गुरुवार, 10 मार्च 2022

चँहु-दिशि कमल खिले...

चँहु-दिशि कमल खिले...
-अरुण मिश्र.

नव प्रभात है 
भारत-भू पर 
चँहु-दिशि कमल खिले।।   

जन-मानस-सर 
शुचि-जल पूरित;  
शुभ-संकल्प फले।। 

छद्म बौद्धिकताएं,
परास्त हैं;
झूठे दम्भ जले।। 

ऊर्जा, श्रम, 
मेधा की जय हो;
सुख-सौभाग्य मिले।।        

भारत की जय हो;
समृद्धि की 
गंगा बह निकले।।  
              *
(मई १९१४ में पूर्वप्रकाशित)

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