शनिवार, 14 अगस्त 2021

मनवा भूलो जावे रे.../ मारवाड़ी भजन / स्वर : स्वर्गीय दान सिंह

https://youtu.be/_5KAyDabvNI  
दानसिंह 
मारवाड़ के प्रसिद्ध भजन गायक दानसिंह का 80 वर्ष की उम्र में ३० मार्च, २०१९ 
को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया और इसी के साथ थार में भजन गायकी 
के एक युग का अंत हो गया।

मारवाड़ के प्रसिद्ध भजन गायक दानसिंह ने वीणा पर भजन गायन की शुरुआत 
16 वर्ष की उम्र में की थी और  निधन से एक दिन पहले तक गायन करते रहे। 
वे व्यावसायिक श्रेणी के कलाकार थे। इनकी वीणा वादन में साधना थी तथा क्षेत्र 
के मठों, मंदिरों व बड़ी जागरणों में इनके भजनों के बिना कार्यक्रम अधूरा समझा 
जाता था। इन्हें वीणा, ढोलक, कांसिए, हारमोनियम की संगत से राग रागिनियों, 
सुर ताल लय में दक्षता हासिल थी। उन्हें  हजारों की संख्या में भजन, कथाएं, दोहे, 
लोकोक्तियां आदि कंठस्थ थे। मूलतः सरली गांव के गंगासरा निवासी दानसिंह साठ 
साल से जिला मुख्यालय बाड़मेर पर निवास कर रहे थे। उन्होंने राजकीय अस्पताल में 
टेक्नीशियन के तौर पर सेवाएं दी। बचपन से ही भजन गायन का शौक होने के कारण 
विभिन्न भजन मंडलियों व जम्मा-जागरण में प्रस्तुतियां देते थे। इनकी गायकी के 
प्रति इतनी लगन थी कि सोलह साल की उम्र में भजन गायन शुरू किया और अंतिम 
समय से एक दिन पहले तक भजन गायन करते रहे।

80 वर्ष की उम्र के बावजूद दानसिंह ने पिछले 2 वर्षों से (२०१७-२०१९), कबीर यात्रा में 
लगातार भाग लिया और बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर आदि जिलों में अपनी 
गायकी का जादू बिखेरा। इस उम्र में भी उनकी गायकी प्रतिभा से प्रभावित होकर जिले 
के कई युवाओं ने पारम्परिक वाद्य यंत्रों पर उनसे गायन सीखा। उनसे गायकी सीख 
कर कई युवा इंटरनेशनल मंच पर अपनी प्रस्तुतियां दे चुके है।
मुख्य स्वर एवं तम्बूरा - स्वर्गीय दान सिंह मंजीरा - कुम्बा राम , देवी सिंह ढोलक - जीवन हारमोनियम - नर सिंह बकोलिया

मनवा भूलो जावे रे मनरको
भूलो तो जावे रे
ये सद्गुरु देव समझावे रस्ते क्यूं नही आवे
परनद्यिंया में बक-बक बोले
जीभ थकावे रे
मनवा जीभ क्यों थकावे रे
ये हरि को नाम लेवे क्यों गरू न लावे रे
मनरको
मनरको भूलो तो जावे रे
सतगुरु देव समझावे के रस्ते क्यों नहीं आवे
ये खेल-तमाशा देखे
अपने रैन बितावे रे
मनवा थारी रैन बितावे रे
ते साध रे संगत में जावे
नुग्रा निंद्रा तो आवे
मनवर को भूलो
मनवर को भूलो तो जावे रे
सतगुरु देव समझावे के रस्ते क्यों नहीं आवे
मजमा आगे तू भयो मतवालो
धूम मचावे रे
मनवा तू
धूम मचावे रे
तेरे मात-पिता सो करे लड़ाई ताने शरम नहीं आवे रे मनर क्यों भूलो मनर क्यों भूलो रे जावे रे सतगुरु देव समझावे के रस्ते क्यों नहीं आवे
जियाराम रे केहदे द्यो को गुरु बनावे रे मनर क्यों भूलो रे जावे रे सतगुरु देव समझावे तो मारग क्यों नहीं आवे
भूलो जावे रे
मनर मारो क्यों भूलो रे जावे रे सतगुरु देव समझावे तो रस्ते क्यों नहीं आवे जियाराम रे केहदे द्यो को गुरु बनावे रे मनर क्यों भूलो मनावे रे रे कह गयो रे रिषी-मुनी फक्कड़ वानी में गावे रे मनर क्यों भूलो क्यों जावे रे
सतगुरु देव समझावे तो रस्ते क्यों नहीं आवे

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