (born 1963) is a Pakistani ghazal singer. She started her 
singing career in 70s and early 80s from Radio Pakistan, Bahawalpur station. 
She moved to Karachi in 80s and moved her focus to ghazal singing. Later 
she moved to Lahore. She recieved Pakistan's Presidential Award, 'Pride of 
Performance" in 2006.
She is currently living a very vulnerable life with her brothers family in 
Khanqah SharifBahawalpur District. She has lost senses since last few 
years and is not able to spend an ordinary life. 


चाहत में क्या दुनिया-दारी इश्क़ में कैसी मजबूरी

लोगों का क्या समझाने दो उन की अपनी मजबूरी

मैं ने दिल की बात रखी और तू ने दुनिया वालों की

मेरी अर्ज़ भी मजबूरी थी उन का हुक्म भी मजबूरी

रोक सको तो पहली बारिश की बूंदों को तुम रोको

कच्ची मिट्टी तो महकेगी है मिट्टी की मजबूरी

ज़ात-कदे में पहरों बातें और मिलीं तो मोहर ब-लब

जब्र-ए-वक़्त ने बख़्शी हम को अब के कैसी मजबूरी

जब तक हँसता गाता मौसम अपना है सब अपने हैं

वक़्त पड़े तो याद जाती है मसनूई मजबूरी

इक आवारा बादल से क्यूँ मैं ने साया माँगा था

मेरी भी ये नादानी थी उस की भी थी मजबूरी

मुद्दत गुज़री इक वा'दे पर आज भी क़ाएम हैं 'मोहसिन'

हम ने सारी उम्र निबाही अपनी पहली मजबूरी

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