rashmi rekh
सोमवार, 31 मार्च 2025
इन्तज़ार-ए-सबा रहा बरसों.../ शायर : क़ैसर-उल-जाफ़री / गायन : काव्या लिमये
https://youtu.be/MUld7FONYjc
इन्तज़ार-ए-सबा रहा बरसों
इक दरीचा खुला रहा बरसों
एक दिन उनका प्यार बरसा था
और मैं भीगता रहा बरसों
उनकी आँखों के ज़ाम याद रहे
बिन पिये भी नशा रहा बरसों
फ़ासले कम न हो सके कैसर
आमना-सामना रहा बरसों
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