बुधवार, 9 मार्च 2022

बहार आई तो.../ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ / गायन : टीना सानी

 https://youtu.be/E8xdV3-bHv8

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (१९११ - १९८४), भारतीय उपमहाद्वीप के एक विख्यात 
पंजाबी शायर थे, जिन्हें अपनी क्रांतिकारी रचनाओं में रसिक भाव (इंक़लाबी 
और रूमानी) के मेल की वजह से जाना जाता है। सेना, जेल तथा निर्वासन में 
जीवन व्यतीत करने वाले फ़ैज़ ने कई नज़्में और ग़ज़लें लिखी तथा उर्दू शायरी 
में आधुनिक प्रगतिवादी (तरक्कीपसंद) दौर की रचनाओं को सबल किया। उन्हें 
नोबेल पुरस्कार के लिए भी मनोनीत किया गया था। फ़ैज़ पर कई बार कम्यूनिस्ट (
साम्यवादी) होने और इस्लाम से इतर रहने के आरोप लगे थे पर उनकी रचनाओं 
में ग़ैर-इस्लामी रंग नहीं मिलते। जेल के दौरान लिखी गई उनकी कविता 
'ज़िन्दान-नामा' को बहुत पसंद किया गया था। उनके द्वारा लिखी गई कुछ 
पंक्तियाँ अब भारत-पाकिस्तान की आम-भाषा का हिस्सा बन चुकी हैं, जैसे 
कि 'और भी ग़म हैं ज़माने में मुहब्बत के सिवा'।

टीना सानी एक पाकिस्तानी महिला गायिका हैं जो अपनी शास्त्रीय और 
अर्ध-शास्त्रीय उर्दू ग़ज़लों के लिए प्रसिद्ध हैं ।
टीना सानी का जन्म पूर्वी पाकिस्तान के समय ढाका में हुआ था ; परिवार 
कुछ वर्षों के लिए काबुल चला गया, जहाँ उनके पिता, नासिर साहनी , 
एक तेल कंपनी के लिए काम करते थे, कराची जाने से पहले। कराची 
अमेरिकन स्कूल से स्नातक होने के बाद , उन्होंने व्यावसायिक कला 
का अध्ययन किया। दिल्ली घराने के उस्ताद रमजान खान के बेटे उस्ताद 
निजामुद्दीन खान और उस्ताद चंद अमरोहवी ने उन्हें शास्त्रीय संगीत का 
प्रशिक्षण दिया था । टीना ने ग़ज़ल गायक मेहदी हसन से भी विशेष प्रशिक्षण 
प्राप्त किया ।
टीना सानी ने 1977 में एक विज्ञापन एजेंसी के लिए काम करना शुरू किया। 
टीना कराची अमेरिकन स्कूल में कला विभाग में पढ़ाती भी हैं।

बहार आई तो जैसे एक बार
लौट आये हैं फिर अदम से
वो ख़्वाब सारे, शबाब सारे
जो तेरे होंठों पे मर मिटे थे
जो मिट के हर बार फिर जिये थे
निखर गये हैं गुलाब सारे
जो तेरी यादों से मुश्कबू हैं
जो तेरे उश्शाक़ का लहू हैं
उबल पड़े हैं अज़ाब सारे
मलाल-ए-अहवाल-ए-दोस्ताँ भी
ख़ुमार्-ए-आग़ोश-ए-महवशाँ भी
ग़ुबार-ए-ख़ातिर के बाब सारे
तिरे हमारे
सवाल सारे, जवाब सारे
बहार आई तो खुल गये हैं
नये सिरे से हिसाब सारे
अदम - शून्य 
ख़्वाब - स्वप्न  
शबाब - यौवन 
मुश्कबू - कस्तूरी की सुगंध  
उश्शाक़ - चाहने वालों 
अज़ाब - यातना 
मलाल-ए-अहवाल-ए-दोस्ताँ   -  दोस्तों के हाल का मलाल 
ख़ुमार-ए-आग़ोश-ए- महवशाँ  -  चन्द्रमुखियों के आलिंगन की ख़ुमारी 
ग़ुबार-ए-ख़ातिर - दिल के ग़ुबार 
बाब - दरवाज़े
 

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